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मध्यप्रदेश

अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए राज्यपाल पटेल ने हिन्दी भाषा और मूल्यों की महत्ता बताई

सत्य बोलना और धर्म पालन के मूल्य ही व्यक्ति की वास्तविक पूँजी : राज्यपाल पटेल

भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी भाषा के गौरव प्रतीक

भोपाल 

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि सत्य बोलने और धर्म का पालन करने वाले को जीवन में कोई दिक्कत नहीं होती है। उन्होंने कहा कि यह जीवन मूल्य ही व्यक्ति की वास्तविक पूँजी हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित स्व.अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय के विद्यार्थी होने का सौभाग्य मिला है। भावी जीवन में माता-पिता, गुरुजन, समाज और राष्ट्र की सेवा का भाव कम नहीं होने दीजिएगा। उन्होंने विद्यार्थियों से अपेक्षा की है कि वे विश्वविद्यालय से प्राप्त संस्कारों और अनुभवों से वंचित वर्गों और पीड़ित मानवता की सेवा का कार्य निरन्तर करते रहेंगे। पटेल गुरूवार को कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेशन सेंटर में आयोजित अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय के छटवें दीक्षांत समारोह को सम्बोधित कर रहे थे।

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी का राष्ट्र प्रेम ओजस्वी व्यक्तित्व और हिन्दी प्रेम, हिन्दी भाषा का गौरव प्रतीक है। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय वाजपेयी जी को निकट से देखने का मौका उन्हें कई बार मिला है। उन्होंने सुदर्शन जी को भी सुना है। आपात स्थिति की घोषणा के दिन गुजरात में आयोजित सभा का उल्लेख करते हुए बताया कि स्वर्गीय जय प्रकाश नारायण जी कहते थे कि अटल जी के मुख में सरस्वती का वास है। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय वाजपेयी की अंतिम यात्रा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का 5 किलोमीटर पैदल चलना अपने नेता के प्रति श्रद्धा अभिव्यक्ति का अभूतपूर्व और प्रेरणादायी उदाहरण है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने विद्यार्थियों के जीवन मूल्यों और उपलब्धियों के लिए अनंत संभावनाओं के नए द्वार खोले हैं। उनके दूरदर्शी नेतृत्व में भारत आध्यात्मिक चेतना और भारतीय मूल्यों के समन्वय के साथ ‘विकसित भारत एट 2047’ के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

विज्ञान और तकनीक के इस युग में वैश्विक प्रतिस्पर्धा और मानकों के अनुरूप विद्यार्थी तैयार करना बड़ी चुनौती है।विद्यार्थियों से कहा कि समाज के बौद्धिक स्तंभ के रूप में आपको राष्ट्र की चुनौतियों को अपनी प्रतिभा, संवेदना और संकल्प के द्वारा अवसर में बदल कर वंचित वर्गों की विकास-यात्रा में सहभागी बनना होगा। दीक्षित विद्यार्थियों से उन्होंने अपेक्षा की है कि विश्वविद्यालय में प्राप्त ज्ञान को वंचित वर्गों और पिछड़े क्षेत्रों में सहज और स्वीकार्य तरीके से प्रसारित करें।राज्यपाल पटेल ने कार्यक्रम का प्रारम्भ माँ सरस्वती, स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के चित्रों पर पुष्पाजंली अर्पित कर दीप प्रज्जवलन से किया। सभी संकायों में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को पदक प्रदान किये। विश्वविद्यालय का प्रगति प्रतिवेदन, स्मारिका एवं स्नातक प्रथम वर्ष के पाठ्यक्रम की हिन्दी पुस्तक का लोकार्पण किया। दीक्षांत अवसर पर स्नातक के 60, स्नातकोत्तर के 68 और अनुपस्थित 42 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान करने की घोषणा की गई। समारोह में राज्यपाल का स्मृति प्रतीक, शाल और पौधा भेंट कर स्वागत किया गया।

दीक्षांत कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति के अध्यक्ष रविन्द्र कन्हारे ने विद्यार्थियों से कहा कि वह अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व और कृतित्व के गुणों से प्रेरणा लें। उन्होंने वाजपेयी जी के संवाद कौशल, व्यक्तित्व की दृढ़ता, लोकतंत्र के प्रति आस्था और सुशासन के दृष्टांतों के साथ विद्यार्थियों को अनुकरण की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को मातृभाषा से विचारों और निर्णयों में स्पष्टता आती है। जनमानस बनाने के लिए कार्य करना होगा।

हिन्दी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मृति समारोह समिति अध्यक्ष प्रोफेसर मोहनलाल छीपा ने कहा कि स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने हिन्दी को केवल साहित्य की भाषा नहीं माना। हिन्दी को ज्ञान-विज्ञान शासन और वैश्विक संवाद का माध्यम माना। हिन्दी विश्वविद्यालय का भी यही उद्देश्य है। उन्होंने विश्वविद्यालय की आवश्यकताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की उपाधि समाज के प्रति दायित्व की घोषणा है। विद्यार्थियों से अपेक्षा की है कि वह ज्ञान को जन भाषा में और जन भाषा को ज्ञान में उतारने को संकल्प बनायें। विश्विद्यालय के विकास में योगदान के लिए विश्वविद्यालय मित्र मण्डल गठन की भी जरूरत बताई है।

कुलगुरु देव आनन्द हिण्डोलिया ने बताया कि विश्वविद्यालय भारतीय शिक्षा मूल्यों के साथ हिन्दी के उत्थान के लिए समर्पित है। आगामी समय में विश्वविद्यालय में कृषि अभियांत्रिकी और अभियांत्रिकी संकाय भी प्रारम्भ किया जाना प्रस्तावित है। उन्होंने विद्यार्थियों को दीक्षांत शपथ ग्रहण कराई। कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन कुल सचिव शैलेन्द्र कुमार जैन ने किया।

 

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