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देश

कफ सिरप कांड में ED का बड़ा एक्शन, श्रीसन फार्मा के कई ठिकानों पर एक साथ रेड

बेंगलुरु 

कोड्रिफ सिरप मामले में कार्रवाई तेज हो गई है। सोमवार को ED यानी प्रवर्तन निदेशालय ने श्रीसन फार्मा से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की है। खबर है कि मध्य प्रदेश में इस जहरीले कफ सिरप के कारण 20 से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई है। फिलहाल जांच जारी है। सिरप बनाने कंपनी श्रीसन फार्मा के मालिक जी रंगनाथन को गिरफ्तार कर लिया गया है।

ईडी चेन्नई कोल्ड्रिफ कफ सिरफ मामले में PMLA के तहत तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई स्थित श्रीसन फार्मा के 7 ठिकानों पर छापेमारी की है। खास बात है कि इनमें तमिलनाडु ड्रग कंट्रोल ऑफिस के शीर्ष अधिकारियों के ठिकाने भी शामिल हैं।

वर्तन निदेशालय (ED) ने फार्मा से जु़ड़े कई परिसरों में सोमवार को छापामारी की है। हालांकि, छापामारी से जुड़ी अधिक डिटेल आनी बाकी है। बता दें कि कोल्ड्रिफ कफ सीरप को श्रीसन फार्मा ही बनाती है।
कंपनी के मालिक हो चुके हैं गिरफ्तार

बता दें इस फार्मा कंपनी के केस दर्ज किया गया है। फार्मास्युटिकल कंपनी स्रसेन फार्मा के मालिक रंगनाथन को चेन्नई में मध्य प्रदेश पुलिस ने पिछले दिनों गिरफ्तार किया था। अब कंपनी से जुड़े परिसरों में ईडी की छापामारी चल रही है।

गौरतलब है कि कोल्ड्रिफ कफ सीरप के सेवन से मध्य प्रदेश में 22 बच्चों की जान गई है। वहीं, राजस्थान में भी इस सीरप के सेवन से बच्चों ने अपनी जान खोई है।

श्रीसन फार्मा के मालिक जी रंगनाथन की भी हो चुकी गिरफ्तारी
कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने की वजह से मध्य प्रदेश राजस्थान में हाल के दिनों में 20 से ज्यादा बच्चों की मौत हुई है। मौत होने की वजह किडनी खराब होना रहा। श्रीसन फार्मा कंपनी द्वारा ही कोल्ड्रिफ कफ सिरप का उत्पादन किया जाता है। इस मामले में कंपनी के मालिक 73 वर्षीय जी रंगनाथन को भी 9 अक्तूबर को गिरफ्तार किया जा चुका है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की जांच में कंपनी और तमिलनाडु खाद्य एवं औषधि प्रशासन (टीएनएफडीए), दोनों के द्वारा तय मानकों के उल्लंघन का खुलासा हुआ। जिसमें कंपनी का खराब बुनियादी ढांचा और बार-बार सुरक्षा चूक का पता चला। कांचीपुरम स्थित श्रीसन फार्मा ने अपने खराब बुनियादी ढांचे और राष्ट्रीय औषधि सुरक्षा नियमों के कई उल्लंघनों के बावजूद एक दशक से अधिक समय तक बिना किसी रोक-टोक के परिचालन जारी रखा।

औषधि नियंत्रकों के खिलाफ हुई कार्रवाई
बच्चों की मौत के बाद, मध्य प्रदेश सरकार ने दो औषधि निरीक्षकों और एफडीए के एक उप निदेशक को निलंबित कर दिया। साथ ही राज्य के औषधि नियंत्रक का तबादला भी कर दिया और मौतों की जांच के आदेश दिए, जबकि पुलिस ने लापरवाही के आरोप में छिंदवाड़ा जिले के एक डॉक्टर को गिरफ्तार किया। तमिलनाडु सरकार ने राज्य के दो वरिष्ठ औषधि निरीक्षकों को भी निलंबित कर दिया है और श्रीसन फार्मास्युटिकल्स को बंद करने का आदेश दिया है।

कफ सिरप में पाई गई डाइएथिलीन ग्लइकॉल की घातक मात्रा
बच्चों की मौत के बाद कोल्ड्रिफ सिरप की जांच में उसमें डाइएथिलीन ग्लाइकॉल की घातक मात्रा पाई गई। यह एक ऐसा रसायन है, जिसका इस्तेमाल अक्सर एंटीफ्रीज में किया जाता है, जिसे कई राज्यों में प्रतिबंधित कर दिया गया है। माना जाता है कि इस सिरप के कारण बच्चों की किडनी खराब हुई। बच्चों को हल्की खांसी और बुखार के लिए यह सिरप दिया गया था। 

कई राज्यों में बैन हुई कोल्ड्रिफ सीरप

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में कोल्ड्रिफ कफ सीरप के सेवन से 20 से अधिक बच्चों की जान गई है। इसके बाद राज्य सरकार ने एहतियाती कदम उठाते हुए इस दवा की बिक्री पर बैन लगा दिया। इसके बाद राजस्थान समेत कई राज्यों में कोल्ड्रिफ कफ सीरप की बिक्री पर रोक लगा दी गई। इसमें गुजरात, पंजाब, यूपी, तमिलनाडु, बंगाल इत्यादि शामिल है।

गंभीर खामियां हुईं उजागर

ED अधिकारियों ने बताया कि छापेमारी तमिलनाडु के वरिष्ठ ड्रग नियंत्रण अधिकारियों के आवासों और जहरीले सिरप की निर्माता कंपनी श्रीसन फार्मा से जुड़े परिसरों पर की गई। बता दें कि जो दवा जीवन बचाती है, उसने बच्चों को मौत दी। इस मामले ने देशभर में आक्रोश पैदा कर दिया है। वहीं, नियामक निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण में भी गंभीर खामियों को उजागर किया है।
श्रीसन फार्मास्युटिकल्स के मालिक हो चुके हैं गिरफ्तार

केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने कंपनी और तमिलनाडु खाद्य एवं औषधि प्रशासन (TNFDA) दोनों द्वारा कई उल्लंघन पाए। खराब बुनियादी ढांचे और बार-बार सुरक्षा उल्लंघनों के बावजूद, श्रीसन 2011 में लाइसेंस प्राप्त करने के बाद से बेरोकटोक काम करती रही। 

चिकित्सकों ने दी ये सलाह

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश की इस घटना ने लोगों को हिला कर रख दिया है। इस बीच चिकित्सकों ने कहा कि बिना किसी सलाह के बच्चों को दवा देना खतरनाक साबित हो सकता है। बाल रोग विशेषज्ञ बताते हैं कि सीरप के सेवन से बलगम पतला हो जाता है, जिसको नवजात बाहर नहीं निकाल पाते हैं। बिना किसी चिकित्सकीय सलाह के छोटे बच्चों को इस प्रकार दवाएं देना हानिकारत साबित हो सकता है।(

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