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छत्तीसगड़

आल्हामाड़ा केवल तीर्थ नहीं, आदिवासी अस्मिता का केंद्र हैः रामविचार नेताम

एमसीबी : जनजातीय आस्था का तीर्थ आल्हामाड़ा: सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रतीक बना छेरता तिहार

आल्हामाड़ा केवल तीर्थ नहीं, आदिवासी अस्मिता का केंद्र हैः रामविचार नेताम
आल्हामाड़ा तीर्थ स्थल को मिलेगी नई पहचानः प्रभारी मंत्री ने किया मंच व सामुदायिक भवन के लिए 40 लाख की घोषणा
छेरता पर्व केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है – श्याम बिहारी जायसवाल

एमसीबी 

छत्तीसगढ़ की महान, गौरवशाली एवं प्राचीन लोकसंस्कृति को संजोए रखने वाला लोकपर्व छेरता तिहार इस वर्ष आल्हामाड़ा धाम, ग्राम पंचायत बंजी में अपार श्रद्धा, आस्था और सांस्कृतिक उल्लास के साथ ऐतिहासिक रूप से संपन्न हुआ। यह भव्य आयोजन न केवल छत्तीसगढ़ी लोकपरंपराओं की जीवंत झलक प्रस्तुत करता रहा, बल्कि सामाजिक एकता, जनविश्वास, सांस्कृतिक चेतना और सामूहिक सहभागिता का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा। तीन दिवसीय इस महापर्व का आयोजन 03 जनवरी 2026 से 05 जनवरी 2026 तक बंजी ग्राम पंचायत स्थित ऐतिहासिक एवं आस्था के केंद्र आल्हामाड़ा धाम में किया गया। आयोजन को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह और उमंग का माहौल बना रहा। दूर-दराज के गांवों से श्रद्धालु, जनजातीय समाज के लोग, सामाजिक कार्यकर्ता, व्यापारी वर्ग, जनप्रतिनिधि और सांस्कृतिक प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित होकर छेरता पर्व की गरिमा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते नजर आए।

छेरता तिहार के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति से ओत-प्रोत विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों की आकर्षक प्रस्तुतियां हुईं। सुवा नृत्य, सैला, कर्मा, लोकड़ी जैसे पारंपरिक लोकनृत्यों ने दर्शकों का मन मोह लिया, वहीं कबड्डी प्रतियोगिता जैसे खेल आयोजनों ने युवाओं में विशेष उत्साह भर दिया। पूरे परिसर में पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीतों और ढोल-मांदर की गूंज ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा को जीवंत कर दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ छत्तीसगढ़ महतारी के छायाचित्र पर दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस गरिमामय अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन के प्रभारी मंत्री रामविचार नेताम, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, जिला अध्यक्ष चंपादेवी पावले, जिला पंचायत अध्यक्ष यशवंती सिंह, जिला पंचायत सदस्य रामजीत लकड़ा, श्रीमती अनीता सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और समाजसेवी मंचासीन रहे। सभी ने लोकसंस्कृति के संरक्षण और संवर्धन का सामूहिक संदेश दिया। इस अवसर पर डीएम ने हसदेव क्षेत्र की ओर से समस्त क्षेत्रवासियों को बधाई देते हुए कहा कि आल्हामाड़ा की पावन धरती पर छेरछेरा पर्व का यह भव्य आयोजन अत्यंत सराहनीय है।

उन्होंने कहा कि छेरछेरा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि गांवों की मूल और जीवंत संस्कृति की पहचान है, जिसे हम पीढ़ी दर पीढ़ी सहेजते आ रहे हैं। उन्होंने बच्चों द्वारा पर्यावरण संरक्षण पर दिए गए संदेश की सराहना करते हुए कहा कि यह हमारी आने वाली पीढ़ी की जागरूकता का प्रतीक है। उन्होंने संस्कृति और प्रकृति को एक-दूसरे का पूरक बताते हुए आयोजन समिति की सराहना की और 11 हजार रुपये के सहयोग की घोषणा की। वहीं स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने आल्हामाड़ा और जोगी डोंगरी की जयघोष के साथ अपने संबोधन में कहा कि छेरता पर्व और इससे जुड़ा मेला इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। उन्होंने कहा कि यह स्थान न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का केंद्र है, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण ऐसा स्थल है, जहां दूर-दूर से लोग आते हैं। उन्होंने जिले में स्वीकृत और निर्माणाधीन सड़कों, किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी, तेंदूपत्ता संग्रहण, महतारी वंदन योजना और श्रमिक परिवारों के कल्याणकारी कार्यों की जानकारी देते हुए सरकार की जनकल्याणकारी सोच को रेखांकित किया।

भारी मंत्री रामविचार नेताम ने धरती माता, गहिवार बाबा, जोगी डोंगरी और बूढ़ादेव की जयकारा के साथ अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि छेरछेरा पूरे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान है। उन्होंने आल्हामाड़ा को आदिवासी समाज का प्रमुख तीर्थ स्थल बताते हुए इसके व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और मीडिया के माध्यम से आल्हामाड़ा की पहचान प्रदेश और देशभर में स्थापित की जानी चाहिए। जनजातीय समाज के उत्थान के लिए संचालित योजनाओं, प्रयास आवासीय विद्यालयों, पीएम जनमन और पीवीजीटी योजनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने आदिवासी संस्कृति के संरक्षण के लिए राजधानी में निर्मित ट्राइबल म्यूजियम की जानकारी दी। अंत में उन्होंने आल्हामाड़ा में मंच एवं सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 40 लाख रुपये की घोषणा की, जिस पर उपस्थित जनसमूह ने तालियों के साथ स्वागत किया। बड़ादेव धाम समिति आल्हामाड़ा बंजी एवं ग्राम पंचायत बंजी की सक्रिय भूमिका से यह आयोजन सुव्यवस्थित, सफल और स्मरणीय बन सका। श्रद्धालुओं और अतिथियों के लिए की गई व्यवस्थाओं की चारों ओर सराहना हुई। लोकपर्व छेरता ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि यह केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, भाईचारे और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने वाला महोत्सव है, जो छत्तीसगढ़ की आत्मा को एक सूत्र में बांधता है।

अंत में प्रभारी मंत्री रामविचार नेताम एवं स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने आयोजन स्थल पर चल रही कबड्डी प्रतियोगिता का अवलोकन करते हुए महिला एवं पुरुष खिलाड़ियों से आत्मीय मुलाकात की। मंत्रियों ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके खेल कौशल की सराहना की और ग्रामीण अंचलों में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए शासन की प्रतिबद्धता दोहराई। खिलाड़ियों एवं उपस्थित दर्शकों ने अतिथियों का करतल ध्वनि से स्वागत किया। इस अवसर पर मनोज विश्नोई महाप्रबंधक हसदेव क्षेत्र, चन्द्रकान्त पटेल, शरण सिंह मरपच्ची, श्रीमती सीता देवी, सुरेन्द्र सिंह, देव कुमार, रमेश सिंह, दलप्रताप सिंह, हीरा सिंह, लखनलाल श्रीवास्तव, रामलखन पैकरा, ममता सिंह, उजित नारायण सिंह सहित सभी जनप्रतिनिधि एवं जनपद सीईओ सुवैशाली सिंह, तहसीलदार सुश्रुति धुर्वे सहित अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

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