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छत्तीसगड़

नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता, पांच नक्सली मारे गए, दो जवान शहीद

जगदलपुर

दंतेवाड़ा और बीजापुर सीमा से लगे भैरमगढ़ क्षेत्र के केशकुतुल के जंगलों में सुबह से नक्सलियों और पुलिस के बीच मुठभेड़ हो रही है। एनकाउंटर में पांच माओवादियों को जवानों ने ढेर कर दिया है। मुठभेड़ में डीआरजी के दो जवान बलिदान हो गए हैं, जबकि एक अन्य जवान घायल है जिसे उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया है। जंगल में बड़ा सर्च ऑपरेशन जारी है, मारे गए नक्सलियों की संख्या और बढ़ सकती है। बताया जा रहा है कि आज सुबह दंतेवाड़ा से टीम निकली थी जहां बीजापुर की सीमा भैरमगढ़ के केशकुतुल में जवानों और नक्सलियों के बीच में मुठभेड़ हो गई। दोनों ओर से रुक-रुककर फायरिंग हो रही है।

बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ की जा रही ताबड़तोड़ कार्रवाई के बीच बटालियन के बारसे देवा, पापाराव, केसा समेत तमाम नक्सलियों के आत्मसमर्पण के लिए बनाए गए अनुकूल माहौल के बाद एक बार फिर से सुकमा बीजापुर दंतेवाड़ा जैसे जिलों में जॉइंट ऑपरेशन को तेज कर दिया गया है। बीते दिनों देवा समेत पापाराव, केसा, चैतू के आत्मसमर्पण की चर्चा तेज थी जिसके बाद चैतू अपने 10 साथियों के साथ जगदलपुर में आत्मसमर्पण कर दिया था। इसके बाद भी सुरक्षा एजेंसियों ने देवा समेत तमाम नक्सलियों के आत्मसमर्पण के लिए जंगलों में अनुकूल माहौल बनाए रखा। इसके तहत जंगलों में ऑपरेशन और किसी भी तरह की गतिविधियां नहीं की गई। लेकिन 15 दिनों के अनुकूल माहौल के बावजूद जब आत्मसमर्पण को लेकर बटालियन की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं नजर आई और बटालियन से आत्मसमर्पण के संपर्क खत्म होने के बाद एक बार फिर से एजेंसियों के निर्देश पर ऑपरेशन को तेज किया गया है।

इससे पहले डीकेएसजेडसी सदस्य ने अपने 9 साथियों के साथ लाल गलियारे को त्याग करते हुए पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था। बस्तर आईजी सुंदरराज पी. ने बताया कि लगातार नक्सली की टीम बिखरती जा रही है, नक्सलियों की खोखली विचारधारा से त्रस्त होकर नक्सली अब धीरे-धीरे जागरूक होते जा रहे है और अपने साथियों को समर्पण करने के लिए तैयार कर रहे हैं। इसी का परिणाम था कि डीकेएसजेडसी सदस्य चैतू उर्फ श्याम दादा के साथ ही उसके 9 साथियों ने आत्मसमर्पण किया है।

कॉलेज के समय नक्सलियों के संपर्क में आया था चैतू
नक्सलियों के दरभा डिवीजन में कई वर्षों तक उनके साथ काम करने के साथ ही उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले चैतू उर्फ श्याम दादा ने आत्मसमर्पण कर दिया था। इस समर्पण के साथ ही दरभा डिवीजन और भी कमजोर हो गई। चैतू दादा उर्फ श्याम ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए बताया कि कॉलेज के दिनों में ही वे नक्सलियों के मेडिकल टीम के संपर्क में आया और वर्ष 1985 में भूमिगत हो गया था।

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