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मध्यप्रदेश

मध्य प्रदेश में 34 अवैध कॉलोनियों पर काम ठहरा, नागरिक सुविधाओं का विकास रुकावट में

भोपाल
 भोपाल जिले में अवैध कॉलोनियों को रोकने और इनमें विकास कार्य करवाने के लिए करीब एक साल पहले अधिग्रहण योजना बनाई गई थी। जिसको लेकर करीब 34 अवैध कॉलोनियों को चिह्नित किया गया था, जिनका अधिग्रहण कर उनमें बिजली, पानी, सड़क आदि सुविधाओं सहित अन्य विकास कार्य किए जाने थे। यह कार्य एसडीएम और जिला पंचायत को सौंपा गया था लेकिन कारवाई के नाम पर सिर्फ 50 से अधिक कॉलोनाइजरों को नोटिस थमाए गए थे लेकिन इससे आगे कुछ नहीं हो सका है।

नतीजतन एक साल में शहरी सीमा और उससे लगे ग्रामीण क्षेत्रों में भूमाफिया और जमीन मालिकों ने मिलकर अवैध कॉलोनियां काटकर प्लाट बेच दिए गए हैं। जानकारी के अनुसार शहर में विकसित हुई अवैध कॉलोनियों में लोगों को सुविधाओं के नाम पर प्लाट बेचे गए हैं, लेकिन बाद में वह ठगा महसूस कर रहे हैं। इससे उन्होंने कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह से शिकायत की थी, जिससे कलेक्टर ने एक साल पहले निर्देश दिए थे कि कॉलोनी विकास नियम-2021 के तहत अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई कर उनका अधिग्रहण किया जाए।

50 से ज्यादा कॉलोनाइजरों को नोटिस दिए गए थे

इसके बाद जिला प्रशासन ने पहली बार कार्रवाई करते हुए 50 से अधिक कॉलोनाइजरों को नोटिस थमा दिए थे, जिसमें से कुछ ही दस्तावेज पेश करवाए थे, जबकि बाकि नहीं दे पाए थे। ऐसे में 34 के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज करवाई गई थी। इन 34 अवैध कॉलोनियों को अधिग्रहण कर इनमें विकास कार्य करना थे, लेकिन बाद में यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

मिलीभगत से बहाल कर दी गईं अवैध कालोनियां

सूत्रों के अनुसार अवैध कॉलोनियों के विकास की योजना को निचले स्तर के अधिकारियों ने मिलकर पलीता लगाया है। इनको अधिग्रहण करने की जगह भूमाफिया और जमीन मालिकों से साठगांठ कर बहाल कर दिया गया। जिससे इन कॉलोनियों में रोक के बाद भी प्लाट बेचे गए और रजिस्ट्री तक हुई।

इनमें ग्राम कुराना की 13, छावनी पठार की छह, सिंकदराबाद, पिपलिया बेरखेड़ी और थुआखेड़ा की दो-दो, सुरैया नगर, कालापानी, कोटरा, सेवनिया ओंकारा, कान्हासैया, अरेड़ी, कोलुआखुर्द, शोभापुर जहेज और खंडाबड़ की एक-एक कालोनी शामिल थीं।

यह बनाई थी योजना, अमल होता तो मिलता लाभ

कलेक्टर के निर्देश पर प्रशासन ने जो अधिग्रहण योजना बनाई थी। जिसके तहत अवैध कॉलोनियों को प्रशासन, जिला पंचायत के अधिकारी कॉलोनी को अपने संरक्षण में लेकर बचे हुए प्लाट को बेचकर उनसे होने वाली आय से बिजली, पानी, सड़क, नाली और अन्य सुविधाएं विकसित की जानी थीं। इन कालोनियों में एक प्रशासक नियुक्त किया जाना था ओर ले आउट बनवाने से लेकर टीएंडसीपी से अप्रूव करने सहित सभी जरूरी अनुमतियां ली जानी थीं।

अधिग्रहण की योजना बनी हुई है

भोपाल जिले में अवैध कॉलोनियों के खिलाफ पूर्व में कार्रवाई की गई हैं। जिन कॉलोनियों में विकास नहीं हुआ है, उनको अधिग्रहण की योजना बनी हुई है। जिस पर आने वाले समय में काम किया जाएगा, जिससे यहां बचे हुए प्लाट को बेचकर इनमें विकासकार्य और सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा सकें। – कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर

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