<?php /** * The template for displaying the header * */ defined( 'ABSPATH' ) || exit; // Exit if accessed directly ?><!DOCTYPE html> <html <?php language_attributes(); ?>> <head> <meta charset="<?php bloginfo( 'charset' ); ?>" /> <link rel="profile" href="http://gmpg.org/xfn/11" /> <?php wp_head(); ?> </head> <body id="tie-body" <?php body_class(); ?>> <?php wp_body_open(); ?> <div class="background-overlay"> <div id="tie-container" class="site tie-container"> <?php do_action( 'TieLabs/before_wrapper' ); ?> <div id="tie-wrapper"> <?php TIELABS_HELPER::get_template_part( 'templates/header/load' ); do_action( 'TieLabs/before_main_content' );
धर्म/ज्योतिष

मंगलवार के भौम प्रदोष की कथा: क्यों कहा जाता है कर्ज से छुटकारे का दिन?

हर महीने की त्रयोदशी तिथि देवों के देव महादेव को बेहद प्रिय मानी गई है, क्योंकि इस तिथि पर प्रदोष व्रत रखने की परंपरा है. त्रयोदशी तिथि पर और प्रदोष काल में ही देवताओं ने भगवान शिव का जल से अभिषेक और स्तुति की थी, जब भोलेनाथ ने समुद्र मंथन से निकले विष को अपने गले में धारण किया था. इसी वजह इस तिथि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना गया है. आज 2 दिसंबर को प्रदोष व्रत है और मंगलवार पड़ने के कारण इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जा रहा है. प्रदोष व्रत की कथा का पाठ किए बिना पूजा पूर्ण नहीं माना जाता है. ऐसे में आइए भौम प्रदोष व्रत की कथा पाठ करते हैं.

भौम प्रदोष व्रत महत्व

भौम प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और हनुमान जी दोनों की पूजा की जाती है. यह व्रत रखने से भगवान शिव और हनुमान जी दोनों की कृपा प्राप्त होती है. साथ ही, इस व्रत के प्रभाव से जीवन की बाधाएं और दुख-दर्द दूर होते हैं. भौम प्रदोष व्रत करने से मंगल ग्रह से संबंधित दोषों का निवारण होता है और कर्ज से मुक्ति मिलती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, भौम प्रदोष व्रत को करने से आर्थिक तंगी दूर होती है, सुख-समृद्धि आती है और मन को शांति मिलती है. साथ ही, यह संतान सुख की इच्छा रखने वालों के लिए भी लाभकारी माना जाता है.

भौम प्रदोष व्रत कथा 2025

भौम प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा एक वृद्धा की कहानी से जुड़ी है जो हनुमान जी की भक्त थी. एक नगर में एक वृद्धा रहती थी जिसका एक पुत्र था. वह वृद्धा हनुमान जी की बहुत बड़ी भक्त थी और हर मंगलवार को उनका व्रत किया करती थी. एक बार हनुमान जी ने उसकी भक्ति की परीक्षा लेने का फैसला किया. हनुमान जी एक साधु के वेश में वृद्धा के घर आए और भोजन मांगा.

साधु बनकर हनुमान जी ने उस वृद्धा से कहा कि वह जमीन लीपे, लेकिन वृद्धा ने मना कर दिया और कोई दूसरा काम करने को कहें. फिर साधु ने उस वृद्धा से कहा कि वह अपने पुत्र को बुलाए, क्योंकि वह उसकी पीठ पर आग जलाकर भोजन बनाना चाहते हैं. यह सुनकर वृद्धा दुविधा में पड़ गई, लेकिन वचनबद्ध होने के कारण उसने अपने बेटे को साधु को सौंप दिया.

फिर वृद्धा के हाथों से उसके बेटे की पीठ पर आग जलाई गई और वृद्धा दुखी मन से घर में चली गई. जब भोजन के बाद साधु ने वृद्धा को अपने पुत्र को बुलाने के लिए कहा, तो उसने मना कर दिया. लेकिन जब साधु नहीं माने, तो वृद्धा ने अपने बेटे को पुकारा. जब वृद्धा ने अपने पुत्र को जीवित देखा तो उसे देखकर बहुत आश्चर्य हुआ और वह साधु के चरणों में गिर पड़ी. तब हनुमान जी ने अपने असली रूप में आकर वृद्धा को आशीर्वाद दिया.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button