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मध्यप्रदेश

नागपंचमी पर नागचंद्रेश्वर पहुंचे मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, बोले- हर साल आता हूं इनके द्वार

उज्जैन,

 मध्य प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने नागपंचमी पर उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर परिसर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर में दर्शन पूजन किया। यह मंदिर साल में केवल एक दिन, नागपंचमी पर ही खुलता है। विजयवर्गीय रात 2 बजे मंदिर पहुंचे और भगवान नागचंद्रेश्वर के साथ ही सिद्धेश्वर महादेव का पूजन-अर्चन कर आशीर्वाद लिया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी दर्शन के लिए पहुंचे।

कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, “मैं हर साल नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए उज्जैन आता हूं। इस बार प्रशासन ने व्यवस्था को बहुत अच्छा बनाया है, लेकिन भविष्य में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए और बेहतर योजना बनाने की जरूरत है।” उन्होंने प्रशासन की तैयारियों की सराहना करते हुए भक्तों की भीड़ को देखते हुए और सुगम व्यवस्था की बात कही।

मंत्री ने एक्स पोस्ट के जरिए देशवासियों को शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने दर्शन की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, ऊं भुजंगेशाह विद्महे, सर्पराजाय धीमहि, तन्नो नागः प्रचोदयात्। सभी देशवासियों को नागपंचमी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।

वहीं, महानिर्वाणी पंचायती अखाड़े के महामंडलेश्वर और महाकालेश्वर मंदिर के महंत विनीत गिरी महाराज ने बताया, “हमारे पावन महाकाल मंदिर में तीसरी मंजिल पर भगवान नागचंद्रेश्वर का विग्रह स्थापित है, जिनका कपाट साल में केवल एक दिन नागपंचमी पर खुलता है। परंपरा के अनुसार, 28 जुलाई की मध्यरात्रि को मंदिर के पट खोले गए। पूजन की शुरुआत भगवान गणेश से हुई, फिर माता गजलक्ष्मी, भगवान विष्णु और शंकरासुर का पूजन हुआ। इसके बाद नागचंद्रेश्वर का विधिवत अभिषेक और पूजन किया गया।”

उन्होंने कहा कि पूजन के बाद रात 1 बजे से श्रद्धालुओं के लिए दर्शन शुरू हुए, जो सुगमता और व्यवस्था से चल रहा है। महंत विनीत गिरी ने प्रार्थना की, “भगवान नागचंद्रेश्वर से यही मांग है कि देश में शांति, खुशहाली और स्वास्थ्य बना रहे। सभी श्रद्धालु प्रसन्न और स्वस्थ रहें।”

नागचंद्रेश्वर मंदिर, महाकालेश्वर मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थित है, जहां 11वीं शताब्दी की दुर्लभ प्रतिमा स्थापित है। इस प्रतिमा में भगवान शिव, पार्वती, गणेश, कार्तिकेय, सूर्य-चंद्रमा और सात फनों वाले नाग के साथ विराजमान हैं। मान्यता है कि इनके दर्शन से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है। मंदिर के गर्भगृह में सिद्धेश्वर महादेव भी विराजमान हैं, जिनके दर्शन भी इस दिन किए जाते हैं। प्रशासन ने अनुमान लगाया है कि इस बार करीब 10 लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच सकते हैं।

 

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