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मध्यप्रदेश

माननीय प्रधानमंत्री 22 मई को देशभर के 103 पुनर्विकसित रेलवे स्टेशनों का करेंगे उद्घाटन

भोपाल

भारतीय रेल को देश की जीवन रेखा माना जाता है, और रेलवे स्टेशन किसी भी शहर की पहचान का केंद्र होते हैं। अधिकतर स्टेशन शहर के बीचोंबीच स्थित होते हैं, जहां आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियां सजीव रहती हैं। इसलिए स्टेशनों का विकास केवल यात्री सुविधाओं तक सीमित नहीं रहकर, उन्हें स्थानीय विरासत और पहचान से जोड़ना ज़रूरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने 'अमृत काल' में तेज़ विकास की दिशा पकड़ी है। उनकी प्रेरणा से भारतीय रेलवे ने 1300 से अधिक स्टेशनों के कायाकल्प की शुरुआत की, और अब 103 स्टेशनों का उद्घाटन अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत होने जा रहा है। यह विकास की नई संस्कृति है, जिसमें शिलान्यास से उद्घाटन तक का सफर रिकॉर्ड समय में पूरा हो रहा है – और इसके लिए भारतीय रेलवे सराहना की पात्र है।

अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत विकसित किए जा रहे 1300 से अधिक स्टेशनों में जो 103 स्टेशन अभी बनकर तैयार हुए हैं, उनमें मध्य प्रदेश राज्य के छह स्टेशन – कटनी साउथ, श्रीधाम, नर्मदापुरम, शाजापुर, सिवनी और ओरछा शामिल हैं। 86 करोड़ से अधिक की लागत से विकसित इन स्टेशनों में सौंदर्य, सुविधा और संस्कृति तीनों का समन्वय है। इन स्टेशनों पर भव्य प्रवेश द्वार, आकर्षक फसाड, हाई मास्ट लाइटिंग, आधुनिक प्रतीक्षालय, टिकट काउंटर, मॉर्डन टॉयलेट और दिव्यांगजन के लिए सुगम रैंप जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। प्लेटफॉर्म पर शेल्टर, कोच इंडिकेशन सिस्टम और सूचना के लिए डिजिटल डिस्प्ले लगाए गए हैं। सभी सुविधाओं को  दिव्यांगजन अनुकूल बनाया गया है। वहीं, हर स्टेशन पर मध्य प्रदेश की लोक कला, संस्कृति और परंपराओं की झलक भी देखने को मिल रही है।

 नर्मदापुरम रेलवे स्टेशन:
नर्मदापुरम रेलवे स्टेशन, जिसे अब आधुनिक सुविधाओं और सांस्कृतिक पहचान के साथ नया स्वरूप प्रदान किया गया है, ₹26 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से पुनर्विकसित किया गया है। यह स्टेशन नर्मदा संस्कृति और स्थानीय लोककला पर आधारित थीम के तहत डिज़ाइन किया गया है, जिससे यह केवल एक यात्री ठहराव का स्थान नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक अनुभव बन गया है।
पुनर्विकास कार्यों में स्टेशन भवन का नवनिर्माण, भव्य प्रवेश द्वार, विकसित प्रतीक्षालय, पर्याप्त टिकटिंग काउंटर, दिव्यांगजन अनुकूल शौचालय एवं रैम्प, 12 मीटर चौड़ा नया फुट ओवर ब्रिज और दोनों ओर के हाई लेवल प्लेटफॉर्म पर कवर शेड्स शामिल हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए 3100 वर्गमीटर क्षेत्र में सर्कुलेटिंग एरिया का सौंदर्यीकरण किया गया है और 1000 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र में आधुनिक LED लाइटिंग की व्यवस्था की गई है। नर्मदापुरम स्टेशन अब सिर्फ एक रेलवे हब नहीं, बल्कि माँ नर्मदा की आध्यात्मिक धरा पर आधुनिक भारत की झलक प्रस्तुत करता है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस विकास से स्थानीय यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी और क्षेत्र में पर्यटन, आर्थिक गतिविधियों और सांस्कृतिक समृद्धि को भी गति मिलेगी।

शाजापुर रेलवे स्टेशन:
शाजापुर रेलवे स्टेशन अब आधुनिकता और परंपरा का संगम बन चुका है। 13 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से पुनर्विकसित इस स्टेशन में यात्रियों के लिए कई आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं। प्लेटफॉर्मों का उच्चीकरण, नया फुट ओवर ब्रिज, विस्तारित छायादार क्षेत्र, सौंदर्यीकृत सर्कुलेटिंग एरिया, नव निर्मित प्रवेश द्वार, सुव्यवस्थित टिकट काउंटर और आधुनिक प्रतीक्षालय अब इस स्टेशन की पहचान बन चुके हैं। स्टेशन भवन के फासाद को भी आकर्षक और सांस्कृतिक रूप में नया डिजाइन दिया गया है। यात्रियों की सुविधा के लिए पुरुष एवं महिला शौचालयों के साथ-साथ दिव्यांगजन अनुकूल विशेष सुविधाएं, VIP प्रतीक्षालय, द्वितीय श्रेणी वेटिंग हॉल और पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था की गई है। इससे न केवल यात्रा अनुभव बेहतर होगा, बल्कि लोगों को स्टेशन पर समय बिताना भी सुखद अनुभव प्रदान करेगा।
यात्रियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना है 140 वर्ग मीटर में फैला 'आर्ट एंड कल्चर ज़ोन', जो स्थानीय संस्कृति की झलक को जीवंत करता है। यह न केवल एक रेलवे स्टेशन का विकास है, बल्कि शाजापुर जिले की सांस्कृतिक, आर्थिक और सामाजिक पहचान को नया आयाम देने वाला कदम भी है।

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