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मध्यप्रदेश

छठ पर्व: सीएम ने सूर्य को दिया अर्घ्य, कहा- पर्व से मजबूत होती है सनातन संस्कृति की आस्था

उज्जैन

मध्य प्रदेश के उज्जैन में सूर्य को अर्ध्य देकर छठ पूजा का समापन किया गया. विक्रम सरोवर पर हुए आयोजन में सीएम डॉ. मोहन यादव भी शामिल हुए. इस दौरान खास बात यह रही कि बादल छाए रहने के कारण सूर्य उदय नहीं होन पर भी सीएम ने व्रतियों के साथ अर्घ्य अर्पित कर प्रदेशवासियों के लिए मंगल कामना की.

दरअसल, चार दिन तक चलने वाला छठ महापर्व मंगलवार को संपन्न हो गया. सुबह 7.30 बजे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विक्रम सरोवर पर आयोजित छठ पूजन में शामिल हुए. उन्होंन व्रती महिलाओं के साथ पूजा कर प्रदेशवासियों की तरक्की और खुशहाली की मंगल कामना की.इसके अलावा बड़ी संख्या में व्रती महिलाओं ने शिप्रा नदी और तालाबों पर पहुंचकर भी सूर्य को अर्घ्य देकर छठी मइया की पूजा-अर्चना की. 

मुख्यमंत्री ने विक्रम सरोवर पर पारंपरिक विधि से पूजा-अर्चना कर सूर्य देव से जनता की खुशहाली, संतान की दीर्घायु और परिवार की समृद्धि की कामना की। उन्होंने छठ मैया की आराधना करते हुए प्रदेशवासियों और मिथिलांचल के लोगों को इस महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।चार दिनों तक चलने वाले इस लोकपर्व की शुरुआत ‘नहाय-खाय’ से होती है और समापन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ होता है। इस वर्ष 26 अक्टूबर को खरना, 27 अक्टूबर को सायंकालीन अर्घ्य और 28 अक्टूबर को प्रातःकालीन अर्घ्य के साथ छठ व्रत की पूर्णता हुई।
 
पर्व के तीसरे दिन डूबते सूर्य को और चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा निभाई जाती है। इस दौरान महिलाएं जल में खड़े होकर बांस के सूप में फल, ठेकुआ, चावल के लड्डू, गन्ना और अन्य प्रसाद रखकर सूर्य देव की आराधना करती हैं।रामघाट और विक्रम विश्वविद्यालय परिसर स्थित विक्रम सरोवर पर हजारों श्रद्धालु इस पावन अवसर के साक्षी बने। पूजा-अर्चना के उपरांत मुख्यमंत्री डॉ. यादव कालिदास अकादमी पहुंचे, जहां उन्होंने भाजपा नगर द्वारा आयोजित ‘आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान’ संगोष्ठी में भाग लिया।

सीएम बोले- छठ पूर्वांचल का प्रमुख पर्व

छठ पूजन में शामिल हुए सीएम यादव ने कहा कि छठ पूर्वांचल का प्रमुख पर्व है, जिसमें महिलाएं परिवार के लिए कठोर व्रत रखती हैं. उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश नदियों का मायका है. यहां चढ़ाया गया जल क्षिप्रा नदी से होकर चंबल, यमुना और फिर गंगा नदी तक पहुंचता है.

चार दिन चला छठ पर्व 

चार दिवसीय छठ पूजन पर्व की शुरुआत 25 अक्टूबर को ‘नहाय-खाय' के साथ हुई. इसके बाद 26 को ‘खरना', 27 को निर्जल उपवास कर सायंकालीन अर्घ्य दान दिया गया और आज सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ इस महापर्व का समापन हो गया. इस दिन महिलाओं और परिवार के लोगों ने सूर्य को अर्घ्य देकर संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना की. 

तीसरे दिन डूबते, चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य

पर्व के तीसरे दिन, डूबते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा निभाई जाती है। इस दिन महिलाएं बांस के सूप में फल, गन्ना, चावल के लड्डू, ठेकुआ और अन्य सामग्री रखकर जल में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करती हैं। इस तरह चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ महापर्व का समापन होता है।

इस दौरान शिप्रा नदी के रामघाट और विक्रम विश्वविद्यालय परिसर स्थित विक्रम सरोवर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजन-अर्चन के लिए पहुंचते हैं। पूजन के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कालिदास अकादमी में भाजपा नगर द्वारा आयोजित आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान संगोष्ठी में शामिल होंगे।

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