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मध्यप्रदेश

मोहन यादव बोले—गाय का दूध बीमारियों से सुरक्षा कवच, फिर खुद को अंडे खाने पर क्यों मजबूर करते हो?

इंदौर 

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अंडों को पौष्टिक आहार के रूप में प्रचारित किए जाने पर तीखा सवाल उठाया और जनता को गाय का दूध पीने की सलाह दी. इस बयान से राज्य में स्कूली बच्चों के भोजन में अंडों को शामिल करने के पुराने राजनीतिक विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है. 

CM यादव इंदौर शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर हातोद स्थित गौशाला में 'गोवर्धन पूजा' कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य और पौष्टिकता को लेकर गाय के महत्व पर जोर दिया.

मुख्यमंत्री ने कहा, "जिसके घर में गाय होती है, उसके बच्चों समेत परिवार के सभी सदस्य स्वस्थ रहते हैं. यह ईश्वर की लीला है."  इसके बाद मुख्यमंत्री ने देश में अंडों की खपत को बढ़ावा देने के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रसिद्ध विज्ञापन जिंगल "संडे हो या मंडे, रोज खाओ अंडे" पर सीधे निशाना साधा.

CM यादव ने कहा, "क्यों संडे हो या मंडे… ये बेकार की बातें हैं. खुद को अंडे खाने के लिए क्यों मजबूर करते हो? जो अंडे-डंडे खाना चाहते हैं, उन्हें अंडे खिलाते रहो." उन्होंने दृढ़ता से कहा, "गाय का दूध पियो और खुश रहो." 

मुख्यमंत्री ने आगे स्पष्ट किया कि  गाय का दूध अमृत है. उसमें सबसे अधिक पोषक तत्व होते हैं. गाय के दूध के सेवन से बीमारियां दूर होती हैं और व्यक्ति स्वयं को स्वस्थ और आनंदित पाता है. गौ-माता दोहरा पोषण करती है. वह अपने बछड़े के पालन के साथ-साथ मानव जाति का भी पोषण करती हैं हर युग में हर आश्रम में गौ-माता पाली जाती थी और जगह-जगह गौ-पालन होता था. परम्परागत रूप से घरों में पहली रोटी गाय के लिये बनाई जाती है.

स्कूली बच्चों के लिए पौष्टिक आहार के रूप में अंडों को बढ़ावा देना मध्य प्रदेश में लंबे समय से विवाद का विषय रहा है. साल 2019 में कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने कुपोषण से निपटने के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों को अंडे परोसने के प्रस्ताव पर विचार किया था. 

BJP के नेताओं ने उस समय इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया था और सरकार पर लोगों की धार्मिक मान्यताओं की अवहेलना करने का आरोप लगाया था.  

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस दौरान गौ-संरक्षण के लिए राज्य सरकार की योजनाओं पर भी बात की. उन्होंने कहा कि बीमार और लावारिस गायों की सुरक्षा के लिए मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों में 10 हजार से ज्यादा पशुओं को रखने की क्षमता वाली गौशालाएं बनाई जा रही हैं.

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