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टेक्नोलॉजी

मार्च 2020 से लेकर मार्च 2025 तक कुल 17 बार UPI हुआ ठप

नई दिल्ली

पिछले दिनों UPI के एक महीने में तीसरी बार ठप होने की वजह से इस पर चर्चा शुरू हो गई है। वहीं अब UPI डाउन होने को लेकर कुछ डेटा निकल कर सामने आया है। NPCI के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2020 से लेकर मार्च 2025 तक कुल 17 बार UPI ठप रहा। इस दौरान लगभग 1000 मिनटों तक UPI के जरिए पैसों का कोई लेन-देन नहीं हो सका। बता दें कि NPCI की वेबसाइट पर फिलहाल अप्रैल 2025 में इसके ठप होने का डेटा अपडेट नहीं किया गया है। इसे लेकर सोशल मीडिया साइट X पर NPCI ने यह बयान दिया था- ‘NPCI को रुक-रुक कर तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिससे UPI लेनदेन में गिरावट आ रही है।’ NPCI ने इसे लेकर खेद जताया और माफी भी मांगी।

जुलाई 2024 में सबसे ज्यादा देर ठप रहा UPI

डेटा से पता चला है कि जुलाई 2024 में सबसे ज्यादा देर के लिए UPI ठप रहा था। उस महीने में यह 207 मिनट बंद रहा। वहीं जानकारी यह भी दी गई है कि UPI का अपटाइम हर महीने 99% से ज्यादा रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि 1 घंटे के लिए UPI ठप होने का मतलब है कि तकरीबन 4 करोड़ UPI लेनदेन का प्रभावित होना। बता दें कि मार्च में UPI के जरिये रोजाना औसतन 59 करोड़ का लेनदेन हुआ। 26 मार्च को UPI पहली बार ठप हुआ था और उस दिन 55 करोड़ का लेनदेन हुआ, जो इससे पिछले दिन किए गए 58.1 करोड़ के लेनदेन से 7% कम है।

उठ चुकी है UPI पर चार्ज लगाने की मांग

बता दें कि पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया इस तरीके की तकनीकी खामियों से निपटने के लिए PM मोदी से जीरो मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) नीति पर पुनर्विचार करने की मांग कर चुका है। इसके लिए पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था। दरअसल पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया चाहता है कि UPI और रुपे डेबिट कार्ड के ट्रांजेक्शन पर 0.3% का चार्ज लगाया जाए। बताया यह भी जा रहा है कि छोटे व्यापारियों के लिए किसी भी तरह की फीस को न लगाते हुए बड़े व्यापारियों को इस दायरे में लाने पर बात चल रही है। बताया जा रहा कि इस चार्ज का इस्तेमाल UPI सिस्टम को मेंटेन करने के लिए किया जाएगा।

किसकी कितनी हिस्सेदारी

हाल के दिनों में UPI पर दो कंपनियों का वर्चस्व देखने को मिला है। NPCI के आंकड़ों के अनुसार मार्च में UPI से होने वाले लेनदेन में 47.25% हिस्सा phonepe का रहा। वहीं दूसरे नंबर पर 36.04% हिस्सेदारी के साथ google pay रहा। वहीं अब paytm की हिस्सेदारी 6.67% रह गई है।

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