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देश

अनंतनाग अदालत ने 70 वर्षीय हिंदू बुजुर्ग पर्यटक से दुष्कर्म के आरोपी की जमानत याचिका की खारिज, कोर्ट बोला – ‘ये घटना बीमार मानसिकता का प्रतिबिंब’

 पहलगाम

कश्मीरी पंडितों के सबसे बड़े संगठन पनुन कश्मीर ने पहलगाम में बुजुर्ग हिंदू महिला के साथ क्रूर रेप को गहरी हिंदू घृणा की अभिव्यक्ति करार दिया है. पनुन कश्मीर के अध्यक्ष डॉ. अजय च्रुंगू ने पहलगाम के होटल में 70 वर्षीय हिंदू बुजुर्ग के साथ हुए क्रूर रेप की कड़ी निंदा की है और इसे कश्मीर में हिंदुओं के खिलाफ सदियों पुरानी घृणा की भयावह अभिव्यक्ति बताया है.

'अमानवीय व्यवहार की भयावह याद दिलाता है'

पनुन कश्मीर युवा टीम को संबोधित करते हुए डॉ. च्रुंगू ने कहा कि यह जघन्य अपराध कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि हिंदुओं के साथ किए जा रहे अमानवीय व्यवहार की भयावह याद दिलाता है, जो घाटी में इस्लामी मानसिकता का मूल है. उन्होंने कहा, "यह कोई आकस्मिक हिंसा का मामला नहीं है. एक हिंदू दादी – जो मासूमियत और गरिमा की प्रतीक है, के साथ बर्बरता से दुर्व्यवहार किया गया. यह कृत्य उस नरसंहारी माहौल से अलग नहीं है, जिसके बारे में हम दशकों से दुनिया को चेतावनी दे रहे हैं."अदालत ने जमानत याचिका खारिज करते हुए समाज के नैतिक ताने-बाने पर तीखी टिप्पणी की और कहा कि यह घटना समाज में व्याप्त "नैतिक पतन और विकृत मानसिकता" का प्रतिबिंब है। जज ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा, "मुझे याचिका में दिए गए किसी भी आधार और आरोपी के वकील द्वारा दी गई दलील में ऐसा कुछ भी नहीं लगता जो इस अदालत के न्यायिक विवेक को प्रभावित करता हो।" बता दें कि कथित घटना दक्षिण कश्मीर जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पहलगाम के एक होटल में हुई, जहां महिला अप्रैल में अपने परिवार के साथ रह रही थी। 

बुजुर्ग के साथ बर्बरता
अपने बेटे के परिवार के साथ घूमने आई बुजुर्ग महिला अपने होटल के कमरे में अकेली थी, जब आरोपी जुबैर अहमद भट ने अवैध रूप से प्रवेश किया, उसे कंबल से दबा दिया, उसके साथरेप किया और खिड़की से भाग गया. चोटें इतनी गंभीर थीं कि वह कई दिनों तक बिस्तर पर पड़ी रही और दर्द में रही, जब तक कि पुलिस ने उसकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं की. आरोपी की पहचान कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन डॉ. च्रुंगू ने बताया कि गिरफ्तारी से उस विचारधारा को संबोधित नहीं किया जाता है जो इस तरह की बर्बरता को बढ़ावा देती है. 

नेताओं पर साधा निशाना

राजनीतिक नेताओं, नागरिक समाज और कश्मीरी बहुलवाद के तथाकथित चैंपियनों की चुप्पी पर प्रहार करते हुए उन्होंने पूछा, “नकली आख्यानों पर गुस्से में उठने वाली आवाज़ें कहां हैं? अब कैंडल मार्च कहां हैं? एक हिंदू दादी का दर्द धर्मनिरपेक्ष प्रतिष्ठान की सामूहिक अंतरात्मा को क्यों नहीं झकझोरता?” उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक हिंदू घृणा की वैचारिक संरचना को नष्ट नहीं किया जाता, तब तक ऐसी घटनाएं फिर से होती रहेंगी. उन्होंने कहा, “इस्लामी बहुसंख्यकवाद को सामान्य बनाने वाले लोग एक ऐसे पारिस्थितिकी तंत्र को पोषित करने के लिए जिम्मेदार हैं, जहां इस तरह की बर्बरता एक अपवाद नहीं बल्कि एक परिणाम है.” 

डॉ. च्रुंगू ने पनुन कश्मीर युवा के स्वयंसेवकों से सतर्क और साहसी बने रहने का आह्वान किया. “हमें याद रखना चाहिए कि यह हिंदू दादी अपने पूर्वजों की धरती पर नहीं चल रही थी, वह केवल दौरा कर रही थी. और फिर भी उसका शिकार किया गया. यह शत्रुता का वह स्तर है जिसका हम सामना कर रहे हैं. हमें न केवल इस कृत्य का बल्कि इसके पीछे की पूरी नरसंहार चेतना का विरोध करना चाहिए.” उन्होंने उपस्थित लोगों को याद दिलाया कि इस तरह के अपराध कश्मीर में हिंदू नरसंहार की ऐतिहासिक परियोजना से अलग नहीं हैं. 

अनुकरणीय सजा की मांग

उन्होंने आरोपियों के लिए अनुकरणीय सजा की मांग की करते हुए कहा कि इस बात की पूरी सामाजिक-राजनीतिक जांच की जाए कि इस तरह की नफरत कैसे अनियंत्रित रूप से पनप रही है. “न्याय शीघ्र और बिना किसी समझौते के होना चाहिए, लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि दुनिया को आखिरकार यह स्वीकार करना चाहिए कि कश्मीर में हिंदुओं की पीड़ा कोई फ़ुटनोट नहीं है, यह मुख्य पाठ है”

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