<?php /** * The template for displaying the header * */ defined( 'ABSPATH' ) || exit; // Exit if accessed directly ?><!DOCTYPE html> <html <?php language_attributes(); ?>> <head> <meta charset="<?php bloginfo( 'charset' ); ?>" /> <link rel="profile" href="http://gmpg.org/xfn/11" /> <?php wp_head(); ?> </head> <body id="tie-body" <?php body_class(); ?>> <?php wp_body_open(); ?> <div class="background-overlay"> <div id="tie-container" class="site tie-container"> <?php do_action( 'TieLabs/before_wrapper' ); ?> <div id="tie-wrapper"> <?php TIELABS_HELPER::get_template_part( 'templates/header/load' ); do_action( 'TieLabs/before_main_content' );
मध्यप्रदेश

Deadly Cough Syrup केस: बच्चों की मौत पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका, CBI जांच की मांग

भोपाल 

मध्यप्रदेश में कफ सिरप ‘कोल्ड्रिफ़’ पीने से 16 बच्चों की मौत के मामले एसआईटी जांच के बाद अब सीबीआई जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है।एक वकील द्वारा दायर जनहित याचिका में दूषित कफ सिरप के निर्माण, विनियमन, परीक्षण और वितरण की सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में जांच और पूछताछ की मांग की गई है।

अब तक की कार्रवाई में कफ सिरप पीने से 16 बच्चों की मौत मामले में डॉ. प्रवीन सोनी को गिरफ्तार कर निलंबित कर दिया गया है। आरोप है कि प्रवीण ने ही ज्यादातर बच्चों को ये कफ सिरप लिखा था। साथ ही कफ सिरप बनाने वाली कंपनी के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। इसके साथ ही मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सख्त कार्रवाई की है। उन्होंने लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को निलंबित किया और ड्रग कंट्रोलर का तबादला कर दिया। इसके साथ ही पुलिस ने जांच के लिए 12 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।

बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदार विषैले सिरप बनाने वाली कंपनियों के लाइसेंस तुरंत रद्द किए जाएं, उन्हें बंद किया जाए और उनके उत्पादों को बाजार से वापस मंगाने का इंतजाम किया जाए. साथ ही, देश में एक सख्त 'ड्रग रिकॉल पॉलिसी' बनाई जाए.

दवाओं में प्रयुक्त खतरनाक रसायन डाई इथीलीन ग्लाइकॉल और एथलीन ग्लाइकॉल की बिक्री और निगरानी के लिए सख्त नियम बनाए जाएं.बच्चों की मौत के मामले में विभिन्न राज्यों में दर्ज सभी एफआईआर को एक जगह ट्रांसफर करके जांच कराई जाए, ताकि जांच में समन्वय बना रहे.याचिका में कहा गया है कि यह मामला केवल कुछ कंपनियों की गलती का नहीं, बल्कि देश की ड्रग रेगुलेटरी सिस्टम की विफलता का है, जिसकी वजह से कई राज्यों में मासूमों की जान गई है.

औषधि निरीक्षक छिंदवाड़ा गौरव शर्मा, औषधि निरीक्षक जबलपुर शरद कुमार जैन और राज्य के उप संचालक खाद्य एवं औषधि प्रशासन शोभित कोस्टा को निलंबित और आईएएस अधिकारी ड्रग कंट्रोलर दिनेश मौर्य को अन्यत्र स्थानांतरित किया गया है। मुख्यमंत्री ने छिंदवाड़ा प्रकरण के संबंध में सोमवार को मुख्यमंत्री निवास पर उच्च स्तरीय बैठक लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।  

जब्त किए जाए मौजूदा कफ सिरफ का स्टॉक

वकील विशाल तिवारी द्वारा दायर जनहित याचिका में राष्ट्रीय न्यायिक आयोग/विशेषज्ञ समिति से जांच की मांग की गई है। जगह-जगह बैन किए गए मौजूदा कोल्ड्रिफ कफ सिरफ के सभी स्टॉक को जब्त करने की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में हो जांच

इसके साथ ही याचिका में कहा गया कि सभी FIR की जांच सीबीआई को सौंपी जाए। कफ सिरप के निर्माण, रेगुलेशन, टेस्टिंग और डिस्ट्रीब्यूशन की जांच और पूछताछ सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में की जाए।
सबसे ज्यादा एमपी के छिंदवाड़ा में बच्चों की गई जान

बता दें कि मध्य प्रदेश और राजस्थान में 'कोल्ड्रिफ' कफ सिरप के सेवन से बच्चों की मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक दोनों राज्यों में कुल 18 बच्चों की जान जा चुकी है, जिनमें से 16 मौतें मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में और 2 राजस्थान के भरतपुर व सीकर में दर्ज की गई हैं।  जांच में सिरप में 48.6% डाईएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) नामक जहरीला रसायन पाया गया, जो किडनी फेलियर का कारण बन रहा है। 
जानिए अब तक क्या हुआ एक्शन?

केंद्र सरकार ने छह राज्यों में 19 दवाओं की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स पर जोखिम आधारित निरीक्षण शुरू कर दिया है, जबकि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों को नोटिस जारी कर तत्काल जांच और नकली दवाओं पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button