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उत्तर प्रदेश

आरएसएस के हिंदू सम्मेलन में योगी केंद्र में, क्या यूपी 2027 की राजनीतिक तैयारी शुरू?

लखनऊ
बिहार विधानसभा चुनाव के बाद अब आरएसएस की निगाहें उत्तर प्रदेश पर केंद्रित हो गई हैं. बीजेपी सत्ता की हैट्रिक लगाने का तानाबाना बुनना शुरू कर दिया है. 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में संघ और बीजेपी हिंदुत्व के एजेंडे को और धार देने की रणनीति पर अभी से काम शुरू कर दिया है ताकि पूरे सूबे में हिंदुत्व का सियासी रंग चढ़ सके.

आरएसएस और बीजेपी ने संयुक्त रूप से उत्तर प्रदेश में हिंदुत्व आधारित माहौल को मजबूती देने की रणनीति बनाई. संघ के साथ बीजेपी राम मंदिर के मुद्दे को गांव-गांव पहुंचाने का प्लान बनाया है, तो साथ ही लखनऊ में 'विराट हिंदू सम्मेलन' कराने की तैयारी की है. इस सम्मेलन में सीएम योगी आदित्यनाथ भी शिरकत करेंगे, जिसके मायने साफ हैं कि पार्टी ने उन्हें हिंदुत्व का चेहरा बनाकर पेश करने की रणनीति अपनाई है.

आरएसएस-बीजेपी की मंथन से निकलेगा अमृत

उत्तर प्रदेश में सवा साल के बाद सोमवार को सरकार, संगठन और संघ की समन्वय बैठक हुई. पहली बैठक संघ की भारती भवन के बंद कमरे में हुई, जिसमें संघ के सरकार्यवाह अरुण कुमार, बीजेपी राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष, अतुल लिमये, पश्चिम क्षेत्र प्रचारक महेंद्र शर्मा, पूर्वी क्षेत्र प्रचारक अनिल सिंह और यूपी बीजेपी के संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह मौजूद रहे. यह बैठक करीब डेढ़ घंटे तक चली. इसके बाद संघ की सरकार और बीजेपी संगठन के साथ मीटिंग हुई.

संघ, सरकार और संगठन की बैठक में सीएम योगी आदित्यनाथ, बीएल संतोष, अरुण कुमार, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, बृजेश पाठक, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी सहित संघ के क्षेत्रीय प्रचारकों के बीच बैठक हुई. इस बैठक में मिशन-2027 को लेकर रणनीति बनी और अब उसे अमलीजामा पहनाने का काम शुरू कर दिया गया है. यूपी से फीडबैक लेकर वापस दिल्ली लौटे बीएल संतोष ने प्रदेश अध्यक्ष के नाम को लेकर पीएम मोदी, अमित शाह और जेपी नड्डा के साथ बैठक की.

योगी के बहाने हिंदुत्व को धार देने का प्लान

संघ के 100 साल पूरे हो गए हैं. संघ अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है. ऐसे में संघ और बीजेपी जनवरी 2026 में लखनऊ में 'विराट हिंदू सम्मेलन' करने जा रहे हैं. इस कार्यक्रम में सीएम योगी भी शिरकत करेंगे. माना जा रहा है कि इस रैली के जरिए योगी आदित्यनाथ की हिंदुत्ववादी छवि को और भी मजबूत कर पेश करने की रणनीति है.

सीएम योगी को केंद्र में रखकर विशेष रूप से रणनीति तैयार की जा रही है. इसी बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इन तमाम कार्यक्रमों में मुख्य चेहरे के तौर पर आगे रखने का भी प्लान है और उन्हीं के बहाने हिंदुत्व को धार देने की कोशिश है. योगी आदित्यनाथ सिर्फ अपने काम से ही नहीं बल्कि अपने लिबास से भी हिंदुत्व के रंग में रचे-बसे नजर आते हैं.

यूपी में 'विराट हिंदू सम्मेलन'

2027 से पहले संघ के शताब्दी वर्ष के मद्देनजर राज्यभर में बड़े पैमाने पर हिंदू सम्मेलनों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी. इसी क्रम में लखनऊ में होने वाले 'विराट हिंदू सम्मेलन' को शक्तिशाली राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है. बीजेपी और संघ की साझा रणनीति से एक बात साफ है कि यूपी में विकास को आधार बनाकर हिंदुत्व के भावनात्मक मुद्दों को भुनाने की तैयारी है. लखनऊ में होने वाला विराट हिंदू सम्मेलन इस रोडमैप का केंद्रबिंदु माना जा रहा है.

मिशन 2027 के हिंदुत्व को धार देने का प्लान

जनवरी में राम मंदिर के कैलेंडर और तस्वीर के साथ संघ और बीजेपी के कार्यकर्ता लोगों से जनसंपर्क करते हुए घर-घर पहुंचने की कोशिश करेंगे. इसके बाद 20 फरवरी तक हिंदू सम्मेलन शुरू होंगे, जिसमें हिंदू समाज को एकजुट करने, खासकर दलित, अति पिछड़े और पिछड़े वर्गों तक पहुंच कर संघ और हिंदुत्व को लेकर सभी शहरों में कार्यक्रम करेंगे.

एक कार्यक्रम लखनऊ में भी प्लान किया जा रहा है जो विराट हिंदू सम्मेलन के तौर पर होगा. इसमें भाजपा और संघ के कार्यकर्ता जुड़ेंगे और उनकी कोशिश पिछड़े और दलित परिवारों तक पहुंचने की होगी. इस समीक्षा में विराट हिंदू सम्मेलन की तैयारियां और विभिन्न समूहों से मिले फीडबैक शामिल रहे. यूपी में भाजपा–संघ ने राजनीतिक समीकरणों को साधने की कवायद शुरू कर दी है.

सपा के पीडीए का क्या काउंटर प्लान

संघ और बीजेपी के इन कार्यक्रमों को सपा के पीडीए की काट के तौर पर देखा जा रहा है. इस संबंध में बैठक में पीडीए के काउंटर प्लान पर चर्चा हुई. सपा ने 2024 में पीडीए फॉर्मूले के जरिए बीजेपी को झटका दिया था. 2024 में यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से सपा 37 और कांग्रेस 6 सीटें जीतने में कामयाब रही थी.

वहीं, बीजेपी सिर्फ 33 सीट पर सिमट गई थी. 2019 की तुलना में उसे 31 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा था. बीजेपी का सियासी समीकरण बिगड़ गया था, जिसके बाद से योगी आदित्यनाथ लगातार 'बंटोगे तो कटोगे' के नारे के जरिए हिंदुओं को एकजुट करने में लगे हैं.

बीजेपी और संघ का प्लान है कि दलित, अति पिछड़े और पिछड़े वर्गों तक अपनी पहुंच बनाई जाए. संघ और हिंदुत्व गांव-गांव ही नहीं बल्कि तमाम शहरों में कार्यक्रम करेंगे. इस तरह बीजेपी अलग-अलग जातियों में बिखरे हिंदू वोटों को फिर से एक छतरी के नीचे लाने के लिए विराट हिंदू सम्मेलन की रूप रेखा तैयार कर रही है. माना जा रहा है कि इस दांव से सपा के विनिंग फॉर्मूला पीडीए को काउंटर करने की रणनीति है.

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