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राजनीति

चेतावनी मिलते ही धनखड़ का इस्तीफा, क्या किसी बड़े खुलासे से पहले उठाया गया कदम?

नई दिल्ली

जगदीप धनखड़ को इस्तीफा दिए 4 दिन हो गए, मगर हलचल कम नहीं हुई है. जगदीप धनखड़ ने सेहत का हवाला देकर सोमवार यानी 21 जुलाई को इस्तीफा दिया. मगर उनके इस्तीफे की कहानी अब सामने आने लगी हैं. ऐसा लग रहा है कि सेहत बहाना था. उन्हें फ्यूचर की भनक लग गई थी. इसलिए आनन-फानन में मानसून सत्र के पहले दिन ही रात को अपना इस्तीफा सौंपा. जी हां, सूत्रों का दावा है कि राज्यसभा में खुद जगदीप धनखड़ को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी थी.

 जगदीप धनखड़ के पास इस्तीफा देने के अलावा कोई विकल्प नहीं था क्योंकि भाजपा और उसके सहयोगी उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे थे. जगदीप धनखड़ के खिलाफ अगले ही दिन अविश्वास प्रस्ताव आना था. यह फैसला तब हुआ जब सरकार को पता चला कि उन्होंने जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ 63 विपक्षी सांसदों की ओर से साइन किए महाभियोग वाले नोटिस को स्वीकार कर लिया.

अब क्या है स्थिति

इधर, सरकार नए उपराष्ट्रपति के उम्मीदवार की तलाश तेज कर चुकी है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश यात्रा से लौटने के बाद नाम की घोषणा की जा सकती है। धनखड़ के लिए सरकारी अधिकारी टाइप 8 बंगले की तलाश कर रहे हैं। माना जा रहा है कि उनका अचानक इस्तीफा इस बात के संकेत देता है कि उनके पास कोई और विकल्प नहीं बचा था, क्योंकि सरकार जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ लाए गए विपक्ष के प्रस्ताव को स्वीकारने के अगले दिन अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही थी।

अगर ऐसा होता तो धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आसानी से पास हो जता, क्योंकि NDA के पास जरूरी आंकड़े हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, सूत्र बताते हैं कि राज्यसभा सचिवालय के एक पदाधिकारी के जरिए सोमवार को धनखड़ को संदेश पहुंचाया गया था कि 'तुरंत पद छोड़ दें या अगले दिन अविश्वास प्रस्ताव का सामना करें।' इसे चुनौती देने के बजाए धनखड़ राष्ट्रपति भवन पहुंचे और इस्तीफा सौंप दिया।

रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस वर्मा के खिलाफ विपक्ष का पत्र स्वीकार करने के बाद धनखड़ से सरकार के वरिष्ठ पदाधिकारी संपर्क नहीं कर पा रहे थे, जिसके चलते उन्होंने सोमवार शाम हुई BAC यानी बिजनेस एडवाइजरी मीटिंग से दूरी बना ली।
विपक्ष से कौन होगा उम्मीदवार

पीटीआई भाषा के अनुसार, सूत्र बताते हैं कि विपक्षी INDIA गठबंधन उपराष्ट्रपति के चुनाव में साझा उम्मीदवार उतार सकता है, हालांकि सभी घटक दलों से विचार-विमर्श के बाद ही इस पर अंतिम निर्णय किया जाएगा। विपक्षी गठबंधन के एक वरिष्ठ नेता ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर यह भावना है कि इसमें उम्मीदवार उतारा जाए, चाहे नतीजे कुछ भी हों क्योंकि ऐसा करने से राजनीतिक संदेश जाएगा।’’

जगदीप धनखड़ ने बीते सोमवार शाम स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था, हालांकि उनके इस्तीफे के पीछे के कारणों को लेकर लगातार अटकलों का दौर जारी है।

क्या था अंदरखाने वाला प्लान

सूत्रों की मानें तो जगदीप धनखड़ का कदम सरकार के लिए चौंकाने वाला था. जगदीप धनखड़ ने जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ विपक्ष के नोटिस स्वीकार किया था. जबकि सरकार लोकसभा में प्रस्ताव लाना चाहती थी. उसके पास सभी दलों के सदस्यों के हस्ताक्षर भी थे. सरकार के कई मंत्री इसी बात से परेशान और नाराज थे. जगदीप धनखड़ के इस कदम से एनडीए सांसदों और मंत्रियों को ऐसा आघात लगा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संसद कार्यालय में सांसदों के हस्ताक्षर एकत्र करने के लिए दौड़ लगाई ताकि अगले दिन राज्यसभा में जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सके.

धनखड़ को मिली थी सीक्रेट सूचना

जगदीप धनखड़ को इस बात की भनक लग गई थी कि उपराष्ट्रपति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव साधारण बहुमत से पारित किया जा सकता है और एनडीए के पास आवश्यक संख्या से अधिक है. सूत्रों ने दावा दिया कि सोमवार को राज्यसभा सचिवालय के एक अधिकारी ने जगदीप धनखड़ को संदेश दिया कि या तो तुरंत इस्तीफा दें वरना अगले दिन अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना होगा. ऐसी स्थिति से बचने के लिए ही उसी रात को आनन-फानन में जगदीप धनखड़ राष्ट्रपति भवन पहुंचे. उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा सौंपा. इसके बाद की तस्वीर पूरी दुनिया को पता है.

25 मिनट तक किया इंतजार

दरअसल, जगदीप धनखड़ ने अपने इस्तीफे में सेहत का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि वह अपनी सेहत को अब प्राथमिकता देना चाहते हैं. मगर कांग्रेस को शुरू से ही दाल में काला नजर आ रहा था. अब तस्वीर साफ हो गई है. सूत्रों का कहना है कि जगदीप धनखड़ को करीब 25 मिनट तक राष्ट्रपति भवन में इंतजार करना पड़ा था. उनके लिए विदाई भाषण का भी आयोजन नहीं किया गया. कांग्रेस ने सरकार से उनके इस्तीफे की वजह की मांग की.

मंत्रियों संग अच्छा नहीं था धनखड़ का व्यवहार

सूत्रों का कहना है कि जगदीप धनखड़ का केंद्रीय मंत्रियों संग व्यवहार अच्छा नहीं था. अक्सर वह उन लोगों के साथ कठोरता से पेश आते थे. बैठकों के दौरान डांट-डपट देते थे और अपमानित करते थे. इससे सीनियर मंत्री सब नाराज थे. शिवराज सिंह चौहान को तो जगदीप धनखड़ ने सार्वजनिक तौर पर अपमानित किया था. सूत्रों का यह भी कहना है कि जगदीप धनखड़ विपक्ष पर खूब बरसते थे, मगर विपक्ष की ओर से लाए गए महाभियोग वाले प्रस्ताव के बाद उनका विपक्ष के प्रति रवैया थोड़ा बदला था.

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