<?php /** * The template for displaying the header * */ defined( 'ABSPATH' ) || exit; // Exit if accessed directly ?><!DOCTYPE html> <html <?php language_attributes(); ?>> <head> <meta charset="<?php bloginfo( 'charset' ); ?>" /> <link rel="profile" href="http://gmpg.org/xfn/11" /> <?php wp_head(); ?> </head> <body id="tie-body" <?php body_class(); ?>> <?php wp_body_open(); ?> <div class="background-overlay"> <div id="tie-container" class="site tie-container"> <?php do_action( 'TieLabs/before_wrapper' ); ?> <div id="tie-wrapper"> <?php TIELABS_HELPER::get_template_part( 'templates/header/load' ); do_action( 'TieLabs/before_main_content' );
मध्यप्रदेश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की विशेष अदालत आज बुलाई गई, जमानत याचिकाओं पर होगी सुनवाई

जबलपुर
 मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में पहली बार 10 जज केवल जमानत याचिकाओं की सुनवाई करने के लिए बैठेंगे. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा ने एक प्रशासनिक आदेश दिया है, जिसे हाई कोर्ट की वेबसाइट पर देखा जा सकता है. इसमें शनिवार को 10 जज अपनी-अपनी अदालत में बैठेंगे. वे केवल जमानत याचिकाओं की सुनवाई करेंगे.

एमपी हाई कोर्ट में फिलहाल जमानत याचिकाओं के 3000 से ज्यादा मामले लंबित हैं. इन्हीं मामलों में लोगों को न्याय देने के लिए हाईकोर्ट ने यह व्यवस्था की है. हमारी न्याय व्यवस्था की प्रक्रिया में जमानत का प्रावधान है. जस्टिस अचल कुमार पालीवाल, जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल, जस्टिस देवनारायण मिश्रा, जस्टिस दीपक खोत, जस्टिस अजय कुमार निरंकारी, जस्टिस हिमांशु जोशी, जस्टिस रामकुमार चौबे, जस्टिस रत्नेशचंद्र सिंह बिसेन, जस्टिस बीपी शर्मा और जस्टिस प्रदीप मित्तल कल 20 सितंबर को केवल जमानत याचिकाएं सुनेंगे.

जबलपुर की मुख्य पीठ में फिलहाल जमानत याचिकाओं के लंबित हैं 3000 से ज्यादा मामले

मान लीजिए किसी के खिलाफ किसी थाने में कोई एफआईआर दर्ज होती है. जिसके बाद पुलिस आरोपी को पकड़ती है. पकड़ने के बाद पुलिस आरोपी के ऊपर लगे आरोप का एक चालान तैयार करती है, जिसे कोर्ट में पेश किया जाता है. धाराओं के आधार पर यह तय होता है कि उसे कौन सी कोर्ट जमानत दे सकती है. गंभीर धाराओं में मामला हाईकोर्ट तक पहुंचता है.

जमानत की प्रक्रिया में आरोपी को अपने किसी ऐसे जानकार को पेश करना होता है, जिसके पास कोई स्थाई संपत्ति हो. स्थाई संपत्ति के कागजात के आधार पर आरोपी को जमानत दे दी जाती है. जमानत में यह शर्त होती है कि आरोपी को हर पेशी पर कोर्ट में आना होगा. इसके बाद ट्रायल चलती है. आरोपी पर लगे आरोप को गवाह और सबूत के आधार पर सिद्ध किया जाता है और इसके बाद सजा होती है या आरोपी बेगुनाह साबित होता है.

जुर्म तय नहीं होने तक आरोपी को जेल में बंद रखना सही नहीं

न्याय व्यवस्था की प्रक्रिया सरल है लेकिन सबूत और गवाह को इकट्ठा करने में काफी समय लगता है. इतने दिनों तक किसी भी आरोपी को जेल में बंद रखना सही नहीं है, क्योंकि अब तक यह तय नहीं होता कि उसने ही जुर्म किया है. इसलिए हमारी न्याय व्यवस्था जमानत का प्रावधान देती है. इसमें आरोपी को अपने परिचय के किसी ऐसे आदमी को कोर्ट में लेकर आना होता है जिसके पास कोई स्थाई संपत्ति हो. संपत्ति के कागजात के आधार पर आरोपी को जमानत मिल जाती है लेकिन उसे समय-समय पर कोर्ट में आना पड़ता है. इसके बाद यदि उसे सजा होती है तो वह जेल जाता है और आरोप सिद्ध नहीं होने पर वह जेल से छूट जाता है.

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में लगभग पेंडिंग हैं चार लाख 80 हजार केस

यह प्रक्रिया सुनने में या पढ़ने में जितनी सरल लगे लेकिन उतनी सरल है नहीं. क्योंकि हमारी अदालतों में लाखों केस पेंडिंग हैं. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में लगभग चार लाख 80 हजार केस पेंडिंग हैं. ऐसी स्थिति में यदि किसी आरोपी को पुलिस ने पकड़ा और उसे जेल भेज दिया गया. यदि वह जमानत के लिए हाई कोर्ट में जमानत याचिका लगाता है. लेकिन हाई कोर्ट में महज 41 जज हैं और रोज उनके पास सैकड़ो मामले होते हैं. ऐसी स्थिति में जेल में बंद विचाराधीन कैदियों को जमानत याचिका पर सुनवाई ही नहीं हो पाती.

स्पेशल कोर्ट से हजारों लोगों को मिलेगा जमानत का फायदा

एमपी हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकील एडवोकेट दीपक ने बताया कि यह प्रक्रिया यदि लगातार चलती रही तो हजारों लोगों को जमानत का फायदा मिलेगा और न्याय की प्रक्रिया तेज होगी. इसके साथ ही जिलों को भी राहत मिलेगी. क्योंकि हमारी जेलों में भी अभी क्षमता से ज्यादा कैदी बंद है.

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button