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देश

तेज रफ्तार का कहर: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे बना मौत का हाइवे

दौसा

दौसा देश के दो महानगरों दिल्ली और मुंबई को सीधे जोड़ने और यात्रा समय घटाने के उद्देश्य से बनाए गए दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे को जानवर-रहित और सुरक्षित बताया गया था, लेकिन यह ड्रीम प्रोजेक्ट अब यात्रियों के लिए मौत का हाईवे बनता जा रहा है। एक्सप्रेसवे शुरू हुए 32 महीने से अधिक हो चुके हैं और अब तक 250 से ज्यादा लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवा चुके हैं। अकेले दौसा जिले में ही 180 से अधिक मौतें दर्ज की जा चुकी हैं।

जानवरों के कारण बढ़ रहे हादसे
केंद्र सरकार के जानवर-रहित हाइवे के दावे हवा में नजर आ रहे हैं। एक्सप्रेसवे पर रोजाना लावारिस पशु घूमते देखे जा रहे हैं, और ज्यादातर हादसे इन्हीं की वजह से हो रहे हैं। भारी-भरकम टोल चुकाने के बाद भी वाहन चालकों को सुरक्षित यात्रा नहीं मिल पा रही है।

मॉनिटरिंग सिस्टम फेल, रफ्तार पर नहीं लग रही लगाम
वाहनों की तेज रफ्तार हादसों का बड़ा कारण बन चुकी है। एक्सप्रेसवे को 120 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति सीमा के अनुसार तैयार किया गया था, लेकिन मॉनिटरिंग की कमी के चलते कई कारें 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक दौड़ रही हैं। चालक की झपकी और लापरवाही भी कई दुर्घटनाओं की वजह बन रही है।

हाई-टेक कैमरे भी बेअसर
हादसे रोकने के लिए हर 100 मीटर पर थर्मल सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जो ओवरस्पीड वाहनों की पहचान कर एनएचएआई और यातायात पुलिस को सूचना देने के लिए हैं। बावजूद इसके, हादसों में कोई कमी नहीं आई है।

सुरक्षा दीवारें टूटीं, जानवरों का आसान प्रवेश
एनएचएआई के दावों के विपरीत, कई जगहों पर एक्सप्रेसवे के किनारे सुरक्षा दीवारें टूटी हुई हैं या बनाई ही नहीं गईं। स्थानीय लोगों ने जगह-जगह दीवार तोड़कर रास्ते बना लिए हैं, जिससे आवारा पशु और दुपहिया वाहन आसानी से एक्सप्रेसवे पर पहुंच जाते हैं।

हाईवे के किनारे मिट्टी डालकर बनाए ढाबे और दुकानें
पिलर संख्या 190 के आसपास हाइवे की सीमा में मिट्टी डालकर समतलीकरण कर ढाबे और दुकानें खोल ली गई हैं। यहां ट्रक खड़े रहते हैं, जबकि यह क्षेत्र नो-पार्किंग जोन है। कई स्थानों पर 10 फीट ऊंचाई तक मिट्टी भरकर हाइवे से जुड़ाव बना लिया गया है।

स्थानीय लोग खुलेआम व्यापार कर रहे हैं, लेकिन एनएचएआई अधिकारियों की अनदेखी के कारण स्थिति बेकाबू है। एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

यह ड्रीम प्रोजेक्ट, जो देश की आधुनिक सड़क प्रणाली की मिसाल माना जा रहा था, अब लगातार हादसों और लापरवाही के कारण सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।

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