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देश

राजद से दूरी बनाएगी कांग्रेस? गठबंधन पर बिहार नेताओं की उठी आपत्तियाँ

पटना

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में करारी हार झेलने के बाद महागठबंधन में टूट की अटकलें चलने लगी हैं। हाल ही में समीक्षा के दौरान कांग्रेस के अधिकतर उम्मीदवारों ने लालू एवं तेजस्वी यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से गठबंधन को चुनावी हार के लिए जिम्मेदार ठहराया। इनमें से कई ने तो कांग्रेस आलाकमान को राजद से गठबंधन तोड़ने की वकालत भी कर दी। इसके बाद से सियासी पारा गर्माया हुआ है। हालांकि, पार्टी के किसी भी बड़े नेता की तरफ से गठबंधन के भविष्य को लेकर कोई भी बयान नहीं आया है।

पिछले दिनों संपन्न हुए बिहार चुनाव के नतीजों में कांग्रेस, राजद और अन्य विपक्षी दलों के गठबंधन को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस 71 सीटें लड़कर महज 6 पर जीत दर्ज कर पाई। राजद ने भी 143 सीटें लड़ी और 25 पर ही जीत नसीब हुई। अन्य घटक दलों की स्थिति भी खराब रही। महागठबंधन कुल 243 में से महज 35 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज कर पाया।

बीते गुरुवार को नई दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में कांग्रेस ने बिहार चुनाव की हार की समीक्षा बैठक बुलाई। इसमें सभी 61 सीटों पर चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों के अलावा प्रदेश स्तर के नेता मौजूद रहे। बैठक में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सभी उम्मीदवारों से 10-10 के समूह में बात की।

सूत्रों के अनुसार, अधिकतर उम्मीदवारों ने आलाकमान को बताया कि तेजस्वी यादव की पार्टी राजद से गठबंधन की वजह से कांग्रेस को बुरी हार का सामना करना पड़ा है। अगर कांग्रेस इस चुनाव में अकेले मैदान में उतरती तो परिणाम बेहतर होते। प्रत्याशियों ने कहा कि कांग्रेस को राजद से गठबंधन खत्म कर देना चाहिए। उन्होंने महागठबंधन में सीट बंटवारे में देरी होने और लगभग एक दर्जन सीटों पर फ्रेंडली फाइट को भी हार की वजह माना।

हालांकि, कांग्रेस के वरीय नेता इस पर कुछ बोल नहीं रहे हैं। दिल्ली में समीक्षा बैठक के बाद बिहार कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह से जब राजद से गठबंधन तोड़ने के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने आलाकमान इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इसका फैसला आलाकमान करेगा।

फिलहाल महागठबंधन में शामिल घटक दल अपने-अपने स्तर पर हार की समीक्षा कर रहे हैं। राजद में प्रमंडलवार प्रत्याशियों से फीडबैक लिया जा रहा है। चुनाव में विरोधियों के हित में काम करने वाले भितरघातियों की पहचान भी की जा रही है। उन पर ऐक्शन हो सकता है।

इस बीच, बिहार विधानसभा का सत्र 1 दिसंबर से शुरू होने वाला है। इसमें नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाई जाएगी। राज्य में प्रचंड जीत के बाद गदगद नीतीश सरकार अपना अनुपूरक बजट भी सदन में पेश करेगी।

विधानसभा सत्र से पहले शनिवार को पटना में तेजस्वी यादव के आवास पर महागठबंधन की बैठक बुलाई गई है। इसमें राजद, कांग्रेस और वाम दलों के विधायक शामिल होंगे। इसमें विधानसभा सत्र की रणनीति को लेकर चर्चा की जाएगी।

 

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