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उत्तर प्रदेश

लोक निर्माण विभाग की मकरंदगंज-बरबसपुरा सड़क का मामला

पन्ना
ऊपर से चिकनी और गुणवत्तापूर्ण नजर आने वाली सड़क के अंदर भ्रष्टाचार का खेल किस तरह से खेला जाता है, मकरंदगंज से बरबसपुरा व्याहा नरेंद्रपुरा सड़क इसका उदाहरण है! लोक निर्माण विभाग के दो चीफ इंजीनियरों द्वारा की गई जांच में सड़क निर्माण कार्य की गंभीर गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है। मकरंदगंज सड़क के Crust (क्रस्ट) यानी अर्थवर्क से लेकर डामरीकरण तक सभी परतों की कुल थिकनेस (मोटाई) निर्धारित प्रावधान से कम निकली। आबादी क्षेत्र में बनाई गई सीसी सड़क का कोर काटने पर क्रैक्स पाए गए जिससे प्रथम दृष्टया कंक्रीट मटेरियल की गुणवत्ता मानक अनरूप न होना प्रतीत होता है। मोटी रकम बचाने के चक्कर में सड़क निर्माण कार्य में जमकर की गई लीपापोती की पोल खुलने से संबंधित ठेकेदार और तकनीकी अधिकारियों में हड़कंप मचा है। जांच की आंच में झुलसने की आशंका से भयभीत स्थानीय तकनीकी अधिकारियों ने शीर्ष स्तर पर मामले को सीक्रेट तरीके से मैनेज करने की कवायद शुरू कर दी है। अब देखना यह है कि गंभीर अनियमितताओं के खुलासे पर जिम्मेदारों के खिलाफ कोई ठोस एक्शन लिया जाएगा या फिर मैनेजमेंट फंडा अपना असर दिखाएगा।

सॉफ्टवेयर आधारित प्रक्रिया से हुआ था चयन
मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग द्वारा निर्माण कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए निरीक्षण की नई व्यवस्था लागू की गई है। विभाग द्वारा प्रत्येक माह रेण्डम आधार पर चयनित निर्माण कार्यों के निरीक्षण हेतु 5 एवं 20 तारीख को मुख्य अभियंताओं के दल भेजे जाते हैं। कार्यों का रेण्डमाईजेशन डब्ल्यूएमएमएस सॉफ्टवेयर के माध्यम से विभाग के उप सचिव के समक्ष किया जाता है। निरीक्षणकर्ता अधिकारियों को जिन कार्यों का निरीक्षण करना है उसकी सूची उन्हें एक दिन पूर्व सॉफ्टवेयर पर लॉगिन के माध्यम से उपलब्ध होती है। इस बार शुक्रवार 5 सितंबर 2025 को सागर परिक्षेत्र अंतर्गत पन्ना जिले के 4 निर्माण कार्य रेण्डम आधार पर चयनित हुए। जिनमें पीडब्ल्यूडी की 3 सड़कें और पीआईयू का एक निर्माणाधीन बिल्डिंग शामिल थी। पन्ना के निर्माण कार्यों के निरीक्षण की जिम्मेदारी इस बार केएस यादव मुख्य अभियंता भवन परिक्षेत्र भोपाल एवं बीएस मीणा मुख्य अभियंता एमपीआरडीसी को मिली थी। दोनों वरिष्ठ तकनीकी अधिकारियों द्वारा मकरंदगंज सड़क का सघन निरीक्षण किया गया। इस दौरान लोनिवि के स्थानीय अधिकारी उपस्थित रहे।

