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उत्तर प्रदेश

सरकारी स्कूलों में बड़ा बदलाव, यूपी में अब नहीं दिखेगा Blackboard – जानें क्या है नई व्यवस्था

लखनऊ
अब परिषदीय विद्यालयों की कक्षाओं में ब्लैकबोर्ड नहीं दिखेंगे। उनकी जगह हर कमरे में गुणवत्ता वाले ग्रीन और व्हाइट बोर्ड लगाए जाएंगे। यह बदलाव सिर्फ पढ़ाई के माध्यम को रंगीन और साफ नहीं बनाएगा, बल्कि सरकारी स्कूलों की पुरानी तस्वीर भी बदलेगा।

प्रदेश के सभी प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों में इस बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। हालांकि कुछ विद्यालयों में ब्लैकबोर्ड को पहले ही हटाया जा चुका है। अब इसे हर विद्यालय में बदला जाएगा। दरअसल, वर्ष 2025-26 के लिए प्रदेश के सभी परिषदीय स्कूलों को ‘कंपोजिट स्कूल ग्रांट’ के तहत 246 करोड़ 51 लाख 75 हजार रुपये की पहली किस्त जारी कर दी गई है।

यह पूरी राशि सभी जिलों के लिए जारी हुई है। बेसिक शिक्षा अधिकारियों को इससे स्कूलों में जरूरी बुनियादी सुधार कराना है। स्कूलों को मिलने वाली इस ग्रांट का हिसाब अब सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहेगा।

हर विद्यालय की दीवार पर वर्षवार और मदवार तरीके से पेंट कर यह बताया जाएगा कि कितना पैसा आया और कहां खर्च हुआ। यानी गांव के लोगों को भी यह आसानी से पता चलेगा कि स्कूल में क्या-क्या काम हुआ है। शिक्षक इसे पारदर्शिता और जनजागरूकता की दिशा में अहम कदम मान रहे हैं। ग्रांट का कम से कम 10 प्रतिशत हिस्सा स्कूलों की साफ-सफाई पर खर्च करना होगा।

शिक्षकों को मिले टैबलेट के लिए सिम और इंटरनेट खर्च अब ग्रांट से ही जिला स्तर पर चुकाया जाएगा। जिन स्कूलों में 250 से अधिक बच्चे पढ़ते हैं, वहां आरओ वाटर कूलर के लिए 75 हजार से 1 लाख रुपये तक की राशि अलग से दी जाएगी। हर स्कूल में मेडिकल किट रखना भी अनिवार्य होगा।

महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने मंगलवार को सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को इस रकम के सही उपयोग के लिए विस्तृत निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि स्कूलों की दीवारों पर खर्च का ब्यौरा पेंट कराना अनिवार्य है ताकि पारदर्शिता बनी रहे और समुदाय की भागीदारी बढ़े।

कुछ शिक्षकों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि जब स्कूल के बाहर ही पेंटिंग के जरिये पता चल जाएगा कि कितना पैसा आया और कैसे खर्च हुआ, तो गांव के लोगों में स्कूल के प्रति भरोसा भी बढ़ेगा और जागरूकता भी।

 

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