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मध्यप्रदेश

विधानसभा में सामने आया जवाब: संजय पाठक कंपनियों को नोटिस, 15 दिन का समय दिया गया

भोपाल
 मध्य प्रदेश के विजयराघवगढ़ से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक संजय सत्येंद्र पाठक से जुड़ी तीन खनन कंपनियों को जबलपुर जिले में अवैध एवं अतिरिक्त रेत उत्खनन के मामले में बड़ा झटका लगा है। जबलपुर कलेक्टर ने इन कंपनियों को कुल 443 करोड़ 4 लाख 86 हजार 890 रुपये की वसूली के लिए नोटिस जारी किया है। खनिज साधन विभाग ने विधानसभा में दिए लिखित जवाब में इसकी पुष्टि की है। कांग्रेस विधायक डॉ. हीरालाल अलावा के तारांकित प्रश्न के उत्तर में विभाग ने बताया कि विधायक संजय पाठक से जुड़ी निम्नलिखित तीन कंपनियों ने स्वीकृत सीमा से अधिक रेत का उत्खनन किया। 

कांग्रेस विधायक डॉ. हीरालाल अलावा के सवाल पर खनिज विभाग ने विधानसभा में पूछे गए प्रश्न क्रमांक 685 के उत्तर में जबलपुर जिले में बड़े पैमाने पर अवैध रेत उत्खनन और राजस्व के नुकसान के मामले पर जवाब दिया। खनिज साधन विभाग ने स्वीकार किया है कि जबलपुर जिले की चार कंपनियों द्वारा निर्धारित स्वीकृति सीमा से अधिक रेत का उत्खनन किया गया।

कंपनियों के नाम

    आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन ग्राम टिकरिया
    नीलिमा मिनरल्स ग्राम दुबियारा
    नीलिमा मिनरल्स ग्राम अगरिया
    पैसिफिक एक्सपोर्ट ग्राम झिठी

खनिज विभाग ने बताया कि कलेक्टर द्वारा गठित दल एवं जांच रिपोर्ट के आधार पर इन कंपनियों पर कुल ₹4,43,04,86,890 की वसूली निर्धारित की गई है।

क्यों दिए नोटिस जबलपुर कलेक्टर द्वारा 10 नवंबर 2025 को जारी आदेशों (जिनकी प्रति विधायक को दी गई) में स्पष्ट है कि इन सभी आदेशों में कलेक्टर ने कंपनियों को 15 दिनों में वसूली जमा करने के निर्देश दिए हैं, अन्यथा भू–राजस्व अधिनियम के तहत कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। विधानसभा में सरकार का जवाब—“कड़ी कार्रवाई की जा रही है।

खनिज विभाग द्वारा विधानसभा सचिवालय को दिए गए लिखित उत्तर में कहा गया है कि जांच दल द्वारा तैयार अतिरिक्त उत्खनन रिपोर्ट को स्वीकार किया गया है। संबंधित कंपनियों को वसूली आदेश जारी किए जा चुके हैं। वसूली राशि जमा न करने पर नियम 216 (खनिज नियम 2019) तथा भू–राजस्व संहिता के तहत आगामी कार्रवाई की जाएगी।

कांग्रेस विधायक ने कहा: ये एक हजार करोड़ का खेल विधायक ने उठाया सवाल- ‘1000 करोड़ का रेत माफिया खेल’ विधानसभा में यह मुद्दा उठाने वाले विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने कहा कि— जिले में लंबे समय से रेत ठेकेदार कथित संरक्षण के कारण मनमानी कर रहे थे। उनके अनुमान के अनुसार वास्तविक राजस्व हानि 1000 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है। सरकार को पूरे जिले और अन्य जिलों में भी व्यापक ऑडिट कराना चाहिए।

इन कंपनियों को खनिज रॉयल्टी, जीएसटी और अन्य बकाया राशि जमा करने के लिए नोटिस जारी किया गया है। साथ ही संबंधित कंपनियों को पत्र लिखने के लिए भी अलग से नोटिस दिए गए हैं। मध्यप्रदेश खनिज विभाग द्वारा गठित जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। 10 नवंबर 2025 को जबलपुर कलेक्टर ने आदेश जारी कर इन कंपनियों को 15 दिनों के अंदर पूरी राशि जमा करने का निर्देश दिया है। राशि जमा नहीं करने पर मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता के तहत सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

विधानसभा में सरकार की ओर से कहा गया है कि जांच रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया गया है। वसूली आदेश जारी हो चुके हैं। राशि जमा नहीं हुई तो नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला जबलपुर जिले में बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध रेत उत्खनन और राज्य को हुए राजस्व नुकसान से जुड़ा है। विपक्षी दल कांग्रेस लगातार इस मुद्दे को उठा रहा है।

कलेक्टर के आदेशों में सभी फर्मों में ये गड़बड़ी मिली

    रेत का उत्खनन स्वीकृत मात्रा से कई गुना अधिक हुआ।
    रेत परिवहन पर्चियों (टीपी) का मिलान करते समय भारी अंतर पाया गया।
    नज़दीकी घाटों से चोरी-छुपे रेत निकालकर दूसरे जिलों में भेजे जाने के संकेत भी मिले।
    कलेक्टर ने इन आदेशों में स्पष्ट लिखा है कि यह उत्खनन मात्रा से अधिक माइनिंग (Over Mining) है और नियम 194/2014 तथा कोर्ट आदेश दिनांक 02/08/2017 के अनुसार इसका आर्थिक दंड देय है।

अब आगे क्या?

खनिज विभाग ने कहा है कि 15 दिनों की समय-सीमा के बाद वसूली न होने पर बैंक खातों की कुर्की, मशीनरी जब्ती, और पट्टा निरस्तीकरण की प्रक्रिया लागू की जाएगी। पूरे मामले की पुनः जांच भी की जाएगी ताकि जिले में भविष्य में ऐसा न हो।

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