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वक्फ ऐक्ट पर SC में बरसे सिब्बल, कलेक्टर की पावर, हिंदुओं की एंट्री, बेंच बोली- आपको क्या

नई दिल्ली
वक्फ संशोधन अधिनियम के खिलाफ दायर 70 से अधिक याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। मुस्लिम पक्ष की ओर से दलीलें देते हुए कपिल सिब्बल ने ऐक्ट पर सवाल उठाए हैं और कहा कि वक्फ बोर्ड में हिंदुओं की एंट्री कर दी गई है, यह संविधान के आर्टिकल 26 का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि आर्टिकल 26 धार्मिक संस्थानों के संचालन की स्वायत्तता देता है। अब नया वक्फ ऐक्ट उस स्वायत्तता को छीनने वाला है। कपिल सिब्बल ने कहा कि अब तक वक्फ काउंसिल और बोर्ड के मेंबर मुसलमान ही होते थे, लेकिन अब हिंदुओं की भी इनमें एंट्री होगी। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि आपकी दिक्कत क्या है। कपिल सिब्बल ने कहा कि यह तो संसद में बनाए कानून के जरिए मूलभूत अधिकार छीनने जैसा है।

चीफ जस्टिस ने यह भी कहा कि कुल 2 पदेन सदस्य ही गैर-मुसलमान हो सकते हैं। इस पर कपिल सिब्बल ने कहा, 'नहीं-नहीं, ऐसा नहीं है। यह कहा गया है कि न्यूनतम गैर-मुस्लिम पदेन सदस्यों की संख्या 2 रहेगी। आर्टिकल 26 के अनुसार सभी सदस्य मुसलमान ही होने चाहिए, लेकिन अब नए ऐक्ट के अनुसार 22 में से 10 ही मुसलमान होंगे।' यही नहीं कपिल सिब्बल ने कहा कि यह तो एक तरह से सदस्यों को मनोनीत करके वक्फ बोर्ड पर ही कब्जा जमाने जैसा होगा। उन्होंने 1995 के वक्फ ऐक्ट का हवाला दिया और कहा कि तब तय हुआ था कि बोर्ड के सारे सदस्य मुस्लिम ही होंगे। यही नहीं कपिल सिब्बल ने वक्फ बोर्ड को लेकर कलेक्टर की पावर पर भी सवाल उठाए।

कलेक्टर की पावर पर बिफरे कपिल सिब्बल, बोले- इससे मनमानी होगी
कपिल सिब्बल ने कहा, 'कलेक्टर को यह ताकत दी गई है कि वह तय करें कि कोई संपत्ति वक्फ की है या नहीं। यदि कोई विवाद हुआ तो यह शख्स सरकार का प्रतिनिधि होगा। इसके अलावा मामले में यही व्यक्ति जज की भूमिका भी अदा करेगा। यह तो असंवैधानिक हुआ। यह कानून यह भी कहता है कि जब तक कलेक्टर की ओर से तय नहीं किया जाता, तब तक किसी भी संपत्ति को वक्फ की प्रॉपर्टी नहीं माना जाएगा।' इस बीच बेंच में शामिल जस्टिस विश्वनाथन ने कहा कि आप हिंदुओं की एंट्री पर आर्टिकल 26 के नाम पर आपत्ति जता रहे हैं। लेकिन यहां कन्फ्यूज होने की जरूरत नहीं है। आर्टिकल 26 में प्रशासन की बात है। उसमें जरूरी धार्मिक मान्यताओं के बारे में कुछ नहीं कहा गया है। इस पर कपिल सिब्बल ने कहा कि ऐसी व्यवस्था की गई है कि सदस्यों के नॉमिनेशन के जरिए बोर्ड पर ही कब्जा जमा लिया जाए।

सीनियर वकील ने यह भी कहा कि नया ऐक्ट कहते हैं कि किसी संपत्ति को वक्फ तभी माना जाएगा, जब उसकी वक्फ डीड हो। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि परेशानी क्या है? सिब्बल ने कहा कि वक्फ बाई यूजर की अवधारणा है। मान लीजिए कि मेरे पास संपत्ति है और मेरे कोई संतान नहीं है। फिर मुझे रजिस्ट्रेशन कराने की क्या जरूरत है। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि रजिस्ट्रेशन से तो हेल्प ही मिलेगी। इस पर कपिल सिब्बल ने कहा कि वक्फ बाई यूजर तो अब खत्म कर दिया गया है। अयोध्या के फैसले से यह पता चलता है। इस पर जस्टिस विश्वनाथन ने कहा कि फर्जी दावों को रोकने के लिए वक्फ डीड की बात कही गई है। इस पर सिब्बल ने कहा कि यह इतना आसान नहीं है। वक्फ की संपत्तियां सैकड़ों साल पुरानी हैं। वे तो 300 साल पुरानी संपत्ति की भी वक्फ डीड मांग लेंगे। असल में यही समस्या है।

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