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धर्म/ज्योतिष

मार्गशीर्ष में क्यों की जाती है श्रीकृष्ण की शंख और तुलसी से पूजा — जानें धार्मिक महत्व और विधि

कार्तिक मास के बाद मार्गशीर्ष का महीना आता है। ऐसा कहा जाता है कि सतयुग में देवों ने मार्गशीर्ष से ही नया साल शुरू किया था। इस महीने में भगवान कृष्ण की पूजा का बहुत अधिक महत्व है। इस महीने में तुलसी और शंख से भगवान कृष्ण की पूजा की जाती है। सुबह शाम गायत्री मंत्र का जाप करें। ऐसा कहा जाता है कि अगहन के महीने में विष्णु भगवान का गरुड़ की पीठ पर लक्ष्मी के साथ बैठे हुए भगवान कृष्ण की पूजा करनी चाहिए। इस महीने में धूप, आरती, स्नान, पूजा के समय भगवान ‌विष्णु के आगे घंटा बजाएं। एक शंख लें और उसमें चंदन रखें और महीने में रोज भगवान विष्णु को अर्पित करें। इसके अलावा अगहन में तुलसीदल और आंवला भी भगवान विष्णु को अर्पित करना चाहिए। जो इस तरह भगवान विष्णु की पूजा करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस महीने में बेला, चमेली, जही, अतिमुक्ता (माधवी लता), कनेर, वैजयन्ती, विजया, चमेली के गुच्छे से भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। इसके अलावा इस महीने में भगवान विष्णु को तुलसी की मंजरियां अर्पित करनी चाहिए। ऐसा करने पर मोक्ष मिलता है।

स्कंदपुराण में लिखा है कि भगवान विष्णु को बिल्वपत्र, शमीपत्र, चमेली और कमल , कौस्तुभमणि से भी ज्यादा तुलसीदल भगवान विष्अणु को अधिक प्रिय हैं। ऐसी तुलसी जिसके पत्ते कटे न हों ओर जो मंजरीके साथ हो, ऐसी तुलसी भगवान विष्णु को लक्ष्मीजी के तरह प्रिय है। इसके अलावा मार्गशीर्ष मास में कपूर से दीपक जलाकर भगवान विष्णु की आरती करनी चाहिए। इसलिए मार्गशीर्ष महीने में भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की विशेष पूजा की जाती है। इस महीने में तीर्थ स्नान जरूर करना चागिए, इससे पुण्य मिलता है और हर तरह के रोग, शोक दूर होते हैं।

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