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विदेश

वेनेजुएला की चीनी रडार प्रणाली अमेरिकी हमले में हुई नाकाम, JYL-1 और JY-27A सिस्टम हुए पूरी तरह फेल

काराकस
   
दक्षिण अमेरिका की सबसे मजबूत एयर डिफेंस 'कबाड़' बन गई. अमेरिकी विशेष सेनाओं ने 'ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व' में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ लिया. इस दौरान अमेरिकी हेलीकॉप्टर और विमान बिना किसी रोक-टोक के काराकस में घुसे. वजह? वेनेजुएला की एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह फेल हो गई.

खासकर चीन में बने JYL-1 लंबी दूरी के 3D सर्विलांस रडार और JY-27A एंटी-स्टेल्थ रडार एक भी अमेरिकी विमान या हेलीकॉप्टर को डिटेक्ट नहीं कर सके. ये रडार स्टेल्थ हंटर कहे जाते थे, लेकिन अमेरिकी इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से अंधे हो गए.

वेनेजुएला के रक्षा मंत्री ने क्या बताया था

इस साल की शुरुआत में, वेनेजुएला के रक्षा मंत्री ने दावा किया था कि वेनेजुएला की सेना ने चीन निर्मित JY-27A एंटी-स्टील्थ रडार का उपयोग करके 75 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पांच अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमानों को सटीक रूप से निशाना बनाया था। हालांकि, अमेरिकी हवाई हमले के दौरान यह रडार सिस्टम कथित तौर पर "पूरी तरह से निष्क्रिय" हो गया। ऐसी आशंका है कि अमेरिका ने इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम के जरिए JY-27A एंटी-स्टील्थ रडार को जाम कर दिया। इससे अमेरिकी सेना को बिना किसी रोक-टोक के वेनेजुएला में घुसने का मौका मिला।
चीनी रडार सिस्टम का इस्तेमाल करता है वेनेजुएला

वेनेजुएला अपनी हवाई सीमा की सुरक्षा के लिए कई चीनी रडार का इस्तेमाल करता है। इनमें चाइना इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी ग्रुप कॉर्पोरेशन का JYL-1 लंबी दूरी का निगरानी रडार और "एंटी-स्टील्थ हथियार" JY-27 रडार शामिल हैं। JY-27 रडार मीटर वेव फिक्वेंसी बैंड (240-390MHz) का इस्तेमाल कर स्टील्थ लड़ाकू विमानों को डिटेक्ट करता है। वेनेजुएला के रक्षा मंत्री ने एक बार दावा किया था कि 2025 तक, उन्होंने 300 किलोमीटर से अधिक की पहचान सीमा के साथ अमेरिकी F-35 स्टील्थ लड़ाकू विमान का कई बार सफलतापूर्वक पता लगा लिया था। कुछ रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि लॉक-ऑन रेंज 75 से 500 किलोमीटर तक है।

वेनेजुएला में चीन के 12 रडार फेल

रिपोर्ट में कहा गया है कि यह रडार, एस-बैंड जेवाईएल-1 और जेवाई-11बी रडारों के साथ मिलकर, लंबी दूरी की प्रारंभिक चेतावनी और सटीक स्थिति निर्धारण को मिलाकर एक एयर डिफेंस नेटवर्क बनाता है। यह रूसी निर्मित एस-300वीएम और बुक वायु रक्षा मिसाइलों को निर्देशित करके हमले भी कर सकता है, जिससे एक बंद-लूप "डिटेक्शन-लॉक-इंटरसेप्शन" प्रणाली का निर्माण होता है। वेनेजुएला ने कम से कम 12 ऐसे रडार तैनात किए हैं, जिससे एक राष्ट्रव्यापी एंटी-स्टील्थ निगरानी नेटवर्क का निर्माण हुआ है, जो चीन के असममित रक्षा प्रौद्योगिकी निर्यात का एक विशिष्ट उदाहरण बन गया है।

