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मध्यप्रदेश

40-40 हजार रुपये में स्क्रैप सर्टिफिकेट की धांधली, MP में बढ़ा धोखाधड़ी का खतरा

ग्वालियर

कंडम और समय सीमा पूरी कर चुके वाहनों को आफ रोड करने को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार ने स्क्रैप पॉलिसी में बदलाव करने की घोषणा की है। उपभोक्ताओं को नए वाहन खरीदते समय पुराने वाहन को स्क्रैप कराने पर रोड टैक्स में 25 के बजाय 50 प्रतिशत की छूट मिलेगी। इस फैसले का फायदा उठाने के लिए आसपास के राज्यों के वेंडर सक्रिय हो गए हैं। ये वेंडर गाड़ी को अपने यहां स्क्रैप होना बताकर सर्टिफिकेट 40-40 हजार रुपये में बेच रहे हैं।

परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार दूसरे राज्यों में वाहन स्क्रैप का काम करने वाले वेंडर मप्र में सक्रिय होकर स्क्रैप सर्टिफिकेट का कारोबार कर रहे हैं, इससे मध्य प्रदेश की स्क्रैप पॉलिसी का उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा है। इसका अर्थ है कि स्क्रैप पालिसी के तहत पुराने वाहनों के नष्ट होने का फायदा प्रदेश को मिलना चाहिए, वह इस प्रकार से स्क्रैप सर्टिफिकेट बेचे जाने से नहीं मिलेगा।

नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर एक वेंडर ने बताया कि वह मप्र में हर माह 300 स्क्रैप सर्टिफिकेट उपलब्ध कराते हैं और प्रति सर्टिफिकेट 40 हजार लेते हैं, उनका काम मप्र ही नहीं दिल्ली, हरियाणा, उप्र जैसे राज्यों में हैं। ग्वालियर में हर माह 100 से ज्यादा स्क्रैप सर्टिफिकेट दिए जा रहे हैं, जबकि इतने वाहन स्क्रैप हो रहे या नहीं यह पता नहीं।

ऑटोमोबाइल शोरूम पर नेटवर्क सक्रिय
स्क्रैप सर्टिफिकेट को लेकर वेंडरों का नेटवर्क प्रदेशभर में ऑटोमोबाइल शोरूमों पर है, यहां नया वाहन खरीदने जाने वाले अगर शोरूम पर स्क्रैप सर्टिफिकेट की मांग करते हैं तो उन्हें आसानी से उपलब्ध कराने की बात बताई जाती है, इसके बाद स्क्रैप सर्टिफिकेट की कीमत बताकर बेच दिया जाता है। बड़े लग्जरी वाहनों पर स्क्रैप सर्टिफिकेट की छूट अधिक ली जा रही है।

बड़ा सवाल : दनादन बिक रहे स्क्रैप सर्टिफिकेट
प्रदेश में बड़े महानगरों में स्क्रैप सेंटर भी बनाए गए हैं, यहां वाहन स्क्रैप किए जाते हैं। बाहरी वेंडर बाहर के वाहनों के सर्टिफिकेट अधिक खपा रहे हैं, ये वाहन स्क्रैप हो भी रहे हैं या नहीं, इसका कुछ पता नहीं है। यह भी आशंका है कि बाहरी दूर दराज के राज्यों से पुराने वाहन का स्क्रैप सर्टिफिकेट जनरेट करा लिया जाता हो और वह सड़क पर दौड़ भी रहा हो।

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