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विदेश

चीन की सत्ता में हलचल: घोटाले में फंसे खेल मंत्री को फांसी, तय समय पर होगी सजा पूरी

बीजिंग 
चीन के पूर्व खेल मंत्री गाओ झोंगवेन को अदालत ने भ्रष्टाचार और सत्ता के घोर दुरुपयोग के आरोप में मौत की सज़ा सुनाई है। सज़ा पर दो साल की राहत दी गई है, जिसका मतलब है कि दो साल के भीतर कोई और राहत न मिलने पर सज़ा सीधे फांसी में तब्दील हो सकती है।  चीन की अदालतों के मुताबिक, गाओ झोंगवेन ने 33.4 मिलियन डॉलर (लगभग 280 करोड़ रुपये) की रिश्वत ली थी। यह रिश्वत कई कारोबारी समूहों और खेल संगठनों से ली गई थी, जिसमें पदों पर गलत नियुक्तियाँ, फंड जारी करवाना और सरकारी परियोजनाओं में पक्षपात करना शामिल था।
 
गाओ झोंगवेन चीन के खेल मंत्री रहने के साथ-साथ चीन की ओलंपिक कमेटी का भी प्रभारी रह चुका है। आरोप है कि इन पदों का इस्तेमाल उसने करोड़ों की उगाही और ‘फेवर’ बेचने के लिए किया। चीनी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, गाओ ने न केवल पैसा लिया बल्कि कई बार सत्ता का दुरुपयोग करते हुए अपने करीबी लोगों को बड़े पद दिलाए, अनुबंध फिक्स किए और बड़े खेल आयोजन ठेके के बदले रिश्वत ली।चीन में पिछले कुछ वर्षों से राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तरफ से एक बड़े पैमाने पर 'एंटी-करप्शन अभियान' चलाया जा रहा है।लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह अभियान जितना भ्रष्टाचार के खिलाफ है, उतना ही राजनीतिक विरोधियों को खत्म करने का भी तरीका बन चुका है। गाओ झोंगवेन के खिलाफ कार्रवाई ने CCP के भीतर की अंदरूनी खींचतान और सत्ता संघर्ष की परतें भी खोल दी हैं।
 
चीन दुनिया के उन देशों में शामिल है जहाँ भ्रष्टाचार में भी मौत की सज़ा दी जाती है।लेकिन दो साल की ‘रिप्रीव’ वाली सज़ा अक्सर राजनीतिक मामलों में दी जाती है, ताकि आरोपी को नियंत्रित रखा जा सके और पूरी व्यवस्था पर सरकार की पकड़ बनी रहे। चीन ओलंपिक आयोजन और खेल प्रबंधन को अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि का अहम हिस्सा मानता है।ऐसे में, देश के पूर्व खेल मंत्री का 280 करोड़ रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा जाना चीन की ग्लोबल छवि पर बड़ा झटका है।

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