<?php /** * The template for displaying the header * */ defined( 'ABSPATH' ) || exit; // Exit if accessed directly ?><!DOCTYPE html> <html <?php language_attributes(); ?>> <head> <meta charset="<?php bloginfo( 'charset' ); ?>" /> <link rel="profile" href="http://gmpg.org/xfn/11" /> <?php wp_head(); ?> </head> <body id="tie-body" <?php body_class(); ?>> <?php wp_body_open(); ?> <div class="background-overlay"> <div id="tie-container" class="site tie-container"> <?php do_action( 'TieLabs/before_wrapper' ); ?> <div id="tie-wrapper"> <?php TIELABS_HELPER::get_template_part( 'templates/header/load' ); do_action( 'TieLabs/before_main_content' );
विदेश

टैरिफ पर डींगें हांकने वाले ट्रंप के करीबी भी भारत के साथ समझौते पर सहमत

वाशिंगटन 
भारत पर भारी-भरकम टैरिफ लगाने के बाद अब अमेरिका का कहना है कि वह भारत के साथ डील करके इसका हल निकालना चाहता है। अमेरिकी वित्त मंत्री हावर्ड लटनिक ने कहा कि हमें भारत समेत कई देशों के साथ समझौता करना है। आपको बता दें कि कुछ दिन पहले ही उन्होंने कहा था कि भारत को हमसे माफी मांगनी पड़ेगी। वाणिज्य मंत्री ने कहा कि भारत और ब्राजील को अमेरिका को सही प्रतिक्रिया देनी चाहिए और अपने बाजार को खोल दना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसी कोई नीति नहीं बनानी चाहिए जिससे कि अमेरिका को नुकसान हो।उन्होंने कहा, हमें कई देशों से बात करके हल निकालना है। इनमें भारत, ब्राजील और स्विट्जरलैंड जैसे देश हैं।

लटनिक ने दावा किया था कि एक या दो महीने में ही भारत बात करने के लिए टेबल पर आ जाएगा और उसे माफी मांगनी पड़ेगी। हालांकि भारत ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है और अमेरिका की धमकियों को नजरअंदाज कर विकल्प तलाशने में जुटा है। यह अमेरिका के लिए परेशानी का सबब बन गया है। लटनिक ने कहा था कि अमेरिका की नीतियां मोदी सरकार को अमेरिका के साथ डील करने को मजबूर कर देंगी।

लटनिक ने कहा था कि भारत रूस से तेल खरीद रहा है और यह बहत ही हास्यास्पद है। उन्होंने कहा था कि भारत को ही फैसला करना होगा कि वह अमेरिका की ओर है या रूस की ओर। उन्होंने कहा था कि अमेरिका की कंज्यूमर मार्केट बहुत बड़ी है। ऐसे में सबको ही उनको ग्राहकों के पास लौटना ही पड़ेगा और ग्राहक हमेशा सही होता है।

ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80 वें सत्र से इतर शुक्रवार को भारत की अध्यक्षता में हुई बैठक में सदस्यों ने व्यापार-प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयों के प्रसार पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि चाहे ये प्रतिबंध टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों में अंधाधुंध वृद्धि के रूप में हों, या संरक्षणवाद के रूप में, विशेष रूप से दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल किए जाने वाले उपायों के रूप में इनसे वैश्विक व्यापार में कमी, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बाधा और अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक एवं व्यापारिक गतिविधियों में अनिश्चितता पैदा होने का खतरा पैदा होता है।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button