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मध्यप्रदेश

उपार्जन व्यवस्था में सुधार: अब गोदामों में ही बनेगा उपार्जन केन्द्र, सरकार की नई पहल

गो-डॉउन में ही उपार्जन केन्द्र बनाने को दी जायेगी प्राथमिकता : अपर मुख्य सचिव खाद्य श्रीमती शमी

उपार्जन व्यवस्था में सुधार: अब गोदामों में ही बनेगा उपार्जन केन्द्र, सरकार की नई पहल

खाद्य विभाग का फैसला: गो-डॉउन में ही उपार्जन केन्द्र बनाने को मिलेगी प्राथमिकता

प्रोक्योरमेंट रिफार्म पर हुई स्टेट लेवल वर्कशॉप

भोपाल
गो-डॉउन में ही उपार्जन केन्द्र बनाने को प्राथमिकता दी जायेगी। जिससे उपार्जित अनाज के परिवहन में लगने वाला खर्च बच सके। अपर मुख्य सचिव खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण श्रीमती रश्मि अरूण शमी ने यह बात प्रोक्योरमेंट रिफार्म पर हुई स्टेट लेवल वर्कशॉप में कही। वर्कशॉप कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में संपन्न हुई। वर्कशॉप में भारत सरकार के अपर मुख्य सचिव एवं वित्तीय सलाहकार खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति संजीव शंकर, भारत सरकार में संयुक्त सचिव सुसी. शिखा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

अपर मुख्य सचिव श्रीमती शमी ने कहा कि गत रबी सीजन में लगभग 9 लाख किसानों से 77 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं का उपार्जन किया गया और लगभग 20 हजार करोड़ रूपये किसानों के खाते में अंतरित किये गये। गेहूं के उपार्जन में राज्य सरकार द्वारा 175 रूपये प्रति क्विंटल का बोनस दिया गया है। इसी तरह लगभग 6 लाख 50 हजार किसानों से 43.5 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई है। उपार्जन के लिये किसानों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में आधार नम्बर को भी जोड़ा गया है। उपार्जन केन्द्रों से ही मिलर्स को धान देने का प्रावधान किया गया है। उपार्जन केन्द्रों पर किसानों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। पीडीएस दुकानों में अनाज ले जाने वाले वाहनों की सघन मॉनिटरिंग की जाती है। प्रदेश में उचित मूल्य की दुकानों को जन पोषण केन्द्र के रूप में विकसित करने की भी योजना है। वर्तमान में इंदौर में यह कार्य शुरू कर दिया गया है। उचित मूल्य की दुकानों से खाद्यान्न लेने वाले उपभोक्ताओं की ई-केवायसी कराई जा रही है। ई-केवायसी के बाद अपात्र लोगों को बाहर किया गया है और लगभग 5 लाख 70 हजार नये उपभोक्ताओं को सूची में जोड़ा गया है।

वर्कशॉप में भारत सरकार के अपर सचिव एवं वित्तीय सलाहकार खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति संजीव शंकर ने आयोजन के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वर्कशॉप में उपस्थित अधिकारी अपने सुझाव जरूर दें। शंकर ने कहा कि उपार्जन की प्रक्रिया को और बेहतर कैसे बनाया जा सकता है, इस संबंध में गहन विमर्श किया जायेगा। भारत सरकार की संयुक्त सचिव पॉलिसी एण्ड एफसीआई सुसी. शिखा ने बिलिंग प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सब्सिडी की जानकारी प्रतिमाह भेजें। उन्होंने मध्यप्रदेश की गुड प्रेक्टिसेस के बारे में भी जानकरी दी और विभाग की कार्यप्रणाली की सराहना की।

जनरल मैनेजर एफसीआई विशेष गढ़पाले ने प्रोक्योरमेंट सेंटर सेल्फ असेसमेंट प्रोग्राम (पीसीएसएपी) के बारे में जानकारी दी। आयुक्त खाद्य कर्मवीर शर्मा ने गेहूं और धान के उपार्जन के संबंध में बनाये गये एक्शन प्लान की जानकारी दी। उन्होंने उपार्जन प्रक्रिया के सरलीकरण के संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव भी दिये। एमडी नागरिक आपूर्ति निगम अनुराग वर्मा ने उपार्जन और भंडारण की प्रक्रिया में आने वाली समस्याओं से अवगत कराया। अश्विनी गुप्ता ने फिजिकल वेरिफिकेशन की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। अन्य उपस्थित अधिकारियों ने भी महत्वपूर्ण सुझाव दिये।

 

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