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मध्यप्रदेश

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सिध्दनाथ से त्रिवेणी तक 29 किमी के नए घाट तैयार होंगे, श्रद्धालुओं को 35 किमी के घाट उपलब्ध

उज्जैन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को  के पवित्र रामघाट पर जल गंगा संवर्धन अभियान में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने शिप्रा नदी में डुबकी लगाई और घाट की सफाई कर सेवा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। सीएम यादव ने कहा कि शिप्रा नदी के किनारे पंचकोशी परिक्रमा की एक पुरानी परंपरा रही है। हर साल हजारों-लाखों लोग यहां आकर परिक्रमा करते हैं।

घाट पर स्वच्छता का ध्यान रखा जाएगा

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने घाट की सफाई में भाग लिया और वे खुद घाट पर पड़े कचरे को हटाते नजर आए। उन्होंने कहा कि पंचकोशी परिक्रमा की शुरुआत में श्रद्धालु जब यहां स्नान करेंगे, तो घाट पर स्वच्छता और जल की शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाएगा। खासकर नदी के अंदर जो गंदगी जम जाती है, उसे साफ करना जरूरी है।

29 किमी के नए घाट तैयार होंगे

सीएम ने कहा कि सिध्दनाथ से त्रिवेणी तक 29 किमी के नए घाट तैयार होंगे। पहले से 6 किमी के घाट बने हुए है। इस तरह से कुम्भ में आने वाले श्रद्धालुओं को 35 किमी के घाट उपलब्ध होंगे। कुम्भ में हर घाट रामघाट होगा। श्रद्धालु कहीं भी स्नान करेंगे उन्हें उतना ही पुण्य मिलेगा। इस बार कुम्भ में जलमार्ग बनाने जा रहे है। शनि मंदिर से रामघाट, गऊघाट से लालपुर, मंगलनाथ से रामघाट तक नौकायन से लोग आना-जाना कर सकेंगे।

जल गंगा संवर्धन अभियान में उज्जैन पहुंचे सीएम

सीएम ने कहा, शिप्रा नदी के किनारे पंचकोशी परिक्रमा की एक पुरानी परंपरा रही है। हर साल हजारों-लाखों लोग यहां आकर परिक्रमा करते हैं। इस परिक्रमा की शुरुआत में श्रद्धालु जब यहां स्नान करेंगे, तो घाट पर स्वच्छता और जल की शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाएगा। खासकर नदी के अंदर जो गंदगी जम जाती है, उसे साफ करना जरूरी है।

मीडिया से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 'जल गंगा संवर्धन अभियान' 30 मार्च (गुड़ी पड़वा) से शुरू होकर 30 जून तक चलेगा। इसका उद्देश्य प्रदेश की नदियों और अन्य जल स्रोतों का संरक्षण करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश वास्तव में नदियों का मायका है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रदेश में कोई ग्लेशियर नहीं होने के बावजूद, यहां की भौगोलिक और वन संपदा के साथ-साथ जनभागीदारी के कारण पर्याप्त जलराशि उपलब्ध है। उन्होंने नर्मदा, केन-बेतवा, चंबल और सोन जैसी प्रमुख नदियों का उल्लेख करते हुए बताया कि ये न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पड़ोसी राज्यों के लिए भी जीवनदायिनी हैं।

डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश की कुल जलराशि किसी भी तरह से हिमालय के जल स्रोतों से कम नहीं है। उन्होंने जल स्रोतों के उचित रखरखाव, भूगर्भ जल भंडारण क्षमता में वृद्धि और जल के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री के 'जल ही जीवन है' के आह्वान को दोहराते हुए बताया कि राज्य सरकार अमृत सरोवर, खेत तालाब और पुरानी जल संरचनाओं के पुनरुद्धार के माध्यम से जल संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।

जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत मैं उज्जैन प्रवास पर आया था। शिप्रा को नमन करते हुए मैंने यहां स्नान भी किया और सेवा भाव से कार्य किया। यह हम सबका फर्ज भी है।

शिप्रा को नमन करते हुए स्नान किया

सीएम ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत मैं उज्जैन प्रवास पर आया था। शिप्रा को नमन करते हुए मैंने यहां स्नान भी किया और सेवा भाव से कार्य किया। यह हम सबका फर्ज भी है।

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