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मध्यप्रदेश

राजस्व महाअभियान और तकनीकी नवाचारों से जनता को मिली बड़ी राहत: मंत्री वर्मा

मध्यप्रदेश में है पारदर्शी और डिजिटल राजस्व व्यवस्था
जियो फेंस तकनीक से हो रही त्रुटिरहित फसल गिरदावरी

भोपाल
राजस्व मंत्री श्री करण सिंह वर्मा ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में पिछले दो वर्षों में राजस्व प्रशासन को अधिक पारदर्शी, त्वरित और जनोन्मुखी बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कार्य किए गए हैं।राजस्व विभाग द्वारा चलाए गए अभियानों और तकनीकी नवाचारों से नागरिकों को बड़ी राहत मिली है तथा लंबे समय से लंबित मामलों का तेजी से निराकरण संभव हुआ है।राजस्व मंत्री श्री वर्मा बुधवार को कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में विभाग की दो वर्ष की उपलब्धियों एवं नवाचारों पर पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। इस दौरान प्रमुख सचिव राजस्व श्री विवेक पोरवाल, आयुक्त राजस्व श्रीमती अनुभा श्रीवास्तव सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

राजस्व महाअभियान से त्वरित निराकरण
मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि राजस्व विभाग ने प्रकरणों के त्वरित समाधान के लिए वर्ष 2024-25 में ‘’राजस्व महाअभियान” के तीन चरण संचालित किए,जिनमें एक करोड़ से अधिक राजस्व प्रकरणों का निराकरण किया गया।उन्होंने कहा कि प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के लिए राजस्व न्यायालयों में न्यायिक एवं गैर-न्यायिक कार्यों के लिए पृथक-पृथक अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है 24 जिलों में जिसने राजस्व न्यायालयों के लिए समर्पित अधिकारियों की नियुक्ति कर त्वरित एवं नियमित न्यायिक कार्यवाही सुनिश्चित की है।

सायबर तहसील से नामांतरण प्रक्रिया हुई पेपरलेस
मंत्री श्री वर्मा ने “सायबर तहसील” को विभाग की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि 29 फरवरी 2024 से नामांतरण की प्रक्रिया पूरी तरह पेपरलेस और फेसलेस कर दी गई है। अब 20 दिनों के भीतर नामांतरण पूरा कर आदेश व्हाट्सएप एवं ई-मेल के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा है। सायबर तहसील के माध्यम से अब तक 6 लाख 26 हजार से अधिक नामांतरण प्रकरणों का निराकरण किया गया है, जिसके लिए इसे प्रधानमंत्री उत्कृष्टता प्रमाण पत्र भी प्राप्त हुआ है। आंशिक खसरा प्रक्रिया को भी ऑनलाइन किया गया है, जिससे प्रतिवर्ष लगभग 8 लाख नागरिक लाभान्वित होंगे तथा विवादित प्रकरणों का आपसी सहमति से त्वरित समाधान संभव होगा।

स्वामित्व योजना से ग्रामीणों को मिला भू-अधिकार
मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि स्वामित्व योजना के तहत गांवों की आबादी में निवासरत नागरिकों को भू-अधिकार पत्र प्रदान किए गए हैं। अब तक 39 लाख 60 हजार से अधिक लोगों को स्वामित्व अधिकार पत्र वितरित किए जा चुके हैं। इस तरह प्रदेश में योजना का 94 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है।

जियो फेंस तकनीक से त्रुटिरहित फसल गिरदावरी
मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जहाँ ड्रोन एवं जियो फेंस तकनीक का उपयोग कर त्रुटिरहित फसल गिरदावरी कराई जा रही है। इससे किसानों को वास्तविक नुकसान का लाभ समय पर मिल सकेगा। वर्ष 2025-26 में अब तक बाढ़ एवं अतिवृष्टि से प्रभावित नागरिकों को 2 हजार 68 करोड़ 99 लाख रुपये की सहायता राशि वितरित की जा चुकी है।

भू-अर्जन प्रक्रिया हुई ऑनलाइन, राजस्व संग्रहण में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
भू-अर्जन प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए आरसीएमएस पोर्टल पर एलएएमएस मॉड्यूल विकसित किया गया है।आरसीएमएस के माध्यम से पिछले दो वर्षों में 41.68 लाख प्रकरणों में से 94% से अधिक प्रकरणों का समय सीमा में निराकरण किया गया। राजस्व संग्रहण में भी प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्ष 2024-25 में 700 करोड़ रुपये के लक्ष्य के विरुद्ध 1048 करोड़ रुपये का संग्रहण किया गया है, जबकि वर्ष 2025-26 में 1000 करोड़ रुपये का संग्रहण संभावित है।

कार्यालय भवन एवं भर्ती से हुआ सशक्तिकरण
मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि प्रदेश में राजस्व प्रशासन को मजबूत करने के लिए 1974 करोड़ रुपये की लागत से 324 कार्यालय भवन पूर्ण किए जा चुके हैं तथा 114 भवन प्रगतिरत हैं। इसके अतिरिक्त 261 आवासीय भवनों को भी स्वीकृति दी गई है। विभाग को सुदृढ़ करने के लिए 5281 पटवारियों एवं 136 नायब तहसीलदारों की भर्ती की गई है।

भू अभिलेख पोर्टल 2.0 से नागरिकों को डिजिटल सुविधा
मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि भू अभिलेख पोर्टल का नवीन संस्करण 2.0 पूरे प्रदेश में लागू किया गया है, जिससे नागरिक अपनी भूमि का अभिलेख, डिजिटल नक्शा एवं प्रमाणित प्रतिलिपि मोबाइल एप के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं।साथ ही भूमि अभिलेखों के डिजिटाइजेशन का बड़ा अभियान प्रारंभ किया गया है जिसके अंतर्गत 15 करोड़ पुराने अभिलेखों को डिजिटल स्वरूप में परिवर्तित किया जाएगा। अब तक 1.59 करोड़ स्कैनिंग पूर्ण की जा चुकी है

आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना
मंत्री श्री वर्मा ने आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना की जानकारी देते हुए कहा कि विभाग द्वारा विश्वास आधारित डायवर्जन प्रक्रिया लागू करने की योजना है। प्रदेश के नक्शाविहीन ग्रामों का नक्शा तैयार किया जायेगा एवं भू-अर्जन प्रकरणों में संपूर्ण प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जायेगा।

 

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