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विदेश

बारिश बनी आफ़त: पाकिस्तान के कई हिस्सों में बाढ़ का ख़तरा मंडराया

नई दिल्ली
पाकिस्तान में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने कई क्षेत्रों में बाढ़ की चेतावनी जारी की है। ये चेतावनी ऐसे समय में जारी की गई है जब 5 से 8 अगस्त तक पाकिस्तान के ऊपरी और मध्य भागों में तीव्र मानसून के प्रभाव की आशंका है। इसके अलावा उत्तरी पाकिस्तान पर मानसूनी धाराओं और पश्चिमी द्रोणिका के प्रभाव से भारी बारिश होने की संभावना है।

भारी बारिश के कारण पाकिस्तान में बाढ़ का अलर्ट
भारी बारिश की वजह से सिंधु, चिनाब और रावी सहित पाकिस्तान की सभी प्रमुख नदियों में जल स्तर बढ़ने की संभावना है, जबकि रावी और चिनाब की सहायक नदियों में बाढ़ की संभावना जताई गई है। दूसरी तरफ, तरबेला, गुड्डू और सुक्कुर बैराज में बाढ़ फिलहाल निम्न स्तर पर है, लेकिन लगातार बारिश चश्मा और ताउंसा को भी निम्न बाढ़ स्तर की ओर धकेल सकती है। इसके अलावा, नौशेरा में काबुल नदी, स्वात नदी और पंजकोरा और उनसे जुड़ी धाराओं और नालों में लगातार बारिश के कारण जल स्तर में वृद्धि देखी जा सकती है।

बारिश से बढ़ सकता है बाधों का जल स्तर
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में, हुंजा, शिगर और घांचे जिलों में जलधाराओं के नेटवर्क में पानी का प्रवाह सहायक नदियों के साथ संभावित बाढ़ का कारण बन सकता है। साथ ही बांधों में मौजूदा भंडारण से संकेत मिलता है कि खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में तरबेला जलाशय 94% पर है और भारी बारिश के कारण इसका जल स्तर बढ़ने की संभावना है।

एनडीएमए लोगों के सतर्क रहने की चेतावनी दी
एनडीएमए ने नदियों और नालों के पास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने के लिए कहा है, क्योंकि रात में भारी बारिश के कारण अचानक जल स्तर बढ़ सकता है।

बारिश के कारण अबतक कितना नुकसान?
एनडीएमए की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, 26 जून से अब तक मूसलाधार मानसूनी बारिश के कारण 140 बच्चों सहित कम से कम 299 लोगों की जान चली गई और 715 अन्य घायल हो गए। रिपोर्ट की मानें तो बारिश के कारण होने वाली घटनाओं में 715 लोग घायल हुए हैं, जिनमें 239 बच्चे, 204 महिलाएं और 272 पुरुष शामिल हैं।

अबतक, अचानक आई बाढ़ और भारी बारिश के कारण कुल 1,676 घर क्षतिग्रस्त हो गए और 428 जानवर मारे गए। इस बाढ़ के कारण कई क्षेत्रों में व्यापक विनाश हुआ है और स्थानीय समुदायों को भारी नुकसान पहुंचा है।

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