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मध्यप्रदेश

50 साल पूरे हुए गांधी सागर बांध, राज्य सरकार ने 465 करोड़ की राशि से मरम्मत का किया ऐलान

मंदसौर 
 साठ के दशक में बने गांधी सागर बांध की 50 साल की उम्र पूरी हो गई है. अब राज्य सरकार ने इसका जीवन बढ़ाने की पहल शुरू कर दी है. सिंचाई की बड़ी परियोजनाओं के साथ ही बांध से अब मंदसौर और नीमच जिलों को पेयजल भी मिलने वाला है. बांध से जल छोड़े जाने के बाद यहां बिजली उत्पादन भी होता है. बांध में लगे टरबाइन पुराने होने और बांध की नींव की मजबूती को ध्यान में रखते हुए सरकार ने जीर्णोद्धार के लिए बजट की मंजूरी दी है.

गांधी सागर बांध की उम्र 50 साल बढ़ जाएगी

दो साल में पूरे होने वाले इस काम के बाद बांध की उम्र 50 साल और बढ़ जाएगी. बिजली उत्पादन भी पहले की तरह होने लगेगा. मध्य प्रदेश और राजस्थान की सीमा पर बने गांधी सागर बांध के जीर्णोद्धार को लेकर राज्य सरकार ने 465 करोड रुपए की मंजूरी दी है. बांध के निर्माण को 50 साल पूरे होने के बाद इसकी उम्र बढ़ाने की मंशा से सरकार ने जीर्णोद्धार और यहां हो रहे बिजली उत्पादन के संयंत्रों के नवीनीकरण का प्रोजेक्ट तैयार किया है. 1960 में तैयार हुए इस बांध का 2019 की बाढ़ में खतरा बढ़ गया था. हालांकि बांध की मजबूती के कारण यहां किसी भी तरह की खतरे की कोई बात नहीं है. उम्र और समय के हिसाब से सरकार ने बांध में लगे बिजली उत्पादन के टरबाइन को बदलने की तैयारी की है.

मंदसौर और नीमच जिले के लिए पेयजल परियोजना

मध्य प्रदेश और राजस्थान की सीमा से बहने वाली चंबल नदी पर बने इस बांध में करीब 65 किलोमीटर वर्ग किलोमीटर एरिया में जलभराव रहता है. राज्य सरकार ने मंदसौर और नीमच जिलों में सिंचाई की बड़ी परियोजनाओं के साथ ही दोनों जिलों में पेयजल परियोजना का भी आधार इसी डैम को माना है. दो जिलों की कृषि और पेयजल समस्या से निजात दिलाने वाले इस डैम के बांध को और मजबूत बनाने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है.

मंदसौर और नीमच जिले में बड़े प्रोजेक्ट

मंदसौर जिले की सभी 8 और नीमच जिले की 5 तहसीलों में गांधी सागर बांध से पानी पहुंचाने के लिए बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं. जिन पर दो तिहाई काम पूरा हो चुका है. ऐसी स्थिति में इस बांध की उम्र बढ़ाई जानी की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी. राज्य सरकार द्वारा मंजूर किए गए इस प्रोजेक्ट के पूरा होने में 2 साल का समय पूरा लगेगा. इसके बाद यहां बांध में लगे 5 टरबाइन से रोजाना 115 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा. साथ ही बांध से छोड़े जाने वाले पानी से राजस्थान के रावतभाटा और कोटा बैराज में पानी मिलने से वहां सिंचाई और बिजली उत्पादन भी हो सकेगा.

पेयजल और सिंचाई के अलावा बिजली उत्पादन

इसके बाद यहां से छूटने वाले पानी से फिर मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जिले श्योपुर, भिंड और मुरैना जिलों में किसानों को चंबल के पानी का लाभ मिल सकेगा. चरणबद्ध तरीके से छोड़े जाने वाले पानी और बिजली उत्पादन से मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई जिलों को दोहरा लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है.

मंदसौर कलेक्टर अदिति गर्ग ने बताया "वर्ष 2019 की बाढ़ में अचानक लबालब भरे बांध से यहां लगे टरबाइन को आंशिक नुकसान हुआ था. इसे बदलने के लिए राज्य सरकार ने अब बड़ी पहल करते हुए करोड़ों रुपए की मंजूरी दी है. डैम के पानी का पेयजल और सिंचाई के अलावा बिजली उत्पादन में भी लाभ मिल सकेगा. गांधी सागर बांध के जीर्णोद्धार की इस पहल के बाद बांध की उम्र अगले 50 साल और बढ़ना तय माना जा रहा है."

 

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