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देश

मुरली मनोहर जोशी का बड़ा बयान, RSS मंच से उठाया आय असमानता का मुद्दा

 नई दिल्ली

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा नई दिल्ली में संघ की शताब्दी वर्षगांठ पर आयोजित तीन दिवसीय व्याख्यानमाला से ठीक एक हफ्ते पहले संघ के आर्थिक क्षेत्र में काम करने वाले छह संगठनों के करीब 80 प्रतिनिधियों की बंद कमरे में विशेष बैठक हुई। इसमें वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व पार्टी अध्यक्ष डॉ. मुरली मनोहर जोशी मुख्य वक्ता रहे। जोशी ने इस दौरान करीब 70 स्लाइड्स दिखाईं और कहा कि केवल आर्थिक विकास को ही राष्ट्रीय लक्ष्य मानना उचित नहीं है।

 एक रिपोर्ट में कहा है कि उन्होंने आय में असमानता, भारत की कम प्रति व्यक्ति जीडीपी और सामाजिक संकटों का उल्लेख करते हुए डिग्रोथ की अवधारणा पेश की। इसका अर्थ है कि विकास की दौड़ से बाहर निकलकर सादगी, साझेदारी और स्थानीय संसाधनों के संरक्षण पर जोर देना।

आय असमानता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 2021 में भारत की कुल घरेलू संपत्ति का 65% केवल शीर्ष 10% लोगों के पास था। भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी मात्र 2,878 डॉलर थी, जबकि जापान की 33,955 डॉलर थी। कृषि व स्वदेशी उद्योगों पर फोकस करने की बात करते हुए उन्होंने कहा कि विदेशी सहयोग पर अधिक निर्भरता भारत के हित में नहीं है।

मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि 1.58 करोड़ बच्चे नशे के शिकार हो चुके हैं। दिल्ली की झुग्गियों में रहने वाले करीब एक-तिहाई बच्चे नशे और शराब में फंस चुके हैं। उन्होंने आत्महत्या की बढ़ती दर पर भी चिंता जताई। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आत्महत्या करने वालों की संख्या 2018 में 1.34 लाख से बढ़कर 2022 में 1.70 लाख तक पहुंच चुके हैं। 2019-21 के बीच 35,950 छात्रों ने जान दी है।

अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री रहे मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि उच्च शिक्षा में सकल नामांकन दर केवल 32.7%, जबकि जापान में 64.6% और पोलैंड में 75.3% है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की 43.5% आबादी अब भी कृषि पर निर्भर, जबकि जापान में यह मात्र 3% है।

मुरली मनोहर जोशी ने चेतावनी दी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सामाजिक असमानताओं को और गहरा कर सकता है। उन्होंने हालिया प्राकृतिक आपदाओं और हिमालयी सड़कों के चौड़ीकरण को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि भारत “क्लाइमेट इमरजेंसी” की ओर बढ़ रहा है।

मोहन भागवत ने मुरली मनोहर जोशी की इस चिंता पर कहा, “जोशी जी ने सब कुछ कह दिया है।” संगठन के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले ने हालांकि स्पष्ट किया कि बैठक का उद्देश्य सरकार की नीतियों की आलोचना करना नहीं, बल्कि सिद्धांत और व्यावहारिक कदमों को जोड़कर भविष्य की कार्ययोजना बनाना है।

इस बैठक में भारतीय मजदूर संघ, भारतीय किसान संघ, सहकार भारती, ग्राहक पंचायत, स्वदेशी जागरण मंच और लघु उद्योग भारती के प्रतिनिधि शामिल हुए। साथ ही संघ विचारक एस गुरुमूर्ति, भाजपा महासचिव बीएल संतोष, पीएम आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजय सान्याल और यूपी के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना भी विशेष आमंत्रित थे।

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