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विदेश

डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी आर्थिक और रणनीतिक नीतियों से चीन के सामने बड़ी मुश्किलें खड़ी कर दी, उड़ी नींद

वाशिंगटन
जब से अमेरिका में सत्ता बदली तब से चीन की परेशानियां कम होने का नाम नहीं रही। नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी आर्थिक और रणनीतिक नीतियों से चीन के सामने बड़ी मुश्किलें खड़ी कर दी है। भारी टैरिफ लगाने के बाद अब डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के लिए एक बार फिर सिरदर्दी बढ़ा दी है। अमेरिका ने हाल ही में एक ऐसा प्लान तैयार किया जिससे चीन को काफी मुश्किलें होंगी। हाल ही में पानामा नहर को लेकर एक बार फिर अमेरिका ने कड़ा रुख अपनाया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पिट हेजसेथ ने साफ शब्दों में कहा है कि अमेरिका, पनामा के साथ मिलकर चीन के प्रभाव को खत्म करेगा और इस रणनीतिक जलमार्ग पर फिर से अपना प्रभाव स्थापित करेगा।

दरअसल, बीते कुछ दिनों में पिट हेजसेथ पनामा के दौरे पर थे। पिछले कई दशकों में ऐसा पहली बार हुआ जब कोई अमेरिकी रक्षा मंत्री पनामा पहुंचा। वहां उन्होंने पनामा के राष्ट्रपति होसे राउल मुलिनो से बंद कमरे में बातचीत की। इस मीटिंग में खासतौर से चीन की तरफ से पनामा नहर में हो रहे निवेश और बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंता जताई गई। चर्चा के बाद पिट ने ऐलान किया कि अमेरिका और पनामा की सेनाएं मिलकर सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करेंगी।

चीन का प्रभाव खत्म करने की तैयारी
हेजसेथ ने कहा, "हम चीन के प्रभाव से पनामा नहर को मुक्त कराएंगे। चीन ने नहर बनाई नहीं है और न ही वो इसका संचालन करता है। ऐसे में उसे इसे एक हथियार की तरह इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।" उन्होंने कहा कि अगर 1999 के बाद अमेरिका और पनामा के बीच एक नया समझौता होता है तो चीन के प्रभाव से नहर को आजाद किया जा सकता है।

गौरतलब है कि पनामा नहर अमेरिका के लिए हमेशा से रणनीतिक महत्व की रही है। 20वीं सदी की शुरुआत में अमेरिका ने ही इस नहर का निर्माण किया था जो अटलांटिक और प्रशांत महासागर को जोड़ती है। दशकों तक अमेरिका इसका संचालन करता रहा, लेकिन 1977 में तत्कालीन राष्ट्रपति जिमी कार्टर के समय हुए समझौते के तहत 1999 में इसका नियंत्रण पनामा को सौंप दिया गया।

पनामा नहर को लेकर फिर आक्रामक अमेरिका
लेकिन डोनाल्ड ट्रंप जब दोबारा राष्ट्रपति बने तो उन्होंने इस नहर को लेकर एक बार फिर आक्रामक रुख दिखाया। उन्होंने पनामा पर अमेरिकी जहाजों से जबरन शुल्क वसूलने का आरोप लगाया था और साफ किया था कि अमेरिका इस नहर को फिर से अपने नियंत्रण में ले सकता है। फरवरी में पनामा ने अमेरिकी दबाव के चलते चीन के बेल्ट एंड रोड परियोजना से खुद को अलग कर लिया था। अब अमेरिका इस मौके को भुनाकर पनामा नहर में अपनी वापसी की राह तलाश रहा है।

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