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स्वस्थ-जगत

गुनगुने पानी के गरारे करें कफ रहेगा दूर

सर्दी का मौसम आ ही गया। इस मौसम की अनेक समस्याओं में कफ भी एक है। इसके अनेक कारण हैं, पर सिर, पैर, छाती और कान पर लगने वाली ठंडी हवा एक बड़ा कारण बन जाती है। कफ से बचाव या उपचार के लिए प्राकृतिक चिकित्सा बेहद फायदेमंद है। आइए जानें, इससे बचाव के प्राकृतिक उपाय। जल और चिकनाई का प्रतीक है कफ। आयुर्वेद में कफ को भारी, ठंडा, मृदु, चिकना, मीठा और स्थिर आदि गुणों से युक्त माना गया है। जो द्रव्य इसके विपरीत गुणों वाले होते हैं उनसे कफ शांत होता है।

कफ कुपित होने के कारण:-

-कफकारी आहार की अधिकता।
-चिकने, बहुत ठंडे पदार्थों का बहुत अधिक सेवन।
-मीठे और भारी पदार्थों का अधिक सेवन।
-चावल, उड़द, मक्खन, मांसाहार और खट्टे रस वाले पदार्थों का सेवन भी कफ बनाता है।
-एक भोजन के पचे बिना दूसरा भोजन करने की प्रवृत्ति से भी कफ बढ़ जाता है।
-असंयमित दिनचर्या जैसे दिन में सोना, देर तक सोए रहना, ज्यादा देर बैठे-बैठे काम करना, आलस्यपूर्ण दिनचर्या, -योग-व्यायाम अथवा श्रम का अभाव आदि से भी कफ बढ़ता है।
-अधिक शीत सहने या एसी का अधिक देर तक प्रयोग करने से भी कफ हो जाता है।

कफ शांत करने के उपाय:-
-उपरोक्त कारणों को दूर करते हुए कफकारी पदार्थों का सेवन बंद करना चाहिए।
-शीतल आहार बंद करना चाहिए।
-सुबह नमक-हल्दी युक्त गुनगुने पानी के गरारे करें। ऐसा सर्दी के पूरे मौसम में करें।
-पेट को साफ रखें, कब्ज न रहने दें।
-शहद मिला गुनगुना पानी सुबह खाली पेट लेना चाहिए।
-त्रिफला, चना, मूंग, आंवला, गिलोए, लहसुन, नीम आदि पदार्थ कफ को शांत करते हैं।
-रात को ज्यादा खाने से भी सुबह कोल्ड हो जाता है, इसलिए कफ शमन के लिए रात का भोजन हल्का लें।
-उबले व स्वच्छ जल का सेवन करना चाहिए।
-गर्म पानी से स्नान करना चाहिए।
-गर्म वातावरण में रहना, समय पर सोना, समय पर जागना, समय पर खाना आदि उत्तम और आवश्यक उपाय हैं।

उपवास चिकित्सा:-
-उपवास करने से कफ का प्रकोप बहुत जल्द शांत होता है, इसलिए सप्ताह में एक दिन या 15 दिन पर या फिर -कम से कम माह में एक बार उपवास अवश्य रखें।
-कच्ची सब्जियां, फल, सब्जियों का रस, फलों का रस, नारियल पानी, नीबू पानी, हल्दी युक्त दूध आदि आहार तथा रसाहार को अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए एवं दैनिक जरूरत के अनुसार लेना चाहिए।
-कोल्ड ड्रिंक्स, आइसक्रीम, शेक आदि का इस्तेमाल न करें। डब्बा बंद खाद्य पदार्थ, मांसाहार, ओवर ईटिंग, बहुत -ज्यादा मीठे पदार्थ, खट्टे पदार्थ के इस्तेमाल से बचना चाहिए।
-एक साथ ठंडा-गर्म खाना और बंद कमरे में रहने से बचना चाहिए।
-विशेष परिस्थिति में विशेषज्ञ की देख-रेख में एक बार अवश्य उपवास करें।

प्राकृतिक चिकित्सा:-
-गुगगुने पानी का अनीमा करें।
-पैरों का गर्म स्नान करें। इसके लिए एक टब में सहने योग्य गर्म पानी रखें। सिर पर कपड़ा ओढ़ कर अपने दोनों -पैर उस टब में रख कर बैठ जाएं। पानी की गर्माहट खत्म हो जाए तो पैर टब से निकाल लें।
-15-20 कटि स्नान (हिप बाथ) करें। इसे गर्म पैरों के स्नान की तरह किया जाता है।
-भाप स्नान और सूखा घर्षण भी लाभकारी है। सूखे घर्षण में पूरे शरीर को रगड़ कर शरीर को गर्म करना होता है।
-प्रति दिन 10 मिनट सूर्य स्नान अवश्य करें।

आहार-विहार:-
-अजवाइन के पानी की भाप लें। सौंफ, अदरक, इलाइची, तुलसी पत्ता, मुलेठी, पुदीने का काढ़ा दिन में एक से दो बार लें या ग्रीन टी का इस्तेमाल करें।
-सितोपलादि चूर्ण शहद में मिला कर सुबह-शाम एक छोटा चम्मच लें। नाभि पर सरसों का तेल गुनगुना करके लगाएं और दिन भर में एक-दो बार नाक में बादाम का तेल लगाएं।
-गुनगुने पानी में हल्का नमक डाल कर जल नेति करें। इससे नाक साफ हो जाएगी और कफ-बलगम निकल जाएगा।
-सुबह खाली पेट तीन से पांच गिलास गुनगुना पानी पीकर कुंजल क्रिया करें। कागासन में बैठ कर तीन से पांच गिलास पानी लगातार पिएं। फिर खड़े होकर नीचे झुकते हुए बायां हाथ पेट के ऊपरी भाग पर दबाएं और सीधे हाथ की तीन उंगलियां जीभ के ऊपरी भाग पर दबा कर उल्टी करें। यह कुंजल क्रिया है। हृदय रोगी, हाई बीपी के रोगी और अल्सर के रोगी इस क्रिया को न करें।

पूरे शरीर की मालिश:- नहाने से पहले प्रति दिन तिल के तेल से पूरे शरीर की मालिश करें। इससे भी कफ शांत होगा और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी।

योग उपचार:- सूर्य नमस्कार, वीर भद्रासन, उत्तानपादासन, अष्टपाद उत्तानासन, भुजंगासन, मकरासन, आदि में से किसी का चयन अपनी जरूरत के अनुसार करें। सूर्यभेदी प्राणायाम, उज्जायी, भस्त्रिका, कपालभाति आदि का अभ्यास करना भी फायदेमंद रहता है।

 

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