वेनेजुएला में चीनी एयर डिफेंस भी नाकाम

इसके अतिरिक्त, वेनेजुएला ने चीनी FK-3 (HQ-12 का एक्सपोर्ट वेरिएंट) मध्यम दूरी के एयर डिफेंस सिस्टम को भी शामिल की है, जो चीनी रडार सिस्टमों के साथ मिलकर राजधानी काराकस और प्रमुख स्थानों की सुरक्षा करता है। हालांकि, वेनेजुएला में तैनात ये चीनी एयर डिफेंस सिस्टम अमेरिकी हवाई हमलों का पता लगाने में नाकाम रहे हैं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि हमले के कुछ घंटों पहले अमेरिका ने शक्तिशाली इलेक्ट्रॉनिक युद्ध शुरू किया था। इसमें वेनेजुएला के रडार को निष्क्रिय करने के लिए विद्धुत चुंबकीय तरंगों का इस्तेमाल किया गया। इसने वेनेजुएला के एयर डिफेंस को नाकाम कर दिया और वह लगभग अंधा हो गया।
 

वेनेजुएला ने चीन की इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी ग्रुप से कई रडार खरीदे थे…

    JYL-1: लंबी दूरी (300-470 किमी) का 3D रडार, हवा की निगरानी के लिए.

    JY-27/JY-27A: मीटर-वेव बैंड रडार, जो स्टेल्थ विमानों (जैसे F-35) को पकड़ने का दावा करता है. डिटेक्शन रेंज 300-500 किमी बताई जाती है.

ये रडार दक्षिण अमेरिका की सबसे मजबूत एयर डिफेंस का हिस्सा थे, साथ में रूसी S-300 और Buk-M2 मिसाइल सिस्टम.

चीनी मीडिया ने पहले दावा किया था कि ये रडार अमेरिकी F-35 को 75 किमी दूर ट्रैक कर सकते हैं. लेकिन अमेरिकी हमले में ये पूरी तरह पैरालाइज हो गए. अमेरिका ने EA-18G ग्राउलर जैसे इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर विमानों से जैमिंग की, जिससे रडार ब्लाइंड हो गए. शुरुआती हमलों में ही एयर डिफेंस नेटवर्क खत्म हो गया.

पाकिस्तान से मिलती-जुलती नाकामी

यह पहली बार नहीं जब चीनी रडार फेल हुए हैं. 2025 की ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पाकिस्तान की एयर डिफेंस को आसानी से तोड़ा. पाकिस्तान के चीनी रडार (HQ-9, LY-80 आदि) भारतीय मिसाइलों और ड्रोनों को डिटेक्ट नहीं कर सके. भारत ने लाहौर समेत कई जगहों पर रडार साइट्स नष्ट कर दीं.

पाकिस्तान की चीनी सप्लाई वाली डिफेंस सिस्टम ब्लाइंड हो गई, ठीक वेनेजुएला जैसा. पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफ्रीकी देशों और अब वेनेजुएला में चीनी हथियारों की नाकामी का पैटर्न साफ है. असल लड़ाई में ये सिस्टम अमेरिकी या भारतीय इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर के सामने टिक नहीं पाते.
क्यों फेल होते हैं चीनी रडार?

    इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग: अमेरिका जैसे देशों के पास एडवांस जैमिंग टेक्नोलॉजी है, जो रडार सिग्नल को ब्लॉक कर देती है.

    ऑपरेटर ट्रेनिंग और मेंटेनेंस: कई देशों में रखरखाव की कमी और ट्रेनिंग कम होती है.

    हाइप vs रियलिटी: चीनी मीडिया में बड़े-बड़े दावे, लेकिन असल जंग में कमजोर पड़ जाते हैं.

यह घटना चीनी मिलिट्री इक्विपमेंट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है. वेनेजुएला की सबसे मजबूत एयर डिफेंस कुछ घंटों में कबाड़ बन गई. पाकिस्तान की तरह, यहां भी चीनी टेक्नोलॉजी ने निराश किया. भविष्य में ऐसे हथियार खरीदने वाले देश सोचेंगे दो बार.

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