3 करोड़ 68 लाख की प्रशासकीय स्वीकृति
लोक निर्माण विभाग संभाग पन्ना से प्राप्त जानकारी अनुसार मकरंदगंज से बरबसपुरा व्याहा नरेंद्रपुरा मार्ग की कुल लंबाई 3.20 किलोमीटर है। शासन द्वारा इसके निर्माण हेतु दिनांक 22 दिसंबर 2022 को 3 करोड़ 68 लाख 98 हजार रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई थी। जबकि निविदा की राशि (अनुबंधित राशि) 3 करोड़ 8 लाख 29 हजार रुपए थी। सड़क निर्माण हेतु लोक निर्माण विभाग द्वारा ठेका फर्म मेसर्स मारुति नंदन कंस्ट्रक्शन सतना को कार्यादेश क्रमांक 1280 पन्ना दिनांक 11 अप्रैल 2023 को जारी किया गया। सड़क की निविदा दर एसआर से 24.50 प्रतिशत कम थी। अनुबंध अनुसार मार्ग निर्माण कार्य दिनांक 10 सितंबर 2023 (छह माह की अवधि) में पूर्ण किया जाना था। मकरंदगंज मार्ग का कार्य लोनिवि के तत्कालीन कार्यपालन यंत्री एसके पाण्डेय के कार्यकाल में हुआ। जिसके अनुविभागीय अधिकारी बीके त्रिपाठी एवं प्रभारी उपयंत्री आरएम बागरी रहे।

कार्य की गुणवत्ता से हुआ समझौता
शुक्रवार 5 सितंबर को नवनिर्मित मकरंदगंज मार्ग का सघन निरीक्षण करने वाले चीफ इंजीनियर्स केएस यादव भोपाल एवं बीएस मीणा एमपीआरडीसी द्वारा अपने समक्ष कोर काटा गया। ऊपर से देखने में अच्छी और गुणवत्तापूर्ण नजर आ रही सड़क का कोर कटने पर अंदर दबी परतों का स्याह सच सतह पर आया तो निरीक्षणकर्ता अधिकारी भी दंग रह गए। इस दौरान मौके पर उपस्थित रहे एक अधिकारी ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर जानकारी देते हुए बताया कि, सीसी सड़क के कोर की पूर्णतः मोटाई में क्रैक्स पाए गए। सीसी सड़क की मोटाई (थिकनेस) मानक अनुरूप है लेकिन क्रैक्स होने से पीक्यूसी (Pavment Quality Concrete) की गुणवत्ता से समझौता होना प्रतीत होता है। जिसका सीधा असर सड़क की मजबूती और टिकाऊपन पर पड़ता है। सड़क की विभिन्न परतों क्रस्ट (Crust) की कुल मोटाई जांच में निर्धारित प्रावधान से कम पाई गई। सिर्फ इतना ही नहीं सड़क की डीबीएम एवं बीसी लेयर (डामर की परतें) भी गुणवत्ता की कसौटी पर खरी नहीं उतरीं। हालांकि बीटी कार्य की सतह को निरीक्षणकर्ताओं ने अच्छा बताया है। राजधानी भोपाल के एक विभागीय सूत्र ने बताया कि, निरीक्षण में सड़क निर्माण कार्य की लीपापोती की परतें खुलने पर निरीक्षणकर्ता अधिकारियों ने अपनी संक्षिप्त रिपोर्ट में उन्हें गोलमोल तरीके से इंगित करते हुए अधीक्षण यंत्री से विस्तृत जांच कराने का सुझाव दिया है। हैरानी की बात है कि सड़क की जांच करने वाले दोनों वरिष्ठ अधिकारी अब कनिष्ठ अधिकारी से विस्तृत जांच कराने की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं। सूत्र ने बताया कि, रिपोर्ट में प्रायः इस तरह की गुंजाइश सिर्फ इसलिए छोड़ी जाती है, ताकि सिफारिश और मैनेजमेंट फंडे की स्थिति में मामले को सुविधानुसार कोई भी मोड़ दिया जा सके।

'मुख्य अभियंताद्वय ने मकरंदगंज मार्ग का निरीक्षण किया था। जांच प्रतिवेदन उनके द्वारा देर रात्रि में बंद कमरे में तैयार किया गया था इसलिए प्रतिवेदन के तथ्यों की फिलहाल जानकारी नहीं है। समीक्षा बैठक में जांच रिपोर्ट पर चर्चा होती है और जांच के तथ्यों के आधार पर संबंधितों पर कार्यवाही सुनिश्चित की जाती है।' जे.पी. सोनकर प्रभारी कार्यपालन यंत्री लोनिवि पन्ना।

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