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मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश ने आंगनवाड़ी भवन निर्माण में बनाया रेकॉर्ड, पीएम-जनमन कार्यक्रम में मिली सराहना

 विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा, भारिया और सहरिया समुदाय को मिलेगा लाभ

भोपाल

प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय अभियान (PM-JANMAN) के अंतर्गत मध्यप्रदेश ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश में निवासरत विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा, भारिया और सहरिया समुदाय के लिये स्वीकृत 217 आंगनवाड़ी भवनों में से 100 भवनों का तय समय-सीमा से पहले निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है। इस उपलब्धि के साथ मध्यप्रदेश योजना के क्रियान्वयन में देश का अग्रणी राज्य बन गया है। निर्धारित लक्ष्य की दिशा में ठोस कदम उठाते हुए प्रथम चरण में बड़ी प्रगति दर्ज करते हुए शेष 117 आंगनवाड़ी भवनों का निर्माण 31 मार्च 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा।

पीएम जन-मन का लक्ष्य और महत्व

भारत सरकार द्वारा वर्ष 2024 से 2026 के बीच संचालित बहुउद्देशीय पीएम-जनमन अभियान का मुख्य उद्देश्य विशेष पिछड़ी जनजातीय समूहों बैगा, भारिया और सहरिया समुदायों को शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य और आधारभूत सुविधाओं से जोड़ना है। इस अभियान में नये आंगनवाड़ी केंद्रों का निर्माण, पक्के भवनों की व्यवस्था और पूरक पोषण आहार का नियमित प्रदाय सुनिश्चित किया जा रहा है। इन आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा, बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा एवं पोषण मिलेगा, साथ ही जनजातीय समुदायों के समग्र विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।

जिलेवार निर्माण और निवेश

शिवपुरी जिले में 39, श्योपुर में 37, शहडोल में 29, उमरिया में 23, गुना में 14, डिंडौरी में 12, अशोकनगर में 11, अनूपपुर में 7, मंडला एवं दतिया में 6-6, विदिशा, बालाघाट, ग्वालियर एवं सीधी में 5-5, जबलपुर एवं छिंदवाड़ा में 4-4, मुरैना में 2 तथा कटनी, भिंड और रायसेन में 1-1 आंगनवाड़ी भवन स्वीकृत किए गए हैं। प्रत्येक भवन पर लगभग 12 लाख रुपये का व्यय किया जा रहा है।

सामाजिक-आर्थिक विकास का मजबूत आधार

यह पहल जनजातीय बहुल इलाकों में नई उम्मीद और बदलाव की शुरुआत है। आंगनवाड़ी भवनों का निर्माण केवल भौतिक संरचना नहीं बल्कि सामाजिक-आर्थिक विकास का मजबूत आधार भी है। इनके माध्यम से जहां बच्चों को बेहतर पोषण और शिक्षा उपलब्ध होगी, वहीं महिलाओं के स्वास्थ्य एवं सशक्तिकरण में भी उल्लेखनीय सुधार आएगा।

प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय अभियान का यह चरण देश में जनजातीय कल्याण के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में देखा जा रहा है और मध्यप्रदेश ने इसे लागू करने में अग्रणी भूमिका निभाई है।

 

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