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मध्यप्रदेश

7 करोड़ दिव्यांगों की आवाज बने पंकज मारु, रेलवे टिकट में अपमानजनक शब्द हटाने में पाई सफलता

उज्जैन 

भारतीय रेलवे ने फैसला किया है कि अब वह मानसिक रूप से दिव्यांगों के लिए जारी करने वाले रियायती पास पर 'मानसिक विकृत' शब्द की जगह 'बौद्धिक दिव्यांग' शब्द का इस्तेमाल करेगा। रेलवे ने 1 जून 2025 से इस फैसले को अमल में लाना शुरू कर दिया है।

रेलवे रियायत प्रमाण पत्र में 'मानसिक रूप से विकलांग' शब्द को 'बौद्धिक विकलांगता' में बदलकर अपनी बेटी की गरिमा बचाने के लिए एक पिता को साढ़े पांच साल तक संघर्ष करना पड़ा. जानकारी के मुताबिक डॉ पंकज मारू की बेटी बौद्धिक रूप से विकलांग थी.

ईटीवी भारत से बात करते हुए 65 प्रतिशत बौद्धिक रूप से विकलांग बेटी के पिता डॉ पंकज मारू ने कहा, "हमें तीन सितंबर 2019 को मेरी बेटी का रेलवे रियायत प्रमाण पत्र मिला, जिसमें 'मानसिक रूप से विकलांग' शब्द हमारे लिए बेहद आपत्तिजनक था, जिसके बाद मैंने रेलवे रियायत कार्ड में इस शब्द को बदलने के लिए पश्चिमी क्षेत्र, रेलवे बोर्ड और संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन रेलवे उसी शब्द को जारी रखने पर अड़ा रहा."

अधिकारियों को शिकायत की लेकिन कुछ नहीं हुआ डॉ. पंकज मारु बताते हैं कि साल 2019 में उन्होंने अपनी बेटी सोनू के लिए रेलवे से रियायती पास बनवाया था। इसमें विकलांगता की प्रकृति वाले कॉलम में लिखा था मानसिक विकृति। अपनी बेटी के लिए ये शब्द मुझे अपमानजनक लगा। मेरी बेटी 65 फीसदी मानसिक दिव्यांग है, न कि विकृत।

मैंने रियायती पास में इस शब्द को बदलवाने के लिए पश्चिम रेलवे, रेलवे बोर्ड और संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया। कई बार रेलवे के चेयरमैन और डीआरएम को पत्र लिखे। अधिकारियों की तरफ से मुझे कोई जवाब नहीं मिला।

उनकी सफलता से ऐसे एक करोड़ से अधिक दिव्यांगजनों के लिए सम्मानपूर्वक जीवन जीने की आशा जगी है, क्योंकि दिव्यांगजनों के लिए मुख्य आयुक्त न्यायालय (CCPD) ने रेलवे बोर्ड को निर्देश जारी किए हैं.

डॉ. मारु ने मामले की खुद पैरवी की याचिका दायर होने के तीन दिन बाद यानी 15 जुलाई 2024 को कोर्ट ने रेलवे को एक नोटिस जारी किया और पूछा कि क्या इस शब्द को बदला जा सकता है। 4 सितंबर 2024 को रेलवे ने इस नोटिस का जवाब देते हुए लिखा कि इस शब्द को नहीं बदला जा सकता। इसके बाद कोर्ट ने मारु से पूछा कि वे अब क्या करना चाहते हैं? तो मारु ने 25 सितंबर को दोबारा सुनवाई के लिए कोर्ट में अर्जी लगाई।

जब इस मामले की सुनवाई हुई तो डॉ. मारु ने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का हवाला दिया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि दिव्यांग जन अधिकार अधिनियम, 2016 (Rights of Persons with Disabilities Act, 2016) की धारा 92(क) [Section 92(a)] में यह प्रावधान किया गया है,

CCPD का आदेश
CCPD आदेश में कहा गया है कि रेलवे बोर्ड ने 14 जुलाई 2025 को ईमेल के माध्यम से कोर्ट को सूचित किया कि 9 मई 2025 को एक निर्देश पहले ही जारी किया जा चुका है. रेलवे ने इसकी एक कॉपी अटैच की है, जिसमें कहा गया है कि रेल मंत्रालय ने मानसिक रूप से मंद व्यक्ति जो बिना किसी अनुरक्षक के यात्रा नहीं कर सकते शब्द को बौद्धिक रूप से अक्षम व्यक्ति जो बिना किसी अनुरक्षक के यात्रा नहीं कर सकते से बदलने का निर्णय लिया है, ताकि अधिक सम्मानजनक और उपयुक्त भाषा अपनाई जा सके. यह नियम 1 जून, 2025 से लागू किया गया है.

दिव्यांगजनों को सम्मान दिलाने में मदद करें निर्देश
परिवार एनसीपीओ के राष्ट्रीय अध्यक्षडॉ पंकज मारू ने कहा, "ये निर्देश न केवल हमें, बल्कि देश भर के सभी दिव्यांगजनों को सम्मान दिलाने में मदद करेंगे. UNCRPD/दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 (जिसे आगे अधिनियम कहा जाएगा) दिव्यांगजनों को सशक्त बनाने और उन्हें सम्मान और गरिमा के साथ जीवन जीने के लिए प्रेरित करता है. इसके बावजूद, रेलवे 'मानसिक रूप से विकृत' शब्द का प्रयोग कर रहा है, यह शब्द दिव्यांगजनों के सम्मान और गरिमा को नहीं दर्शाता."

इस संबंध में सर्कुलर जारी
इस साल 9 मई को रेलवे बोर्ड ने इस शब्द को बदलने का निर्णय लिया, जिसके बाद उसने "मानसिक रूप से विकलांग व्यक्ति जो बिना किसी अनुरक्षक के यात्रा नहीं कर सकते" शब्द के स्थान पर "बौद्धिक रूप से विकलांग व्यक्ति जो बिना किसी अनुरक्षक के यात्रा नहीं कर सकते" शब्द रखने के संबंध में एक सर्कुलर जारी किया.

सर्कुलर के अनुसार 1 जून, 2025 से पहले पुराने प्रोफार्मा में जारी किया गया प्रमाण पत्र वैधता अवधि समाप्त होने तक वैध रहेगा, और रेलवे दिव्यांगजन पहचान पत्र, ऑनलाइन/ऑफलाइन आवेदन पत्रों में भी आवश्यक परिवर्तन सुनिश्चित किए जाएंगे. इसमें आगे कहा गया है, "असुविधा से बचने के लिए क्षेत्रीय रेलवे संशोधित प्रोफार्मा प्रिंटिड कर सभी स्थानों/स्टेशनों पर उपलब्ध करा सकते हैंॉ। सभी संबंधितों को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे."

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