<?php /** * The template for displaying the header * */ defined( 'ABSPATH' ) || exit; // Exit if accessed directly ?><!DOCTYPE html> <html <?php language_attributes(); ?>> <head> <meta charset="<?php bloginfo( 'charset' ); ?>" /> <link rel="profile" href="http://gmpg.org/xfn/11" /> <?php wp_head(); ?> </head> <body id="tie-body" <?php body_class(); ?>> <?php wp_body_open(); ?> <div class="background-overlay"> <div id="tie-container" class="site tie-container"> <?php do_action( 'TieLabs/before_wrapper' ); ?> <div id="tie-wrapper"> <?php TIELABS_HELPER::get_template_part( 'templates/header/load' ); do_action( 'TieLabs/before_main_content' );
बिज़नेस

भारत में पोल्ट्री फीड की कीमतें ऊंची, लेकिन अंडा दुनिया में सबसे सस्ता, ब्राजील-अमेरिका के रेट का फर्क जानें

 नई दिल्ली
केंद्रीय पशुपालन और डेयरी मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में भारत में करीब 25 हजार करोड़ अंडों का उत्पादन हुआ था. बाजार में एक अंडे की वर्तमान कीमत 8 से 9 रुपये है. पोल्ट्री एक्सपर्ट का दावा है कि ये पहला मौका है जब अंडा 8 रुपये का बिक रहा है और पोल्ट्री फार्मर को लागत के हिसाब से ठीक-ठाक मुनाफा हो रहा है. लेकिन हैरत की बात ये है कि देश में जिस अंडे को महंगा बताया जा रहा है वो दुनिया का सबसे सस्ता अंडा है. दूसरे कई देशों में भारत के मुकाबले कई गुना महंगा अंडा बिक रहा है. 

और ये तब है जब महंगा अंडा बेचने वालों के मुकाबले भारत में सबसे महंगा पोल्ट्री फीड बिक रहा है. अगर दो-चार देशों को छोड़ दें तो विश्व का सबसे महंगा पोल्ट्री फीड भारत में बिक रहा है. ऐसा नहीं है कि पोल्ट्री फीड में शामिल मक्का और सोयाबीन का उत्पादन भारत में नहीं होता है. लेकिन वहां भी किसानों की लागत इतनी ज्यादा है कि मक्का और सोयाबीन की वजह से ही पोल्ट्री फीड महंगा हो जाता है.  

देश-विदेश में क्या हैं फीड के रेट 

    यूएसए में एक टन मक्का के दाम- 174.8 डॉलर (15760 भारतीय रुपये में)
    ब्राजील में एक टन मक्का के दाम- 184 डॉलर (16588 भारतीय रुपये में) 
    यूक्रेन में एक टन मक्का के दाम- 213 डॉलर (19385 भारतीय रुपये में) 
    भारत में एक टन मक्का के दाम- 24 हजार से 24250 रुपये तक. 
    नोट- मक्का मूल्य तुलना जनवरी 2026.

अंडे और विश्व में उसके दाम 
 

    साल 2026 में भारत में औसत 70 से 100 रुपये के 12 अंडे बिक रहे हैं. 
    ब्राजील में 12 अंडों के दाम करीब 250 रुपये हैं. 
    संयुक्त राज्य अमेरिका 12 अंडों के दाम करीब 258 रुपये हैं. 

किस देश के फार्मर को कितना हो रहा मुनाफा 

    भारत में अभी पोल्ट्री फार्मर 72 से 78 रुपये के 12 अंडे बेच रहे हैं. 
    ब्राजील में पोल्ट्री फार्मर 129 रुपये के 12 अंडे बेच रहे हैं.
    संयुक्त राज्य अमेरिका में पोल्ट्री फार्मर 132 रुपये के 12 अंडे बेच रहे हैं. 

भारतीय पोल्ट्री फार्मर अमेरिका और ब्राजील के किसानों मुकाबले मक्का के लिए 35 से 50 फीसद ज्यादा दाम चुका रहे हैं. सोयाबीन मील के मामले में भी हालात कोई अलग नहीं हैं. साल 2021-22 के संकट के बाद भारत में कीमतें 84000 रुपये मीट्रिक टन तक बढ़ गईं थी. जिसके बाद GM सोयाबीन मील इंपोर्ट करनी पड़ी थी. 

भारत में क्यों महंगा है पोल्ट्री फीड?
प्रेसिडेंट सुरेश चित्तुरी का कहना है कि देश में फीड लागत की परेशानी अचानक से सामने नहीं आई है. ये सब पॉलिसी की वजह से हो रहा है. इसे इस तरह से भी समझा जा सकता है. 

मक्के पर ज़्यादा इंपोर्ट टैरिफ-

    50 फीसद बेसिक कस्टम ड्यूटी, साथ ही 5 फीसद IGST और 10 फीसद सरचार्ज. 
    4.5 करोड़ टन से ज़्यादा पोल्ट्री फीड अनाज की जरूरत के मुकाबले, 15 फीसद ड्यूटी पर 5 लाख टन का एक छोटा सा टैरिफ रेट कोटा (TRQ), सोया-सोयामील पर टैरिफ और प्रतिबंध, सोयाबीन पर 45 से 56.5 फीसद टैरिफ. 
    GM सोयाबीन, मील का इंपोर्ट सिर्फ खास संकट के समय दी गई छूट के जरिए ही होता है. 

जीएम फसल पर बैन-
भारत में अभी भी फीड के लिए जीएम मक्का और जीएम सोया पर बैन लगा हुआ है. अमेरिका और ब्राजील 90 फीसद जीएम क्षेत्र में खेती करते हैं, जिससे 20 से 30 फीसद ज़्यादा पैदावार होती है जो लागत को कम कर देती है. 

इथेनॉल ब्लेंडिंग पर जोर- 
देश में 80 लाख से एक करोड़ टन मक्का इथेनॉल में जा रहा है. जिसके चलते फीड में सप्लाई कम हो रही है. जबकि 2024 से मक्के की कीमत 14 फीसद तक बढ़ गई हैं. इन्हीं सब चीजों का नतीजा है कि भारतीय पोल्ट्री फार्मर अपना मुख्य कच्चा माल विश्व की ऊंची कीमतों पर खरीदते हैं, जबकि बाजार में प्रोडक्ट बेचने पर उन्हें कोई खास फायदा नहीं मिलता है. 

क्या कहते हैं पोल्ट्री एक्सपर्ट
इंटरनेशन ऐग कमीशन के प्रेसिडेंट और श्रीनिवास ग्रुप के एमडी सुरेश चित्तुरी का कहना है कि अगर सरकार पोल्ट्री फार्मर को राहत दे तो पोल्ट्री प्रोडक्शन अंडे-चिकन का उत्पादन और बढ़ सकता है. और सस्ता अंडा उत्पादन करने का फायदा हम इंटरनेशनल मार्केट में उठा सकते हैं. अभी नाम मात्र के आंकड़े के साथ अंडा एक्सपोर्ट हो रहा है.  

पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया के ज्वाइंट सेक्रेटरी रिकी थापर का कहना है कि भारत में लेबर सस्ती है तो इसके चलते भी अंडे के दाम कम रहते हैं. जबकि दूसरे देशों में पोल्ट्री फार्म में काम करने वाली और फार्म का शेड तैयार करन वाली हर तरह की लेबर महंगी है.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button