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देश

अमित शाह की बैठक के बीच दिल्ली ब्लास्ट जांच में तेजी, 30 स्थानों पर ED और अन्य एजेंसियों की रेड

नई दिल्ली

दिल्ली ब्लास्ट और उससे जुड़े फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल की जांच में अब केंद्र सरकार ने पूरी ताकत झोंक दी है. इसी सिलसिले में एक बड़ा कदम उठाते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क पर औपचारिक रूप से केस दर्ज कर लिया है और शनिवार सुबह से ही देश के तीन राज्यों में बड़े पैमाने पर छापेमारी अभियान चल रहा है.

ED के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, मंगलवार सुबह से दिल्ली, हरियाणा के फरीदाबाद और मध्यप्रदेश में कुल 30 लोकेशंस पर एक साथ सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया. यह छापेमारी सीधे तौर पर उस नेटवर्क को खंगालने के लिए है जो फरिदाबाद टेरर मॉड्यूल और कथित व्हाइट कॉलर आतंकी फंडिंग के शक के दायरे में आया है.
अमित शाह की हाई-लेवल मीटिंग के बाद एक्शन में ED

सूत्र बताते हैं कि यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई, बल्कि इसकी पृष्ठभूमि केंद्रीय गृह मंत्रालय में एक अहम बैठक में तैयार हुई थी. इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह के साथ केंद्रीय खुफिया एजेंसी IB, जांच एजेंसियाँ NIA और ED के शीर्ष अधिकारी मौजूद थे.

इस बैठक में दिल्ली ब्लास्ट के बाद सामने आए नए इनपुट्स खासकर टेरर फंडिंग, “व्हाइट कॉलर टेररिज़्म” और मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट पर विस्तृत चर्चा हुई थी. इस दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने साफ चेतावनी दी थी कि इस हमले के लिए जिम्मेदार आतंकवादी अगर पाताल में भी छुपे हैं, तो जांच एजेंसियां उन्हें खोज कर निकालेंगी. गृह मंत्री ने बैठक में साफ निर्देश दिया था कि दिल्ली ब्लास्ट से जुड़े हर आर्थिक लिंक की गहराई से जांच की जाए. आतंकी फंडिंग या हवाला नेटवर्क को नहीं छोड़ा जाए. ED और NIA को विशेष अधिकारों के साथ त्वरित और संयुक्त कार्रवाई का “ग्रीन सिग्नल” दिया जाए.

इसी मीटिंग के बाद यह तय हो गया था कि टेरर मॉड्यूल की फंडिंग लाइन को तलाशने के लिए ED एक अलग मनी लॉन्ड्रिंग केस दर्ज कर तेज कार्रवाई शुरू करेगी.

फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल कितना बड़ा?

पिछले सप्ताह दिल्ली ब्लास्ट की जांच में यह संकेत मिला था कि मॉड्यूल के तार सिर्फ जमीन पर काम कर रहे आतंकियों से नहीं, बल्कि व्हाइट कॉलर नेक्सस से भी जुड़े हो सकते हैं, जहां शिक्षा संस्थानों, एनजीओ, निजी कारोबारियों और मध्यस्थों के जरिए धन का प्रवाह हो रहा था.

इसी शक के बाद एजेंसियों ने अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े लेन-देन, फंड मूवमेंट और संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी. अब जब पर्याप्त इनपुट्स सामने आए, तो ED ने PMLA (मनी लॉन्ड्रिंग कानून) के तहत मामला दर्ज कर छापेमारी शुरू कर दी.

अमित शाह की अध्यक्षता वाली हाई-लेवल बैठक के ठीक बाद इतनी बड़ी कार्रवाई से साफ है कि केंद्र सरकार दिल्ली ब्लास्ट को सिर्फ एक आतंकी घटना नहीं, बल्कि एक संगठित और व्यापक टेरर नेटवर्क की तरह देख रही है. इसी वजह से दिल्ली में धमाका करने वालों के साथ-साथ उन ‘व्हाइट कॉलर’ व्यक्तियों तक पहुंचने की कोशिश है, जो पर्दे के पीछे फंडिंग, लॉजिस्टिक्स और सपोर्ट सिस्टम खड़ा कर रहे थे.

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