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छत्तीसगड़

विस्फोट से जख्मी हुए थे, अब बने हीरो: टोमन कुमार ने तीरंदाजी में दिलाया भारत को स्वर्ण पदक

रायपुर

अंतरराष्ट्रीय पैरा तीरंदाजी खिलाड़ी टोमन कुमार की कहानी साहस और जज़्बे की मिसाल है। 22 से 28 सितंबर 2025 तक दक्षिण कोरिया में आयोजित विश्व पैरा तीरंदाजी प्रतियोगिता में टोमन ने स्वर्ण और कांस्य पदक जीतकर भारत का नाम रौशन किया।

तीन साल पहले झारखंड के माओवादी ऑपरेशन के दौरान CRPF की टुकड़ी में शामिल टोमन बारूदी विस्फोट का शिकार हुए और उनका चांया पैर खो गया। लेकिन इस चोट ने उन्हें नहीं तोड़ा; बल्कि नई उड़ान भरने की प्रेरणा दी। टोमन छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के अहिबरनवागांव के रहने वाले हैं और लक्ष्य पर निशाना साधने में माहिर हैं।

टोमन ने राष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान जयपुर के पैरा नेशनल में पहला पदक जीतकर बनाई। इसके बाद उन्होंने सामान्य वर्ग के नेशनल गेम्स देहरादून में भी हिस्सा लिया।

खेल में अंतर केवल समय का होता है – साधारण वर्ग में निशाना साधने का समय तीन मिनट और पैरास्पोर्ट्स में चार मिनट होता है। दूरी और उपकरण समान रहते हैं, लेकिन धैर्य, हौसला और मानसिक दृढ़ता ही सफलता तय करती है।

विश्व पैरा तीरंदाजी में स्वर्ण और कांस्य जीतने के बावजूद सरकार की ओर से टोमन को कोई आर्थिक सहायता या सम्मान नहीं मिला। उनका अगला लक्ष्य पैरालिंपिक 2028 में पदक जीतना है।

दक्षिण कोरिया में हुई प्रतियोगिता के बाद भारतीय तीरंदाजी टीम अगले साल होने वाली एशियन चैंपियनशिप में हिस्सा लेगी, जिसमें टोमन कुमार भी शामिल होंगे। इस आधार पर भारत की पैरालिंपिक टीम का चयन किया जाएगा। तैयारी के लिए टोमन औरंगाबाद के ट्रेनिंग सेंटर में अभ्यास कर रहे हैं।

टोमन ने अपना पहला नेशनल मुकाबला पटियाला में अपने कोच के कंपाउंड धनुष से खेला। अंतरराष्ट्रीय मानक का यह धनुष और उपकरण करीब 5.5 लाख रुपये का था।

अपने सपनों को सच करने के लिए टोमन ने 2024 में अपनी बचत से दो लाख रुपये खर्च कर अपना पहला धनुष खरीदा। आज भी उनके कोच पंकज सिंह उन्हें तकनीकी और उपकरणों में मदद करते हैं।

आमतौर पर इस मुकाम तक पहुंचने में खिलाड़ियों को सालों लग जाते हैं, लेकिन टोमन ने तीर-कमान में भी करिश्माई प्रदर्शन कर यह साबित कर दिया कि हौसला और मेहनत किसी भी चुनौती को पार कर सकती है।

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