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देश

सुप्रीम कोर्ट का पहलगाम में हुए आतंकी हमले की न्यायिक जांच से इनकार, बेंच ने याचिकाकर्ता को फटकारा

नई दिल्ली

पूरे देश में इस समय पहलगाम आतंकी हमले को लेकर आक्रोश है। इस बीच इस हमले की न्यायिक जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी, जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। न्यूज एजेंस पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका दायर करने वाले को फटकार लगाते हुए कहा कि न्यायाधीश आतंकवाद मामलों की जांच के विशेषज्ञ नहीं हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने जनहित याचिका दायर करने वालों को फटकार लगाते हुए सवाल किया कि क्या वे सुरक्षा बलों का मनोबल गिराना चाहते हैं? उन्हें ऐसे मुद्दों को न्यायिक क्षेत्र में नहीं लाने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि इस मुश्किल वक्त में देश का प्रत्येक नागरिक आतंकवाद से लड़ने के लिए एकजुट है।

 जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट पहलगाम आतंकवादी हमले की जांच के लिए न्यायिक आयोग के गठन की मांग को लेकर जनहित याचिका दायर करने वाले वकीलों की कड़ी आलोचना की। सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा, “जिम्मेदार बनो। देश के प्रति तुम्हारा कुछ कर्तव्य है। क्या यही तरीका है… प्लीज ऐसा मत करो। कब से कोई रिटायर्ड हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का जज ऐसे मुद्दों की जांच करने के लिए विशेषज्ञ बन गया है? हम कुछ भी नहीं सुन रहे हैं।”

जस्टिस सूर्यकांत ने आगे कहा, “यह वह महत्वपूर्ण समय है जब देश का हर नागरिक आतंकवाद से लड़ने के लिए हाथ मिला रहा है। ऐसी कोई प्रार्थना न करें जिससे किसी का मनोबल गिरे। मामले की संवेदनशीलता देखिए।”

'सुरक्षा बलों का मनोबल गिराना चाहते हैं'
पीठ ने कहा, "इस महत्वपूर्ण समय में देश के हर नागरिक ने आतंकवाद से लड़ने के लिए हाथ मिलाया है. क्या आप इस तरह की जनहित याचिका दायर करके सुरक्षा बलों का मनोबल गिराना चाहते हैं. इस तरह के मुद्दे को न्यायिक क्षेत्र में न लाएं."

याचिकाकर्ता फतेह कुमार साहू और अन्य को जनहित याचिका वापस लेने के लिए कहा गया. सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे इस मुद्दे की संवेदनशीलता को समझें और अदालत में ऐसी कोई अपील न करें, जिससे सुरक्षा बलों का मनोबल गिरे.

'आदेश पारित करने को न कहें'
पीठ ने याचिकाकर्ताओं में से एक से कहा, "आप रिटायर सुप्रीम कोर्ट के जज से जांच करने के लिए कह रहे हैं. वे जांच के विशेषज्ञ नहीं हैं, बल्कि वे केवल निर्णय दे सकते हैं और किसी मुद्दे पर निर्णय ले सकते हैं. हमें आदेश पारित करने के लिए न कहें. आप जहां जाना चाहते हैं, जाएं. बेहतर होगा कि आप वापस चले जाएं." जनहित याचिका में केंद्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन को पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग की गई थी.

पहलगाम हमले में 26 पर्यटकों की मौत
बता दें कि 22 अप्रैल को आतंकवादियों ने अनंतनाग जिले के पहलगाम के ऊपरी इलाकों में स्थित एक लोकप्रिय पर्यटक स्थल बैसरन में गोलीबारी की, जिसमें 26 लोग मारे गए. मरने वालों में अधिकतर दूसरे राज्यों से आए पर्यटक थे – इस घटना ने भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ा दिया है.

किसने दायर की थी पिटीशन जनहित याचिका कश्मीर के रहने वाले मोहम्मद जुनैद ने दायर की थी। याचिकाकर्ताओं में फतेश कुमार साहू और विकी कुमार का भी नाम है। याचिका में ये भी कहा गया है कि केंद्र और जम्मू-कश्मीर सरकार कश्मीर में पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।

पहलगाम में आतंकियों ने धर्म पूछकर गोली मारी थी

कश्मीर के पहलगाम स्थित बायसरन घाटी में 22 अप्रैल को आतंकी हमला हुआ था। इसमें 26 पर्यटक मारे गए थे। इसमें एक नेपाल का टूरिस्ट भी शामिल था। आतंकियों ने पर्यटकों का धर्म पूछकर गोली मारी थी। हमले की जिम्मेदारी पहले द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली थी, हालांकि बाद में इससे मुकर गया था।

पहलगाम हमला मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कर रही है। NIA ने मामले में 27 अप्रैल को जम्मू में केस दर्ज किया था।

चश्मदीद ने बताया था, 22 अप्रैल को क्या हुआ था…

आतंकी हमले में महाराष्ट्र के संतोष जगदाले भी मारे गए थे। जगदाले अपनी पत्नी और बेटी के साथ पहलगाम घूमने गए थे। साथ में एक महिला रिश्तेदार भी थी। आतंकियों ने तीनों महिलाओं को छोड़ दिया।

जगदाले की बेटी असावरी ने न्यूज एजेंसी PTI को बताया था- हम पांच लोगों का ग्रुप था। इसमें मेरे माता-पिता भी शामिल थे। हम पहलगाम के पास बैसरन घाटी में थे, तभी गोलीबारी की आवाज सुनी। देखा कि पुलिस के कपड़े पहने कुछ लोग गोलियां चला रहे हैं।

असावरी ने कहा, 'हम सभी पास के एक टेंट में छिप गए। 6-7 अन्य लोग भी आ गए। हम सभी गोलीबारी से बचने के लिए जमीन पर लेट गए, पहले लगा कि यह आतंकवादियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच कोई मुठभेड़ है।

तभी एक आतंकी हमारे टेंट में आ गया। उसने मेरे पिताजी को बाहर आने के लिए कहा। साथ ही पीएम मोदी के लिए कुछ गलत शब्दों का इस्तेमाल किया। फिर उन्होंने मेरे पिता से एक इस्लामी आयत (शायद कलमा) पढ़ने को कहा। जब वे नहीं पढ़ पाए तो उन्हें तीन गोलियां मार दीं, एक सिर पर, एक कान के पीछे और एक पीठ में। मेरे चाचा मेरे बगल में थे। आतंकवादियों ने उन्हें चार से पांच गोलियां मारीं।'

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