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धर्म/ज्योतिष

श्राद्ध का आख़िरी दिन: सर्वपितृ अमावस्या पर जानें तर्पण का शुभ समय

रविवार, 21 सितंबर को पितृ पक्ष का अंतिम दिन है. श्राद्ध पक्ष के आखिरी दिन सर्व पितृ अमावस्या मनाई जाती है, जिसे आमतौर पर महालया अमावस्या भी कहते हैं. हिंदू धर्म में सर्व पितृ अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है, क्योंकि यह पितरों को विदाई देने का दिन होता है. पितृ पक्ष के दौरान हमारे पूर्वज 15 दिनों के लिए धरती पर आते हैं और सर्व पितृ अमावस्या के दिन वापस अपने लोक लौट जाते हैं. ऐसे में इस दिन का महत्व और अधिक बढ़ जाता है. अगर आप भी अपने पितरों को सर्व पितृ अमावस्या के दिन प्रसन्न करना चाहते हैं, तो चलिए आपको बताते हैं शुभ मुहूर्त और इस अमावस्या से जुड़ी जरूरी जानकारी.

सर्व पितृ अमावस्या 2025 मुहूर्त
    अमावस्या तिथि शुरू – 21 सितंबर को रात 12:16 बजे.
    अमावस्या तिथि समाप्त – 22 सितंबर को रात 1:23 बजे.
    कुतुप मुहूर्त – 21 सितंबर को दोपहर 12:07 से दोपहर 12:56 बजे तक.
    रौहिण मुहूर्त – 21 सितंबर को दोपहर 12:56 से दोपहर 1:44 बजे तक.
    अपराह्न काल – 21 सितंबर को दोपहर 1:44 से शाम 4:10 बजे तक.

सर्व पितृ अमावस्या का क्या महत्व है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, सर्वपितृ अमावस्या पर किए गए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान से पितरों की आत्मा को तृप्ति और शांति मिलती है. कहते हैं कि इस दिन किए गए कर्मकांड सीधे पितृ लोक तक पहुंचते हैं, जिससे पितृ प्रसन्न होकर अपने वंशजों को लंबी उम्र, धन-धान्य और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं.

सर्व पितृ अमावस्या क्यों मनाई जाती है?

सर्व पितृ अमावस्या को पितृ मोक्ष अमावस्या या सर्व मोक्ष अमावस्या भी कहा जाता है. यह दिन बहुत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि अगर आपने अभी तक अपने पितरों का श्राद्ध नहीं किया है या उनकी श्राद्ध की तिथि पता नहीं है, तो आप इस दिन उनका श्राद्ध कर अपने पितरों को तृप्त कर सकते हैं. ऐसा करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है.

सर्व पितृ अमावस्या के लिए कौन से मंत्र हैं?
सर्व पितृ अमावस्या के दिन पितृ दोष से मुक्ति और पितरों को प्रसन्न करने के लिए आप नीचे दिए गए मंत्रों का जाप कर सकते हैं:-

    पितृ गायत्री मंत्र:- ॐ पितृ गणाय विद्महे जगतधारिणे धीमहि तन्नो पित्रो प्रचोदयात्.
    दूसरा पितृ मंत्र:- ॐ देवताभ्य: पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च नम: स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नम:.
    पितृ देवता मंत्र:- ॐ पितृ देवतायै नमः.

सर्वपितृ अमावस्या को क्या करना चाहिए?
सर्व पितृ अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण करने के बाद श्रद्धानुसार दान किया जाता है. सर्व पितृ अमावस्या के दिन पूजा के बाद अपनी आर्थिक स्थिति अनुसार दान करें और आप दान में अन्न, धन और कपड़े दे सकते हैं. इस दिन दान करने से व्यक्ति को अमोघ फल की प्राप्ति होती है.

सर्व पितृ अमावस्या के दिन क्या दान करना चाहिए?
सर्व पितृ अमावस्या के दिन अन्नदान, गौदान और वस्त्र दान का विशेष महत्व माना जाता है. सर्व पितृ अमावस्या पर ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को भोजन कराने, गुड़, चावल, गेहूं और घी का दान करने और गरीबों की सेवा करने से पितृ प्रसन्न होते हैं.

सर्व पितृ अमावस्या के दिन क्या नहीं करना चाहिए?

सर्व पितृ अमावस्या के दिन बाल और नाखून नहीं काटने चाहिए, तामसिक भोजन नहीं करना चाहिए, यात्रा और कपड़े धोने से बचना चाहिए और किसी से वाद-विवाद या मन में गलत विचार नहीं लाने चाहिए. ऐसा माना जाता है कि इन कार्यों को करने से नकारात्मक ऊर्जा आती है और शुभ फलों की प्राप्ति नहीं होती है.

सर्व पितृ अमावस्या पर पितरों को खुश करने के क्या उपाय हैं?
सर्व पितृ अमावस्या के दिन अपने पितरों को खुश करने के लिए पवित्र नदी में स्नान, श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करें. इसके अलावा, ब्राह्मणों को भोजन कराएं और जरूरतमंदों को दान-दक्षिणा दें. अमावस्या की शाम को पीपल के वृक्ष के नीचे चौमुखी दीपक जलाकर पितरों से क्षमा याचना करें और उन्हें विदाई दें.

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