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छत्तीसगड़

जगदलपुर में पुर्नवासितों ने देखा बस्तर का सांस्कृतिक-ऐतिहासिक वैभव

जगदलपुर.

हिंसा का अंधेरा छोड़कर शांति और विकास की ‘नुवा बाट’ (नई राह) चुनने वाले पुर्नवासितों के लिए मंगलवार का दिन नई उमंग और सकारात्मक अनुभवों से भरा रहा। जिला प्रशासन की एक सराहनीय पहल के तहत जगदलपुर स्थित पुनर्वास केंद्र में निवासरत पुर्नवासितों को बस्तर के प्रमुख दर्शनीय, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण कराया गया। इस विशेष भ्रमण कार्यक्रम का उद्देश्य केवल पर्यटन नहीं, बल्कि मुख्यधारा में लौटे इन सदस्यों को भयमुक्त वातावरण का अनुभव कराना, क्षेत्र के विकास कार्यों से जोड़ना और उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से पुनः परिचित कराना रहा।

भ्रमण की शुरुआत बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी के दर्शन से हुई। मंदिर में पूजा-अर्चना कर सभी ने अपने उज्ज्वल और शांतिपूर्ण भविष्य की कामना की। इसके पश्चात दलपत सागर और विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा के केंद्र ‘दशहरा पसरा’ का अवलोकन कराया गया, जहाँ उन्हें बस्तर की गौरवशाली परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत की जानकारी दी गई। कार्यक्रम के अगले चरण में सदस्यों ने कलेक्टोरेट का दौरा किया, जहाँ उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था और शासन की कार्यप्रणाली को नजदीक से देखा। दिन का सबसे रोमांचक पड़ाव विश्व प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात रहा। प्रकृति के अद्भुत सौंदर्य, गिरते झरनों की गर्जना और खुले वातावरण ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

‘नुवा बाट’ के तहत आयोजित यह भ्रमण कार्यक्रम एक मनोवैज्ञानिक और सामाजिक पुनर्वास का भी महत्वपूर्ण प्रयास रहा। इससे पुर्नवासितों के मन में यह विश्वास और मजबूत हुआ कि हिंसा छोड़कर समाज के साथ कदमताल करने में ही जीवन की वास्तविक खुशी और उन्नति निहित है। खुली हवा में सांस लेते हुए और बस्तर की बदलती, विकासोन्मुख तस्वीर को अपनी आंखों से देखकर पुर्नवासितों ने महसूस किया कि शांति का मार्ग ही सम्मानजनक और सुरक्षित भविष्य की ओर ले जाता है। प्रशासन का यह प्रयास पुर्नवासितों को समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक स्थान दिलाने और उन्हें अपनी माटी, संस्कृति और परंपराओं से पुनः जोड़ने की दिशा में एक सार्थक और प्रेरणादायी कदम साबित हो रहा है।

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