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राजनीति

महागठबंधन की सीटों का खेल: मुकेश सहनी और माले के रहस्य को दीपांकर भट्टाचार्य ने उजागर किया

पटना 
बिहार चुनाव को लेकर महागठबंधन में सीट बंटवारे में देरी और VIP चीफ मुकेश सहनी की नाराजगी की खबरें सामने आईं। सहनी को मनाने में अहम भूमिका किसकी रही इसका खुलासा सीपीआई-माले के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने किया। पटना में हिन्दुस्तान बिहार समागम के कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होने बताया कि आपको याद होगा जब साल 2020 में महागठबंधन के सीट बंटवारे के ऐलान के वक्त सहनी प्रेस कॉन्फ्रेंस से उठकर चले गए थे। फिर एनडीए के साथ हो गए थे। उस समय उनके चार विधायक थे, वो खुद मत्री बने।

लेकिन फिर कुछ समय बाद सहनी के चारों विधायकों को बीजेपी ने हड़प लिया। उस समय इन लोगों ने तय किया, जल शपथ ली थी, कि कुछ भी हो जाए हम लोग भाजपा के साथ नहीं जाएंगे। मैंने उनसे (मुकेश सहनी) इतना ही कहा कि आपकी सामाजिक पहचान पहले से है, राजनीतिक पहचान भी बनने लगी है। लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए आप लड़ रहे हैं। वोटर अधिकार यात्रा में आप साथ थे। लोकसभा चुनाव में साथ थे। ऐसे में आपके साथ जो हुआ उसे भूलना नहीं चाहिए। 2-4 सीटों की जो बात है, उसे मिलकर हम लोग देखेंगे।

माले महासचिव ने बताया कि मुझे अच्छा लगा कि मुकेश सहनी ने एक चिट्ठी तुरंत राहुल गांधी को भेज दी। जिसके बाद उनका फोन आया, और फिर वो 15 सीटों पर मान गए। दरअसल इस बार हम लोगों का बड़ा गठबंधन है। सीट बंटवारे में देरी का एक ये भी कारण है। 2020 में पांच दलों का महागठबंधन था। आरजेडी, कांग्रेस और लेफ्ट के तीन दल थे। लेकिन इस ज्यादा पार्टी हैं। मुकेश सहनी की वीआईपी, आईपी गुप्ता की पार्टी भी शामिल है। ऐसे में थोड़ी बहुत देरी होती है। लेकिन देर आए, दुरुस्त आए।

दीपांकर भट्टाचार्य ने ये भी बताया कि माले कितनी सीटों पर लड़ रही है। उन्होने कहा कि हम लोगों ने तय किया है कि इस बार महागठबंधन में ज्यादा दल है। पिछली बार 19 सीटों पर लड़े थे। इस बार 20 सीटों पर लड़े रहे हैं। उम्मीद है कि बाकी सहयोगी दल भी ऐसा ही करेंगे। वहीं 8 सीटों पर महागठबंधन में फ्रेंडली फाइट के सवाल पर माले महासचिव ने कहा कि नामांकन वापसी तक सब कुछ शॉर्ट लिस्ट हो जाएगा।

वहीं बीजेपी पर हमला बोलते हुए भट्टाचार्य ने कहा कि देश के सामने बड़ी चुनौती है। संविधान और लोकतंत्र पर हमला हो रहा है। बीजेपी ने तो कह दिया है कि देश में बाकी छोटे दलों, क्षेत्रीय दलों का समय समाप्त है। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने तो कहा कि देश में एक ही पार्टी राज करेगीउसका नाम बीजेपी है। शाह भी कह चुके हैं हम लोग 5 साल नहीं 50 साल के लिए आए हैं।

 

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