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मध्यप्रदेश

रैगिंग मामले में फंसे DAVV के फाइनल ईयर छात्र, IET करेगा कंपनियों को सूचित

इंदौर
 इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलाजी (आईईटी) के जूनियर छात्रों से रैगिंग करने के मामले में अब फाइनल ईयर के दो छात्रों की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। एंटी रैगिंग कमेटी की रिपोर्ट के बाद भंवरकुआं पुलिस जांच में जुटी है। रिपोर्ट में जिन छात्रों के नाम सामने आए हैं, उनमें फाइनल ईयर के दो ऐसे छात्र भी शामिल हैं, जिन्हें नामी कंपनियों से जाब आफर मिले हैं।

संस्थान की प्लेसमेंट सेल अब इस पूरे मामले की जानकारी उन कंपनियों को देने की तैयारी में है, जिन्होंने इन छात्रों को जाब आफर किया है। इस संबंध में कंपनियों को पत्र लिखकर जानकारी देंगे। हालांकि यह भी देखा जाएगा कि विद्यार्थियों का भविष्य पूरी तरह खराब न हो। पत्र भेजने से पहले कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई से चर्चा की जाएगी। करीब दो सप्ताह पहले आईईटी के कुछ सीनियर छात्रों ने फर्स्ट ईयर के विद्यार्थियों को कैंपस के बाहर एक कैफे में बुलाया था।

वहां उनसे फर्जी जीमेल, इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स जैसे सोशल मीडिया अकाउंट बनवाकर संस्थान के खिलाफ पोस्ट करने को कहा गया। इसी दौरान कुछ जूनियर्स ने हॉस्टल में तोड़फोड़ भी की। एंटी रैगिंग कमेटी की जांच में यह बात सामने आई कि छात्रों ने नेपाल के जेन-जी आंदोलन की तर्ज पर प्रदर्शन की योजना बनाई थी।

रिपोर्ट में दो दर्जन छात्रों पर संदेह

एंटी रैगिंग कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में करीब दो दर्जन छात्रों की भूमिका संदिग्ध बताई है। इनमें फर्स्ट ईयर के साथ-साथ थर्ड और फाइनल ईयर के छात्र भी शामिल हैं। फिलहाल भंवरकुआं पुलिस ने होस्टल के सीसीटीवी-डीवीआर तोड़ने के मामले में चार छात्रों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। जबकि रैगिंग प्रकरण की जांच अब भी जारी है।

प्लेसमेंट सेल के मुताबिक फाइनल ईयर के जिन दो छात्रों के नाम सामने आए हैं, उन्हें कंपनियों से अच्छे पैकेज पर जाब आफर मिल चुके हैं। अगले साल मई में उन्हें ज्वाइनिंग करनी है। लेकिन नियमानुसार कंपनियों को इससे पहले छात्रों की रिपोर्ट भेजनी होती है। ऐसे में रैगिंग मामले का जिक्र नौकरी पाने वाले छात्रों के रिकार्ड में जोड़ा जा सकता है, जिससे उनकी नौकरी पर असर पड़ सकता है।

पुलिस जांच: थर्ड ईयर के छात्र अगले साल नहीं बैठ पाएंगे प्लेसमेंट में

    रैगिंग में फाइनल ईयर के कुछ विद्यार्थी लिप्त हैं। इन्हें नौकरियां मिल चुकी हैं। इनके बारे में कंपनियों को पत्र लिखकर बताएंगे, क्योंकि प्रकरण की जांच पुलिस कर रही है। वैसे विद्यार्थियों का भविष्य खराब न हो इसका भी ध्यान रखा जाएगा। पत्र भेजने से पहले कुलगुरु से चर्चा करेंगे। – गोविंद माहेश्वरी, प्लेसमेंट ऑफिसर, आईईटी

 

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