<?php /** * The template for displaying the header * */ defined( 'ABSPATH' ) || exit; // Exit if accessed directly ?><!DOCTYPE html> <html <?php language_attributes(); ?>> <head> <meta charset="<?php bloginfo( 'charset' ); ?>" /> <link rel="profile" href="http://gmpg.org/xfn/11" /> <?php wp_head(); ?> </head> <body id="tie-body" <?php body_class(); ?>> <?php wp_body_open(); ?> <div class="background-overlay"> <div id="tie-container" class="site tie-container"> <?php do_action( 'TieLabs/before_wrapper' ); ?> <div id="tie-wrapper"> <?php TIELABS_HELPER::get_template_part( 'templates/header/load' ); do_action( 'TieLabs/before_main_content' );
विदेश

तेल उत्पादन बढ़ाने में जूझेगा वेनेजुएला, इस देरी से भारत की ऑयल कंपनियों को हो सकता है फायदा

नई दिल्ली
वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार है, लेकिन इसके बावजूद वहां तेल का उत्पादन बहुत कम है। इसकी मुख्य वजहें तकनीकी ज्ञान की कमी, कम निवेश, राजनीतिक दखल, खराब प्रबंधन, भ्रष्टाचार और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हैं। सोमवार को जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक इन कारणों की वजह से वेनेजुएला अपने तेल भंडार का सही उपयोग नहीं कर पा रहा है। नए साल की शुरुआत में एक बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला, जब अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला पर हमला करने के बाद राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया। पीएल कैपिटल की रिपोर्ट में कहा गया है कि मादुरो वर्ष 2013 में राष्ट्रपति बने थे और तब से वे ज्यादातर फैसले अध्यादेशों के जरिए लेते रहे हैं। हालिया घटनाक्रम के चलते अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में कुछ समय के लिए अस्थिरता देखने को मिल सकती है।
पीएल कैपिटल के रिसर्च एनालिस्ट स्वर्णेंदु भूषण ने कहा कि वेनेजुएला के पास सबसे बड़ा तेल भंडार है, जो अनुमानित 303.8 अरब बैरल (2020) है। इसके बाद सऊदी अरब का स्थान आता है, जिसके पास लगभग 297.5 अरब बैरल तेल का भंडार है। इसके बाद कनाडा, ईरान और इराक के पास क्रमशः 168.1 अरब बैरल, 157.8 अरब बैरल और 145 अरब बैरल तेल है, जो वेनेजुएला और सऊदी अरब से काफी कम हैं। वहीं, अगर तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो दुनिया में सबसे ज्यादा तेल खपत करने वाला देश अमेरिका है, जिसके पास मात्र 68.8 अरब बैरल का तेल भंडार है, जो बहुत कम है।
इतना बड़ा तेल भंडार होने के बावजूद वेनेजुएला का तेल उत्पादन निराशाजनक है। नवंबर 2025 में वेनेजुएला में प्रतिदिन केवल 10 लाख बैरल तेल का उत्पादन हुआ। इसके मुकाबले अमेरिका में रोजाना लगभग 1 करोड़ 37 लाख बैरल और सऊदी अरब में 97 लाख बैरल तेल का उत्पादन हुआ।
भूषण ने कहा कि वेनेजुएला का मौजूदा उत्पादन, एक दशक पहले के उत्पादन का केवल एक-तिहाई रह गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 1970 में वेनेजुएला दुनिया के बड़े तेल उत्पादक देशों में शामिल था। उस समय वहां प्रतिदिन 37 लाख बैरल तेल का उत्पादन होता था, जो उस दौर में अमेरिका के 117 लाख बैरल प्रति दिन और तत्कालीन सोवियत संघ के 71 लाख बैरल प्रति दिन से पीछे था, लेकिन उस समय भी सऊदी अरब के 39 लाख बैरल प्रति दिन के बाद वेनेजुएला का अहम स्थान था। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसा कोई जादुई तरीका नहीं है जिससे वेनेजुएला का तेल उत्पादन अचानक बढ़ जाए। उत्पादन में सुधार के शुरुआती संकेत दिखने में भी कम से कम तीन से छह महीने लग सकते हैं।
कम समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में कुछ उतार-चढ़ाव आ सकता है। रूस और चीन की प्रतिक्रिया के आधार पर तेल की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी भी संभव है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल होने के कारण मौजूदा हालात में भारत की तेल खोज और उत्पादन करने वाली कंपनियों ओएनजीसी और ऑयल इंडिया को फायदा हो सकता है। वहीं, तेल विपणन कंपनियां (ओएमसी) कम तेल कीमतों के कारण अपनी कमाई बनाए रख सकती हैं।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि हाल ही में सिगरेट पर टैक्स बढ़ाए जाने के बाद पेट्रोल और डीजल पर भी टैक्स बढ़ाया जा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो तेल कंपनियों को इसका बोझ उठाना पड़ सकता है। इसलिए मौजूदा स्थिति में निवेश को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button